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आपदा के जख्म बने नासूर, गनगर बहेड़ी गांव की प्रशासन नहीं ले रहा सुध
Updated Wed, 08 Aug 2018 10:56 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। आपदा के जख्म नासूर बन गए है, लेकिन सरकारी तंत्र ग्राम गनगर बहेड़ी की सुध लेने को तैयार नहीं है। 28 मई 2016 की आपदा में ग्राम गनगर बहेड़ी के पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। दो साल बाद भी रास्ते नहीं सुधर पाए हैं।
भिलंगना ब्लॉक के ग्राम गनगर बहेड़ी के जंगल में 28 मई 2016 को बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। कृषि भूमि, पाइप लाइन और रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। चार मकानों को भी नुकसान पहुंचा था। ग्राम गनगर बहेड़ी के संजू, मनोज लाल, अरविंद, सुरेश लाल व संजय ने बताया कि क्वागदेरा, नृहसिंह मंदिर और प्राकृतिक जल स्रोत को जाने वाले रास्ते क्षतिग्रस्त पड़े हैं। प्रधान पारेश्वरी देवी का कहना है कि सेंदुल-पटुडगांव मोटर मार्ग के मलबे से रास्ते क्षतिग्रस्त हुए थे। इसलिए रास्तों के मरम्मत का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की ओर से पीएमजीएवाई को भेजा गया है। बीडीओ डीएन सकलानी का कहना है कि गनगर बहेड़ी गांव के रास्ते क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नहीं है। पंचायत मंत्री को गांव में निरीक्षण के लिए भेजकर रिपोर्ट मांगी जाएगी।
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भिलंगना ब्लॉक के ग्राम गनगर बहेड़ी के जंगल में 28 मई 2016 को बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। कृषि भूमि, पाइप लाइन और रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। चार मकानों को भी नुकसान पहुंचा था। ग्राम गनगर बहेड़ी के संजू, मनोज लाल, अरविंद, सुरेश लाल व संजय ने बताया कि क्वागदेरा, नृहसिंह मंदिर और प्राकृतिक जल स्रोत को जाने वाले रास्ते क्षतिग्रस्त पड़े हैं। प्रधान पारेश्वरी देवी का कहना है कि सेंदुल-पटुडगांव मोटर मार्ग के मलबे से रास्ते क्षतिग्रस्त हुए थे। इसलिए रास्तों के मरम्मत का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की ओर से पीएमजीएवाई को भेजा गया है। बीडीओ डीएन सकलानी का कहना है कि गनगर बहेड़ी गांव के रास्ते क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नहीं है। पंचायत मंत्री को गांव में निरीक्षण के लिए भेजकर रिपोर्ट मांगी जाएगी।
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