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मातम में बदला खुशियों का माहौल
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कंडीसौड़ (टिहरी)। अंधियारी चापड़ा (काथणा) गांव में ज्योति प्रसाद और राजमति देवी के घर में मंगलवार सुबह तक खुशी का माहौल था। उनकी बड़ी बेटी बबली की 27 अप्रैल को मेंहदी की रस्म और 28 अप्रैल को उसकी बारात आनी थी। पति-पत्नी जोर शोर से बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे थे। मंगलवार सुबह वे शादी के सामान की खरीददारी और बैंक के कार्य से चिन्यालीसौड़ जा रहे थे, लेकिन काल के क्रूर हाथों ने बबली की डोली उठने से पहले ही माता-पिता का साया उसके सिर से छीन लिया। हादसे में दंपति की मौत हो गई।
खेतों में हाड़तोड़ मेहनत मजदूरी कर ज्योति प्रसाद और उनकी पत्नी राजमति देवी ने बड़ी बेटी बबली को धूमधाम से ससुराल विदा करने के लिए कई सपने संजोए थे। 28 अप्रैल को चंबा के कांडा गांव से बबली की बारात आनी थी। घर में पहली शादी होने से परिवार और नाते रिश्तेदारों में खासा उत्साह था, लेकिन सड़क हादसे में दंपति की मौत ने इस खुशी को मातम में बदल दिया। परिवार पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों के भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है। ज्योति प्रसाद खेती और मजदूरी करते थे, जबकि उनकी पत्नी राजमति देवी गांव के ही स्कूल में भोजन माता का कार्य करती थीं। बबली की 14 वर्षीय छोटी बहन राधिका दोनों पैरों से दिव्यांग है। वह चलने में असमर्थ है। छोटा भाई दीपक (10 वर्ष) कक्षा छह और प्रदीप (सात वर्ष) कक्षा चार में पढ़ता है।
दोपहर तक लौट आएंगे, तब खाना बनाएंगे
कंडीसौड़ (टिहरी)। घर से चिन्यालीसौड़ जाते वक्त बबली के पिता ज्योति प्रसाद और मां राजमति ने कहा था ‘बेटी अभी खाना मत बनाना, हम दोपहर 12-01 बजे तक लौट आएंगे, तब खाना बनाएंगे’। लेकिन चिन्यालीसौड़ पहुंचने से पहले ही उनकी मौत की खबर आ गई। हादसे की खबर से पूरा गांव शोक में डूबा है। ब्यूरो
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चंद्रा का रो रोकर बुरा हाल
कंडीसौड़ (टिहरी)। मठियाली चिन्यालीसौड़ वाहन दुर्घटना की सूचना के बाद से वाहन चालक महादेव प्रसाद की पत्नी चंद्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेहोश हो रही है। चार छोटे-छोटे बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी अब चंद्रा के कंधों पर आ गई है। महादेव अपने पीछे पत्नी चंद्रा, बेटी अंजली (12), साधना (8), सिद्धि (6) और बेटा हरिकृष्ण (10) को रोता बिलखता छोड़ गया है। ब्यूरो
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खेतों में हाड़तोड़ मेहनत मजदूरी कर ज्योति प्रसाद और उनकी पत्नी राजमति देवी ने बड़ी बेटी बबली को धूमधाम से ससुराल विदा करने के लिए कई सपने संजोए थे। 28 अप्रैल को चंबा के कांडा गांव से बबली की बारात आनी थी। घर में पहली शादी होने से परिवार और नाते रिश्तेदारों में खासा उत्साह था, लेकिन सड़क हादसे में दंपति की मौत ने इस खुशी को मातम में बदल दिया। परिवार पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों के भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है। ज्योति प्रसाद खेती और मजदूरी करते थे, जबकि उनकी पत्नी राजमति देवी गांव के ही स्कूल में भोजन माता का कार्य करती थीं। बबली की 14 वर्षीय छोटी बहन राधिका दोनों पैरों से दिव्यांग है। वह चलने में असमर्थ है। छोटा भाई दीपक (10 वर्ष) कक्षा छह और प्रदीप (सात वर्ष) कक्षा चार में पढ़ता है।
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दोपहर तक लौट आएंगे, तब खाना बनाएंगे
कंडीसौड़ (टिहरी)। घर से चिन्यालीसौड़ जाते वक्त बबली के पिता ज्योति प्रसाद और मां राजमति ने कहा था ‘बेटी अभी खाना मत बनाना, हम दोपहर 12-01 बजे तक लौट आएंगे, तब खाना बनाएंगे’। लेकिन चिन्यालीसौड़ पहुंचने से पहले ही उनकी मौत की खबर आ गई। हादसे की खबर से पूरा गांव शोक में डूबा है। ब्यूरो
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चंद्रा का रो रोकर बुरा हाल
कंडीसौड़ (टिहरी)। मठियाली चिन्यालीसौड़ वाहन दुर्घटना की सूचना के बाद से वाहन चालक महादेव प्रसाद की पत्नी चंद्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेहोश हो रही है। चार छोटे-छोटे बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी अब चंद्रा के कंधों पर आ गई है। महादेव अपने पीछे पत्नी चंद्रा, बेटी अंजली (12), साधना (8), सिद्धि (6) और बेटा हरिकृष्ण (10) को रोता बिलखता छोड़ गया है। ब्यूरो