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शराब के खिलाफ सड़क पर उतरी महिलाएं
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उत्तराखंड में पूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर चंबा ब्लाक की महिलाओं ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। शराब के दाम घटाए जाने पर महिलाओं ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। सरकार से नशा नहीं रोजगार देेने की मांग की गई। कहा शराब के बजाय देवभूमि उत्तराखंड में सरकार को तीर्थाटन और पर्यटन को प्रोत्साहन देने की योजना बनानी चाहिए। इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
शराब नहीं संस्कार अभियान से जुड़ी चंबा ब्लाक की महिलाएं डाइजर से जनगीत गाते हुए जुलूस प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट पहुंची। उत्तराखंड में पूर्ण शराब बंदी की मांग को लेकर उन्होंने प्रदर्शन किया। सरकार के उस निर्णय का विरोध किया, जिसमें शराब के दामों में 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
राड्स संस्था के अध्यक्ष सुशील बहुगुणा ने कहा कि नौजवानों को रोजगार देने के बजाए सरकार शराब को प्रोत्साहन देने की योजना पर काम कर रही है। तीर्थाटन और पर्यटन से राजस्व अर्जित किया जा सकता है, लेकिन तीर्थाटन और पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार के पास कोई भी योजना नहीं है। अच्छा होता कि सरकार पूर्व की भांति शराब बिक्री का समय दोपहर 12 बजे से शाम छह तक करती।
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प्रीति जड़धारी ने कहा कि शराब से सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और छोटे बच्चे हैं। घर-घर में शराब का प्रचलन बढ़ने से महिलाएं और बच्चे अपने घरों में सुरक्षित नहीं रह गए हैं। भगवान चंद रमोला ने कहा कि शराब सस्ती होने से कंपनियां शराब की गुणवत्ता में कमी कर घटिया शराब बेचेगी और इसका खामियाजा भी शराब पीने वाले व्यक्ति और परिवार को झेलना पड़ेेगा। यदि सरकार निर्णय को नहीं बदलती है, तो प्रदेशभर की महिलाएं सड़कों पर उतर कर विरोध करेंगी। बाद में उन्होंने मांग के संबंध में एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इस मौके पर गुड्डी देवी, अनीता उनियाल, मीना भंडारी, कुंभीबाला भट्ट, पिंकी भंडारी, रजनी देवी, सीता, नीमा डोभाल, रुकमणी, कुसुम कोठारी, सोनिका, आशीष, पंकज, सविता, सरोजनी, मुन्नी, मुकेश बेलवाल, निर्मला, बीना, सरस्वती उपस्थित रही।
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शराब नहीं संस्कार अभियान से जुड़ी चंबा ब्लाक की महिलाएं डाइजर से जनगीत गाते हुए जुलूस प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट पहुंची। उत्तराखंड में पूर्ण शराब बंदी की मांग को लेकर उन्होंने प्रदर्शन किया। सरकार के उस निर्णय का विरोध किया, जिसमें शराब के दामों में 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
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राड्स संस्था के अध्यक्ष सुशील बहुगुणा ने कहा कि नौजवानों को रोजगार देने के बजाए सरकार शराब को प्रोत्साहन देने की योजना पर काम कर रही है। तीर्थाटन और पर्यटन से राजस्व अर्जित किया जा सकता है, लेकिन तीर्थाटन और पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार के पास कोई भी योजना नहीं है। अच्छा होता कि सरकार पूर्व की भांति शराब बिक्री का समय दोपहर 12 बजे से शाम छह तक करती।
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प्रीति जड़धारी ने कहा कि शराब से सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और छोटे बच्चे हैं। घर-घर में शराब का प्रचलन बढ़ने से महिलाएं और बच्चे अपने घरों में सुरक्षित नहीं रह गए हैं। भगवान चंद रमोला ने कहा कि शराब सस्ती होने से कंपनियां शराब की गुणवत्ता में कमी कर घटिया शराब बेचेगी और इसका खामियाजा भी शराब पीने वाले व्यक्ति और परिवार को झेलना पड़ेेगा। यदि सरकार निर्णय को नहीं बदलती है, तो प्रदेशभर की महिलाएं सड़कों पर उतर कर विरोध करेंगी। बाद में उन्होंने मांग के संबंध में एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इस मौके पर गुड्डी देवी, अनीता उनियाल, मीना भंडारी, कुंभीबाला भट्ट, पिंकी भंडारी, रजनी देवी, सीता, नीमा डोभाल, रुकमणी, कुसुम कोठारी, सोनिका, आशीष, पंकज, सविता, सरोजनी, मुन्नी, मुकेश बेलवाल, निर्मला, बीना, सरस्वती उपस्थित रही।