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घोषणाओं तक सिमटे सरकार के दावे
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 08 Dec 2015 08:09 PM IST
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जिला मुख्यालय सहित तीन सीएचसी है। इसके अलावा केदारघाटी में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी व ऊखीमठ संचालित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में जहां अल्ट्रासाउंड मशीन चार वर्ष से बंद है। वहीं केदारघाटी के दोनों अस्पतालों में एक्स-रे तक की सुविधा नहीं है।
यहीं नहीं जिले में 40 से अधिक संचालित एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकांश फार्मेसिस्ट व वार्ड ब्याय के भरोसे हैं। इन केंद्रों में 60 फीसदी पंचायत भवनों और 35 फीसदी किराए के भवनों पर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर पहुंचने वाले मरीजों को कई बार मरीजों तो प्राथमिक उपचार तक भी नसीब नहीं हो रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा बना है। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 11 पद रिक्त हैं। सीएचसी अगस्त्यमुनि व जखोली में भी यही स्थिति है।
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आधी आबादी के लिए नहीं इलाज
जिले में आधी आबादी का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। महिलाओं की आबादी कुल आबादी का 52 प्रतिशत है। बावजूद इसके जिले में एक भी महिला विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। स्थिति यह है कि प्रसव के 35 फीसदी केस रैफर किए जा रहे हैं।
फलीभूत नहीं हुई घोषणा
आपदा राहत के दौरान अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी को सीएचसी का दर्जा देने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल तैनाती सहित अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे सहित अन्य जरूरी संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बकायदा घोषणा की थी, लेकिन ढाई वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में समय-समय पर शासन और निदेशालय को अवगत कराया जा रहा है। बावजूद समस्याओं के निस्तारण के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।
-- डा. आरपी बडोनी, सीएमओ, रुद्रप्रयाग
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यहीं नहीं जिले में 40 से अधिक संचालित एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकांश फार्मेसिस्ट व वार्ड ब्याय के भरोसे हैं। इन केंद्रों में 60 फीसदी पंचायत भवनों और 35 फीसदी किराए के भवनों पर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर पहुंचने वाले मरीजों को कई बार मरीजों तो प्राथमिक उपचार तक भी नसीब नहीं हो रहा है।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा बना है। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 11 पद रिक्त हैं। सीएचसी अगस्त्यमुनि व जखोली में भी यही स्थिति है।
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आधी आबादी के लिए नहीं इलाज
जिले में आधी आबादी का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। महिलाओं की आबादी कुल आबादी का 52 प्रतिशत है। बावजूद इसके जिले में एक भी महिला विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। स्थिति यह है कि प्रसव के 35 फीसदी केस रैफर किए जा रहे हैं।
फलीभूत नहीं हुई घोषणा
आपदा राहत के दौरान अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी को सीएचसी का दर्जा देने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल तैनाती सहित अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे सहित अन्य जरूरी संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बकायदा घोषणा की थी, लेकिन ढाई वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में समय-समय पर शासन और निदेशालय को अवगत कराया जा रहा है। बावजूद समस्याओं के निस्तारण के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।
-- डा. आरपी बडोनी, सीएमओ, रुद्रप्रयाग