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पुण्यतिथि पर लोक गायिका बचन देई को किया याद
Updated Sun, 04 Nov 2018 10:49 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। राधाखंडी शैली की लोक गायिका बचनदेई का पांचवीं पुण्य तिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बचन देई फाउंडेशन की ओर से पुण्य तिथि पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर याद किया गया। बचनदेई एवं उनके पति शिवचरण श्यामवेदी ने पारंपरिक शिवपूजा, राधाखंडी, चैती बडोल, औंसर, पवाडा, छुडा, झुमैलू, सदेईगीत, चैतवाली, जागर सहित कई गढ़वाली गायनों में महारथ हासिल की थी। बचनदेई ने अपनी आवाज के दम पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली समेत कई स्थानों पर प्रस्तुतियां देकर मिसाल पेश की थी। साथ ही उनके गायन पर विदेशी संस्कृति शोधकर्ता एंड्रो अल्टर आदि लोगों ने शोध किया है। बचनदेई को संगीत के क्षेत्र में गढ़वाल विश्वविद्यालय ने डॉक्ट्रेट की उपाधि से भी नवाजा था। पूर्व ब्लाक प्रमुख धनीलाल शाह ने कहा कि समाज में कुछ नया करने वाले कभी मरते नहीं हैं, वे हमेशा समाज को प्रेरणा देते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल ने कहा कि ऐसी अनोखी विद्या को बचाने के लिए सभी लोगों को प्रयास करना चाहिए। इस मौके पर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. प्रकाश चंद्र श्यामवेदी, आनंदी शाह, रमेश प्रसाद, नत्थी लाल शाह, हर्षलाल, सत्यप्रकाश, सतीश, प्रभात, मीना देवी, रुकमणी, निधि, प्रियंका आदि मौजूद थे।
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बचन देई फाउंडेशन की ओर से पुण्य तिथि पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर याद किया गया। बचनदेई एवं उनके पति शिवचरण श्यामवेदी ने पारंपरिक शिवपूजा, राधाखंडी, चैती बडोल, औंसर, पवाडा, छुडा, झुमैलू, सदेईगीत, चैतवाली, जागर सहित कई गढ़वाली गायनों में महारथ हासिल की थी। बचनदेई ने अपनी आवाज के दम पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली समेत कई स्थानों पर प्रस्तुतियां देकर मिसाल पेश की थी। साथ ही उनके गायन पर विदेशी संस्कृति शोधकर्ता एंड्रो अल्टर आदि लोगों ने शोध किया है। बचनदेई को संगीत के क्षेत्र में गढ़वाल विश्वविद्यालय ने डॉक्ट्रेट की उपाधि से भी नवाजा था। पूर्व ब्लाक प्रमुख धनीलाल शाह ने कहा कि समाज में कुछ नया करने वाले कभी मरते नहीं हैं, वे हमेशा समाज को प्रेरणा देते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. नरेंद्र डंगवाल ने कहा कि ऐसी अनोखी विद्या को बचाने के लिए सभी लोगों को प्रयास करना चाहिए। इस मौके पर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. प्रकाश चंद्र श्यामवेदी, आनंदी शाह, रमेश प्रसाद, नत्थी लाल शाह, हर्षलाल, सत्यप्रकाश, सतीश, प्रभात, मीना देवी, रुकमणी, निधि, प्रियंका आदि मौजूद थे।
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