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सड़क न होने से बढ़ रही प्रसव पीड़ा

Thu, 29 Sep 2016 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Thu, 29 Sep 2016 09:34 PM IST
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The road is not growing pains.
pregnancy - फोटो : Demo Pic

भुनका गांव सड़क से जुड़ा होता तो, गांव की अनीता देवी को प्रसव पीड़ा से पूरे दिनभर नहीं जूझना पड़ता। गंभीर हालत में ग्रामीणों की मदद से परिजनों द्वारा उसे दंडी से आठ किमी जंगल के रास्ते पैदल चलकर रतूड़ा लाना पड़ा। यहां से निजी वाहन से उसे बेस अस्पताल श्रीनगर ले जाया गया। जहां उसकी स्थिति अब कुछ ठीक है।

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यह स्थिति गांव की अनीता की नहीं। अन्य की भी है, कारण एक दशक पूर्व मोटर मार्ग का आज तक निर्माण नहीं हो पाया है। सड़क के अभाव में बीते वर्षों में समय पर उपचार नहीं मिलने से गांव के दो लोगों की रास्ते में ही मौत हो चुकी है। बावजूद गांव के लिए सड़क निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
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हालत यह है कि ग्रामीणों को आज भी एक किलो व नमक के लिए 8 से 10 किमी पैदल दौड़ लगानी पड़ रही है। रास्ता चीड़ के जंगल से होकर गुजरता है, जो अति दुर्गम है। इस समस्या के चलते गांव तक अधिकारी भी नहीं पहुंचते हैं, जिस कारण ग्रामीणें को सरकार की योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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गांव के पवन राणा, सूरज राणा, धु्रव सिंह का कहना है कि जसोली-लाटू देवता मंदिर से गांव के लिए एक दशक पूर्व स्वीकृत सड़क का आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। शासन, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराने के बाद भी सिर्फ कोरे आश्वासन मिल रहे हैं। ग्राम प्रधान मंजू देवी व ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गांव के लिए स्वीकृत मोटर मार्ग के निर्माण के लिए उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

खाई में गिर गई थी मतपेटी
2014 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत भुनका के ग्राम प्रधान पद के मतपत्रों की पेटी खच्चर से खाई में गिर गई थी, जिस कारण सारे मत्रपत्र बिखर गए थे। ऐसे में यहां पुन: मतदान कराना पड़ा।

इंटर की पढ़ाई से वंचित बालिकाएं
राजकीय हाईस्कूल भुनका से दसवीं के बाद भुनका वल्ला, पल्ला व थपला गांव के बच्चों को इंटर पढ़ने के लिए जीआईसी रतूड़ा आना होता है। गांव से स्कूल का एक तरफा 10 किमी पैदल होने से कई बालिकाएं 10वीं के बाद शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रही हैं। पिछले चार वर्षों में गांव की 12 बालिकाएं हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।


30 परिवार कर चुके पलायन
भुनका वल्ला व पल्ला व थपला गांव से एक दशक में 30 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। इन गांवों में अब भी 90 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं, जो जरूरी विकास से वंचित हैं।

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