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गदेरे में सालभर से सड़ रहे 17 लाख के विद्युत पोल
Updated Sat, 11 Aug 2018 10:52 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। जर्जर विद्युत पोल बदलने के लिए ऊर्जा निगम और नगर पंचायतें अक्सर बजट का रोना रोता है, लेकिन 17 लाख के विद्युत पोल एक साल से श्रीकोट गदेरे में मलबे में दबकर सड़ रहे हैं। न ऊर्जा निगम और न ही नगर पंचायत चमियाला इन विद्युत पोलों की सुध ले रहा है।
घनसाली और चमियाला में कई स्थानों पर जर्जर विद्युत पोल हादसे को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोग कई बार ऊर्जा निगम से जर्जर खंभों को बदलने की मांग कर चुके हैं। जर्जर खंभों को बदलने के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारी अक्सर बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ देते हैं, लेकिन श्रीकोट गदेरे में मलबे के नीचे दबकर सड़ रहे विद्युत पोलों की ऊर्जा निगम को कोई चिंता नहीं है। हर्षमणी उनियाल, डीएस भंडारी और केसी नेगी का कहना है कि ऊर्जा निगम और नगर पंचायत अधिकारियों की लापरवाही से विद्युत पोल सड़ रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा निगम के सीएमडी और डीएम से लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस बाबत ऊर्जा निगम के एसडीओ एके सिंह का कहना है कि विद्युत पोल चमियाला नगर पंचायत क्षेत्र में लगने थे। इसके लिए नगर पंचायत ने 17 लाख का भुगतान जमा किया है। नगर पंचायत के ईओ वीरेंद्र पंवार ने बताया कि गांव के लोगों का आपसी विवाद अब सुलझ गया है। ऊर्जा निगम के ठेकेदार को काम शुरू करने के लिए एक माह पहले ही पत्र भेजा जा चुका है।
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घनसाली और चमियाला में कई स्थानों पर जर्जर विद्युत पोल हादसे को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोग कई बार ऊर्जा निगम से जर्जर खंभों को बदलने की मांग कर चुके हैं। जर्जर खंभों को बदलने के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारी अक्सर बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ देते हैं, लेकिन श्रीकोट गदेरे में मलबे के नीचे दबकर सड़ रहे विद्युत पोलों की ऊर्जा निगम को कोई चिंता नहीं है। हर्षमणी उनियाल, डीएस भंडारी और केसी नेगी का कहना है कि ऊर्जा निगम और नगर पंचायत अधिकारियों की लापरवाही से विद्युत पोल सड़ रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा निगम के सीएमडी और डीएम से लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस बाबत ऊर्जा निगम के एसडीओ एके सिंह का कहना है कि विद्युत पोल चमियाला नगर पंचायत क्षेत्र में लगने थे। इसके लिए नगर पंचायत ने 17 लाख का भुगतान जमा किया है। नगर पंचायत के ईओ वीरेंद्र पंवार ने बताया कि गांव के लोगों का आपसी विवाद अब सुलझ गया है। ऊर्जा निगम के ठेकेदार को काम शुरू करने के लिए एक माह पहले ही पत्र भेजा जा चुका है।
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