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हिमालयी क्षेत्रों के लिए बने अलग से नीति
Tehri
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
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नई टिहरी। अलग हिमालय नीति बनाने की मांग को लेकर गंगोत्री से गंगा सागर तक चलाई जा रही यात्रा रविवार को यहां पहुंची। इस मौके पर यात्रा में शामिल लोगों ने हिमालय नीति की वकालत की।
प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में यात्रा के संयोजक सुरेश भाई ने कहा कि गंगोत्री से 11 अक्तूबर को शुरू हुई अलग हिमालयी नीति अभियान यात्रा 30 को हरिद्वार पहुंचेगी। दूसरे चरण में हरिद्वार से गंगा सागर तक यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा के दौरान लोगों से लिए गए सुझाव पर हिमालय लोक नीति का मसौदा के ड्राफ्ट को तैयार कर सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बाद हरिद्वार से गंगा सागर तक दूसरे चरण की यात्रा शुरू की जाएगी। यात्रा में शामिल प्रो. वीरेंद्र पैन्यूली ने कहा कि बाढ़, भूकंप, भूस्खलन के साथ-साथ अब मानवकृत आपदाओं से त्रस्त पूरे हिमालय क्षेत्र और इससे जुड़े मैदानी इलाकों की चिंता केंद्र और राज्य सरकारों को समय रहते नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन का संकट बढ़ेगा। अरण्य रंजन ने कहा कि केदारघाटी और जम्मू कश्मीर में हुई जल प्रलय भी कहीं हिमालयी क्षेत्र में हो रहे अनियमित विकास का ही परिणाम है। कुंवर सिंह सजवाण ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की पर्यावरणीय, भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार को एक एकीकृत केंद्रीय हिमालय नीति बनानी चाहिए।
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प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में यात्रा के संयोजक सुरेश भाई ने कहा कि गंगोत्री से 11 अक्तूबर को शुरू हुई अलग हिमालयी नीति अभियान यात्रा 30 को हरिद्वार पहुंचेगी। दूसरे चरण में हरिद्वार से गंगा सागर तक यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा के दौरान लोगों से लिए गए सुझाव पर हिमालय लोक नीति का मसौदा के ड्राफ्ट को तैयार कर सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बाद हरिद्वार से गंगा सागर तक दूसरे चरण की यात्रा शुरू की जाएगी। यात्रा में शामिल प्रो. वीरेंद्र पैन्यूली ने कहा कि बाढ़, भूकंप, भूस्खलन के साथ-साथ अब मानवकृत आपदाओं से त्रस्त पूरे हिमालय क्षेत्र और इससे जुड़े मैदानी इलाकों की चिंता केंद्र और राज्य सरकारों को समय रहते नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन का संकट बढ़ेगा। अरण्य रंजन ने कहा कि केदारघाटी और जम्मू कश्मीर में हुई जल प्रलय भी कहीं हिमालयी क्षेत्र में हो रहे अनियमित विकास का ही परिणाम है। कुंवर सिंह सजवाण ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की पर्यावरणीय, भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार को एक एकीकृत केंद्रीय हिमालय नीति बनानी चाहिए।
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