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जमीन के फर्जी कागज बनाकर फंसाया लोन के जाल में

Thu, 06 Feb 2020 09:42 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2020 09:42 PM IST
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Fake paper made by making fake paper of land
उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की नागणी शाखा में फर्जी तरीके से किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर ऋण बांटकर कमीशनखोरी करने का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधकों ने पिछले कई साल में भूमिहीन, कम भूमि वाले अनुसूचित जाति और गरीब लोगों को जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर अनुदान के नाम पर उन्हें कृषि ऋण के जाल में फंसा दिया। कई साल बाद बैंक से ऋण वसूली के नोटिस मिलने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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उत्तराखंड ग्रामीण बैंक नागणी में कृषि ऋण के नाम पर फर्जीवाड़ा का बड़ा मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन ने पिछले आठ-दस साल से ग्रामीणों की फर्जी खाता खतौनी और हिस्सा प्रमाणपत्र तैयार कर राजस्व विभाग की फर्जी मुहर लगा दी। उन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चंबा के जड़धार गांव, पलास, स्वाड़ी, कुड़ियाल गांव, इंडवाल गांव और नरेंद्रनगर के पिपलेथ, आमपाटा, स्वीर, कुड़ी और टिपली सहित कई गांवों के लोगों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनाए। उसके बाद ग्रामीणों को बैंक प्रबंधन ने यह लालच दिया कि केसीसी से मिलने वाली रकम पूरी तरह से अनुदान है, जिसे जमा करने की जरूरत नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि केसीसी से मिलने वाली रकम का आधा हिस्सा बैंक वापस ले लेता था। इस ठगी में अधिकांश अनुसूचित जाति के गरीब तबके के लोग हैं।
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आमपाटा के पीड़ित भगवान दास, जड़धार गांव के चमन दास और पलास गांव के प्रकाश दास ने बताया कि बैंक प्रशासन ने हमें अनुदान बताकर ऋण के जाल में फंसाया, लेकिन अब वसूली के नोटिस मिलने पर कर्जा जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता विजय जड़धारी और ज्येष्ठ प्रमुख संजय मैठाणी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बैंक प्रबंधन ने ग्रामीणों को अनुदान का लालच देकर ठगा है। बैंक प्रबंधन ने सैकड़ों किसानों के जाली दस्तावेज बनाकर दो करोड़ से अधिक का गबन किया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कराने और फर्जी ऋण माफ करने की मांग की है।
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पोल खुलने की डर से पुत्र को दिया लोन
पिपलेथ गांव के मोहन दास के पिता बिजूल दास को बैंक ने किसान ऋण दिया था। अकस्मात बिजूल दास की मृत्यु होने पर बैंक ने पोल खुलने की डर से उसके बेटे मोहन दास के नाम से दूसरा केसीसी बनाया। साथ ही पैसे से बिजूल दास का लोन बंद कर दिया। अब मोहन दास को वसूली के नोटिस मिल रहे हैं।

भूमिहीन को भी मिल गया केसीसी
केसीसी के लिए ग्रामीण के नाम पर राजस्व अभिलेखों में भूमि दर्ज होना आवश्यक है, लेकिन सकलाना से पलास गांव में रह रहे भूमिहीन भगवान दास, जखोली के आमपाटा में रह रहे सुरेश दास और अषाडू दास का भी किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर ऋण के नाम गबन किया गया है।
इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अभी तक किसी ऋणी ने लिखित सूचना नहीं दी है। यदि कोई सूचना मिलती है, तो जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-सोराज सिंह, शाखा प्रबंधक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक नागणी।
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