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झालीमठ के प्रभावित परिवारों का विस्थापन ही विकल्प
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भूस्खलन प्रभावित झालीमठ का निरीक्षण करते हुए रुद्रप्रयाग की उप जिलाधिकारी अपर्णा ढौंड़ियाल।
- फोटो : RUDRAPRYAG
अगस्त्यमुनि विकासखंड के ग्राम पंचायत सारी के आपदा प्रभावित झालीमठ के परिवार दहशत के साये में जीवन यापन को मजबूर हैं। खून-पसीने की कमाई से बनाए घरों पर पड़ी दरारों को देखकर भावुक हो रहे ग्रामीणों के सामने अब विस्थापन ही एकमात्र विकल्प रह गया है। प्रभावितों में तीन परिवारों के पास अन्यत्र भूमि भी नहीं है।
बीते सोमवार की सुबह झालीमठ के 22 परिवारों के लिए मुसीबतों भरी रही। ग्रामीण अपनी दिनचर्या की शुरूआत ही कर रहे थे कि घरों के नीचे से भूस्खलन ने उनके जीवन को ही हाशिए पर धकेल दिया। अफरा-तफरी के बीच प्रभावित परिवारों ने सगे-संबंधियों के घरों के साथ ही स्कूल और पंचायत घरों में शरण लिया। आपदा के बाद की पहली रात प्रभावितों के लिए बेचैनी भरी रही। इस दौरान शायद ही किसी की आंख लगी होगी। प्रभावित हरेंद्र लाल, बीरेंद्र और राकेश कुमार बताते हैं कि खून-पसीने की कमाई से बनाए मकान दरारों से पटे हैं, जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। गोशाला, शौचालय पलभर में आंखों के सामने मलबे का ढेर बनकर गदेरे में समा गए। अब, सिर छुपाने के लिए कोई जगह नहीं है।
हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने गांव में ही किसी अन्यत्र घर में ढाई हजार महीने किराया पर एक कमरा ले रखा है, जहां व अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके भाई व भतीजा भी अन्यत्र शरण लिए हुए हैं। साथ ही पालतू मवेशियों के लिए छप्पर बनाया है, जबकि सुलोचना देवी अपने दो बच्चों के साथ गांव के प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए है। कहना है कि आमदनी का कोई जरिया नहीं है। स्कूल में कब तक जीवन कटेगा, पता नहीं। प्रभावित प्रेम लाल ने भी अपना सामान स्कूल में रखा हुआ है, जबकि स्वयं किसी के घर में शरण लिए हुए है। झालीमठ अनुसूचित बस्ती में 22 परिवार निवास करते हैं, जिसमें एक-दो मकान को छोड़कर अन्य सभी खतरे की जद में आ चुके हैं। इन सभी प्रभावितों ने प्रशासन से अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
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1993 में झालीमठ में बसे परिवार
प्रभावित हरेंद्र कुमार ने बताया कि झालीमठ बस्ती 1993 में अस्तित्व में आई। पहले सभी लोग गांव में ही रहते थे, लेकिन परिवारों के पृथक होने पर सबसे पहले उनके पिता ने ग्रामीणों के सहयोग से यहां अपना आवासीय मकान बनाया था। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य परिवार भी बसते रहे। वर्ष 2004-05 में भी झालीमठ में हल्का भूस्खलन हुआ था। लेकिन तब, ग्राम पंचायत द्वारा जलागम व अन्य मदों में सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया था।
झालीमठ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया है। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री के साथ तिरपाल व पॉलिथीन भी दी गई है। भूस्खलन क्षेत्र का भू-वैज्ञानिकों के साथ भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद पूरी प्रक्रिया के तहत प्राथमिकता से प्रभावित परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- अपर्णा ढौडियाल, उप जिलाधिकारी सदर रुद्रप्रयाग
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बीते सोमवार की सुबह झालीमठ के 22 परिवारों के लिए मुसीबतों भरी रही। ग्रामीण अपनी दिनचर्या की शुरूआत ही कर रहे थे कि घरों के नीचे से भूस्खलन ने उनके जीवन को ही हाशिए पर धकेल दिया। अफरा-तफरी के बीच प्रभावित परिवारों ने सगे-संबंधियों के घरों के साथ ही स्कूल और पंचायत घरों में शरण लिया। आपदा के बाद की पहली रात प्रभावितों के लिए बेचैनी भरी रही। इस दौरान शायद ही किसी की आंख लगी होगी। प्रभावित हरेंद्र लाल, बीरेंद्र और राकेश कुमार बताते हैं कि खून-पसीने की कमाई से बनाए मकान दरारों से पटे हैं, जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। गोशाला, शौचालय पलभर में आंखों के सामने मलबे का ढेर बनकर गदेरे में समा गए। अब, सिर छुपाने के लिए कोई जगह नहीं है।
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हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने गांव में ही किसी अन्यत्र घर में ढाई हजार महीने किराया पर एक कमरा ले रखा है, जहां व अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके भाई व भतीजा भी अन्यत्र शरण लिए हुए हैं। साथ ही पालतू मवेशियों के लिए छप्पर बनाया है, जबकि सुलोचना देवी अपने दो बच्चों के साथ गांव के प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए है। कहना है कि आमदनी का कोई जरिया नहीं है। स्कूल में कब तक जीवन कटेगा, पता नहीं। प्रभावित प्रेम लाल ने भी अपना सामान स्कूल में रखा हुआ है, जबकि स्वयं किसी के घर में शरण लिए हुए है। झालीमठ अनुसूचित बस्ती में 22 परिवार निवास करते हैं, जिसमें एक-दो मकान को छोड़कर अन्य सभी खतरे की जद में आ चुके हैं। इन सभी प्रभावितों ने प्रशासन से अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
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1993 में झालीमठ में बसे परिवार
प्रभावित हरेंद्र कुमार ने बताया कि झालीमठ बस्ती 1993 में अस्तित्व में आई। पहले सभी लोग गांव में ही रहते थे, लेकिन परिवारों के पृथक होने पर सबसे पहले उनके पिता ने ग्रामीणों के सहयोग से यहां अपना आवासीय मकान बनाया था। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य परिवार भी बसते रहे। वर्ष 2004-05 में भी झालीमठ में हल्का भूस्खलन हुआ था। लेकिन तब, ग्राम पंचायत द्वारा जलागम व अन्य मदों में सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया था।
झालीमठ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया है। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री के साथ तिरपाल व पॉलिथीन भी दी गई है। भूस्खलन क्षेत्र का भू-वैज्ञानिकों के साथ भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद पूरी प्रक्रिया के तहत प्राथमिकता से प्रभावित परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- अपर्णा ढौडियाल, उप जिलाधिकारी सदर रुद्रप्रयाग