{"_id":"5dcd85448ebc3e54af1ec5a9","slug":"solution-of-himalayan-problems-dr-rawat-new-tehri-news-drn3259981178","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमालय की समस्याओं का समाधान निकालें वैज्ञानिक: डा. रावत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमालय की समस्याओं का समाधान निकालें वैज्ञानिक: डा. रावत
विज्ञापन
हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर पीजी कालेज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताते हुए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
पीजी कालेज में जंतु विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार का शुभारंभ उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन, विभिन्न आपदाएं और टिहरी झील में महाशीर प्रजाति की मछली का विलुप्त होना चिंताजनक है। जलवायु परिवर्तन पर चिंतन कर जो निष्कर्ष निकलेगा, उससे सरकार को भी अवगत कराएं। उन्होंने महाविद्यालय को राजनीतिक विज्ञान और संस्कृत विषय में एक-एक असिस्टेंट प्रोफेसर और 200 कुर्सी-मेज देने का आश्वासन दिया। विशिष्ठ अतिथि टिहरी विधायक धन सिंह नेगी ने टिहरी झील में विभिन्न प्रजाति की मछलियों का उत्पादन करने पर जोर दिया। गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि भौतिकवादी दौड़ में मनुष्य अपना और समाज के स्वास्थ्य की अनदेखी कर रहा है। यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. आरपी डोभाल ने कहा कि जैव विविधता और पर्यावरणीय संकट के खतरों के पीछे वैश्वीकरण की अवधारणा है। नाबार्ड के सलाहकार डा. डब्ल्यूएस लाकरा ने कहा कि हिमालय की सुरक्षा के प्रति गंभीर होकर प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है। श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा. यूएस रावत और प्रो. आशा चंदोला सकलानी ने कहा कि टिहरी झील में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का उत्पादन कर आर्थिकी बढ़ाई जा सकती है। सेमिनार में शोधपत्रों की सारांश विवरण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
आयोजक सचिव डा. विजय प्रकाश सेमवाल ने बताया कि सेमिनार में नेपाल, जापान, कनाडा सहित देश के 150 वैज्ञानिक शिरकत कर रहे हैं। इस मौके पर पौड़ी विधायक मुकेश कोहली, प्राचार्य डा. अशोक कुमार, डायट के प्राचार्य चेतन प्रसाद नौटियाल, डा. डीपीएस भंडारी, डा. कुलदीप रावत, डा. कविता काला, डा. शालिनी रावत, डा. संजीव नेगी, डा. प्रीति शर्मा, डा. अरविंद पैन्यूली, डा. मणिकांत शाह, डा. हर्ष नेगी, डा. आरती खंडूड़ी, डा. सुशील, डा. निशांत भट्ट, डा. आशा डोभाल, डा. गुरुपद गुसाईं आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीजी कालेज में जंतु विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार का शुभारंभ उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन, विभिन्न आपदाएं और टिहरी झील में महाशीर प्रजाति की मछली का विलुप्त होना चिंताजनक है। जलवायु परिवर्तन पर चिंतन कर जो निष्कर्ष निकलेगा, उससे सरकार को भी अवगत कराएं। उन्होंने महाविद्यालय को राजनीतिक विज्ञान और संस्कृत विषय में एक-एक असिस्टेंट प्रोफेसर और 200 कुर्सी-मेज देने का आश्वासन दिया। विशिष्ठ अतिथि टिहरी विधायक धन सिंह नेगी ने टिहरी झील में विभिन्न प्रजाति की मछलियों का उत्पादन करने पर जोर दिया। गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि भौतिकवादी दौड़ में मनुष्य अपना और समाज के स्वास्थ्य की अनदेखी कर रहा है। यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. आरपी डोभाल ने कहा कि जैव विविधता और पर्यावरणीय संकट के खतरों के पीछे वैश्वीकरण की अवधारणा है। नाबार्ड के सलाहकार डा. डब्ल्यूएस लाकरा ने कहा कि हिमालय की सुरक्षा के प्रति गंभीर होकर प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है। श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा. यूएस रावत और प्रो. आशा चंदोला सकलानी ने कहा कि टिहरी झील में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का उत्पादन कर आर्थिकी बढ़ाई जा सकती है। सेमिनार में शोधपत्रों की सारांश विवरण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन
आयोजक सचिव डा. विजय प्रकाश सेमवाल ने बताया कि सेमिनार में नेपाल, जापान, कनाडा सहित देश के 150 वैज्ञानिक शिरकत कर रहे हैं। इस मौके पर पौड़ी विधायक मुकेश कोहली, प्राचार्य डा. अशोक कुमार, डायट के प्राचार्य चेतन प्रसाद नौटियाल, डा. डीपीएस भंडारी, डा. कुलदीप रावत, डा. कविता काला, डा. शालिनी रावत, डा. संजीव नेगी, डा. प्रीति शर्मा, डा. अरविंद पैन्यूली, डा. मणिकांत शाह, डा. हर्ष नेगी, डा. आरती खंडूड़ी, डा. सुशील, डा. निशांत भट्ट, डा. आशा डोभाल, डा. गुरुपद गुसाईं आदि मौजूद थे।
विज्ञापन