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जीएमवीएन ने केदारनाथ में तैयार की ब्रह्मवाटिका
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से बेस कैंप के समीप बनाई गई ब्रह्मवाटिका में ब्रह्मकमल के बीस पौधों पर कोंपले निकलने लगी हैं। जीएनवीएन के कर्मचारी ब्रह्मवाटिका की देखरेख में जुटे हुए हैं।
केदारनाथ में ब्रह्मकमल के संरक्षण को लेकर जीएमवीएन के कर्मचारियों ने वर्ष 2019 अगस्त माह में कैंप के समीप दस फीट लंबे व चौड़े स्थान पर ब्रह्मवाटिका तैयार की थी। इस वाटिका में कर्मचारियों ने वासुकीताल व आसपास के बुग्याली क्षेत्र से ब्रह्मकमल की पौध लाकर रोपी थीं। सर्दियों में बर्फबारी व पाले से वाटिका को बचाने के लिए इसके चारों तरफ लोहे के एंगिल लगाकर बरसाती से ढका गया था। इन दिनों वाटिका में ब्रह्मकमल की पौध तीन से चार इंच लंबी हो गई है और उनके कई कोंपले निकलीं हुई हैं। जीएमवीनएन के दो कर्मचारी रवींद्र सिंह रावत और सुखदेव सिंह रावत ब्रह्मवाटिका की नियमित देखरेख करते हैं। खर-पतरवार की साफ-सफाई से लेकर पौधों को पानी देना और जंगली जानवरों से वाटिका को बचा रहे हैं। जीएमवीएन के प्रबंधक अरविंद मैठाणी व वीरपाल सिंह नेगी ने बताया कि वाटिका की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य पुष्प के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। बीते वर्ष वाटिका तैयार की गई थी, जिसमें सभी पुष्प पौध स्वस्थ हैं।
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केदारनाथ में ब्रह्मकमल के संरक्षण को लेकर जीएमवीएन के कर्मचारियों ने वर्ष 2019 अगस्त माह में कैंप के समीप दस फीट लंबे व चौड़े स्थान पर ब्रह्मवाटिका तैयार की थी। इस वाटिका में कर्मचारियों ने वासुकीताल व आसपास के बुग्याली क्षेत्र से ब्रह्मकमल की पौध लाकर रोपी थीं। सर्दियों में बर्फबारी व पाले से वाटिका को बचाने के लिए इसके चारों तरफ लोहे के एंगिल लगाकर बरसाती से ढका गया था। इन दिनों वाटिका में ब्रह्मकमल की पौध तीन से चार इंच लंबी हो गई है और उनके कई कोंपले निकलीं हुई हैं। जीएमवीनएन के दो कर्मचारी रवींद्र सिंह रावत और सुखदेव सिंह रावत ब्रह्मवाटिका की नियमित देखरेख करते हैं। खर-पतरवार की साफ-सफाई से लेकर पौधों को पानी देना और जंगली जानवरों से वाटिका को बचा रहे हैं। जीएमवीएन के प्रबंधक अरविंद मैठाणी व वीरपाल सिंह नेगी ने बताया कि वाटिका की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य पुष्प के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। बीते वर्ष वाटिका तैयार की गई थी, जिसमें सभी पुष्प पौध स्वस्थ हैं।
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