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मां के पवित्र संस्कार बनाते है प्रभु प्राप्ति का मार्ग
Updated Thu, 26 Apr 2018 10:52 PM IST
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चंबा (टिहरी)। विकास खंड चंबा के जौल गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में एक मां पुत्र प्राप्ति की अपेक्षा में सामाजिक और मानसिक शांति में पड़ कर कन्या रूपी भ्रूण की बलि देकर पुत्र प्राप्ति करती भी है, लेकिन यदि उस पुत्र को संस्कारों की डोर में न बांधा जाए, तो वहीं समाज के लिए नासूर बन जाता है। इसलिए बेटा-बेटी का भेद भुलाकर बच्चों को अच्छे संस्कार देना चाहिए।
भागवत कथा में आचार्य ने कहा कि मां के पवित्र संस्कार से ही प्रभु प्राप्ति का मार्ग बनता है। मां को बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए, तभी बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है। सुनीति के पुत्र ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि मां सुनीति के पवित्र संस्कारों से पांच वर्षीय ध्रुव ने मात्र छह माह की अवधि में नारायण प्रभु की प्राप्ति की। ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि आज के समय में भी हर मां का पुत्र ध्रुव जैसा हो सकता है। यदि उस पुत्र की माता उसे बाल्यकाल से ही पवित्र संस्कारों की डोर में बांधे रखे।
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भागवत कथा में आचार्य ने कहा कि मां के पवित्र संस्कार से ही प्रभु प्राप्ति का मार्ग बनता है। मां को बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए, तभी बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है। सुनीति के पुत्र ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि मां सुनीति के पवित्र संस्कारों से पांच वर्षीय ध्रुव ने मात्र छह माह की अवधि में नारायण प्रभु की प्राप्ति की। ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि आज के समय में भी हर मां का पुत्र ध्रुव जैसा हो सकता है। यदि उस पुत्र की माता उसे बाल्यकाल से ही पवित्र संस्कारों की डोर में बांधे रखे।
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