झील के उतार चढ़ाव के कारण हुए नुकसान के आकलन को तीन साल से विशेषज्ञ कमेटी का दौरा नहीं हो पाया है, जिससे प्रभावितों का क्षतिपूर्ति भुगतान नहीं हो पाया है। प्रभावितों ने प्रशासन से जल्द कमेटी बुलाकर क्षति का आकलन करने की मांग की।
टिहरी बांध की झील के जलस्तर में उतार चढ़ाव के कारण आरएल 835 से ऊपर निवासरत लोगों के भवन और भूमि को नुकसान होता है। सरकार ने नुकसान के आकलन को वर्ष 2010 में आईआईटी रुड़की, वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों, पर्यावरण, राजस्व, भू-गर्भीय विभाग, पुनर्वास, टीएचडीसी के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई थी। कमेटी प्रत्येक वर्ष जलस्तर कम होने पर फरवरी के बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन का रिपोर्ट प्रशासन को देती थी, जिसके बाद प्रभावितों को क्षतिपूर्ति के रूप में पुनर्वास निदेशालय टीएचडीसी के वित्तीय सहयोग से मुआवजा देता था। आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा, प्रदीप भट्ट, राम सिंह ने बताया कि तीन साल से कमेटी का दौरान न होने के कारण क्षति का आकलन नहीं हो पाया है। बताया कि पुनर्वास और टीएचडीसी प्रभावितों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। इस संबंध में अवस्थापना खंड पुनर्वास के एई राकेश निराला ने कहा कि जल्द ही उच्चाधिकारियों से संपर्क कर समस्या का निराकरण करवाया जाएगा।