{"_id":"61534fcf8ebc3e62546e5eeb","slug":"degree-college-rudraprayag-awaits-campus-rudrapryag-news-drn3918328196","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग को कैंपस का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग को कैंपस का इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में राजकीय डिग्री कॉलेज को 15 वर्ष बाद भी अपना कैंपस नहीं मिल पाया है। महाविद्यालय, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पुराने भवन में चल रहा है। यहां पर्याप्त जगह के अभाव में शिक्षण व शिक्षणेत्तर गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
वर्ष 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ रुद्रप्रयाग में डिग्री कॉलेज खोला गया। कॉलेज का संचालन 10 वर्ष तक ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर मुख्य बाजार से तीन किमी दूर रैंतोली में आईटीआई के छात्रावास में चलता रहा। इसके बाद कॉलेज को मुख्य बाजार स्थित जीजीआईसी के पुराने भवन में शिफ्ट कर दिया गया। छात्र नेता विक्रांत चौधरी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष कप्रवाण, रूपेश सेमवाल आदि का कहना है कि जगह के अभाव में कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं हो पाती हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और उच्च व पूर्व में जिला प्रभारी रहे शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत को भी स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कॉलेज का जायजा लेकर प्राथमिकता से निस्तारण का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
अभी तक बने चार कक्षा कक्ष ही
डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग के कैंपस के लिए अलकनंदा नदी के दूसरी तरफ जवाड़ी गांव के समीप वर्ष 2010 में भूमि का चयन किया गया था। करीब छह वर्ष पूर्व केंद्र सरकार के रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) से भवन निर्माण के लिए करीब 2.40 करोड़ का बजट मिला था। तीन वर्ष पूर्व भवन निर्माण शुरू हुआ लेकिन अब तक चार कक्षा कक्ष ही बन पाए हैं। वहीं राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी विज्ञान की मान्यता नहीं मिल पाई है। कॉलेज में करीब 300 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
विज्ञापन
कोट :
जवाड़ी में कैंपस के निर्माण के तहत चार कक्ष तैयार हो रहे हैं जबकि दूसरे भवन की बुनियाद पड़ चुकी है। इतनी कम जगह में महाविद्यालय का संचालन संभव नहीं है। इस संबंध में शासन व निदेशालय को भी अवगत कराया गया है। - डॉ. जगमोहन सिंह रावत, प्रभारी प्राचार्य डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग।
विज्ञापन
वर्ष 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ रुद्रप्रयाग में डिग्री कॉलेज खोला गया। कॉलेज का संचालन 10 वर्ष तक ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर मुख्य बाजार से तीन किमी दूर रैंतोली में आईटीआई के छात्रावास में चलता रहा। इसके बाद कॉलेज को मुख्य बाजार स्थित जीजीआईसी के पुराने भवन में शिफ्ट कर दिया गया। छात्र नेता विक्रांत चौधरी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष कप्रवाण, रूपेश सेमवाल आदि का कहना है कि जगह के अभाव में कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं हो पाती हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और उच्च व पूर्व में जिला प्रभारी रहे शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत को भी स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कॉलेज का जायजा लेकर प्राथमिकता से निस्तारण का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
अभी तक बने चार कक्षा कक्ष ही
डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग के कैंपस के लिए अलकनंदा नदी के दूसरी तरफ जवाड़ी गांव के समीप वर्ष 2010 में भूमि का चयन किया गया था। करीब छह वर्ष पूर्व केंद्र सरकार के रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) से भवन निर्माण के लिए करीब 2.40 करोड़ का बजट मिला था। तीन वर्ष पूर्व भवन निर्माण शुरू हुआ लेकिन अब तक चार कक्षा कक्ष ही बन पाए हैं। वहीं राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी विज्ञान की मान्यता नहीं मिल पाई है। कॉलेज में करीब 300 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
विज्ञापन
कोट :
जवाड़ी में कैंपस के निर्माण के तहत चार कक्ष तैयार हो रहे हैं जबकि दूसरे भवन की बुनियाद पड़ चुकी है। इतनी कम जगह में महाविद्यालय का संचालन संभव नहीं है। इस संबंध में शासन व निदेशालय को भी अवगत कराया गया है। - डॉ. जगमोहन सिंह रावत, प्रभारी प्राचार्य डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग।