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कमला भी हारी जिंदगी की लड़ाई
रुद्रप्रयाग
Updated Sun, 28 Feb 2016 10:17 PM IST
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वनाग्नि से झ़ुलसी धनपुर पट्टी के पाबौ गांव निवासी कमला (17) पुत्री रामेश्वर सिंह आखिर जिंदगी की लड़ाई हार गई। 22 दिनों तक जिदंगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए 26 फरवरी को देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इधर, घटना के बाद से गांव में मातम पसरा है। इससे पहले शशि (16) की भी इलाज के दौरान 9 फरवरी को देहरादून में ही मौत हो गई थी।
छह फरवरी से किशोरी देहरादून के कोरेनेशन अस्पताल में भर्ती थी। किशोरी का मुंह और हाथ-पैर झुलसे हुए थे। दर्द से तड़पती कमला ने शुक्रवार दोपहर ढाई बजे आखिरी सांस ली। पुलिस कार्रवाई के बाद शनिवार को उसकी अंत्येष्टि कर दी गई। देर रात परिजन गांव लौट आए। किशोरी के पिता का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से उनकी बेटी को उचित इलाज नहीं मिल सका। कई बार प्रबंधन को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली गई। उनका कहना है कि स्थिति यह रही कि वे स्वयं ही अपनी बेटी के घावों की सफाई कर दवा लगाते थे।
गौरतलब है कि पांच फरवरी को पाबौ गांव की 13 किशोरियां जंगल में घास लेने गई थी। इसी दौरान वनाग्नि की चपेट में आने से कमला पुत्री रामेश्वर सिंह, शशि पुत्री राम सिंह और कमला पुत्री हुकुम सिंह बुरी तरह झुलस गई थी। ग्रामीण घटना के छह घंटे बाद उन्हें जिला अस्पताल लाए थे। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया। वहां कमला और शशि की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। शशि (16) की इलाज के दौरान 9 फरवरी को देहरादून में पंडित दीन दयाल अस्पताल में मौत हो चुकी है।
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छह फरवरी से किशोरी देहरादून के कोरेनेशन अस्पताल में भर्ती थी। किशोरी का मुंह और हाथ-पैर झुलसे हुए थे। दर्द से तड़पती कमला ने शुक्रवार दोपहर ढाई बजे आखिरी सांस ली। पुलिस कार्रवाई के बाद शनिवार को उसकी अंत्येष्टि कर दी गई। देर रात परिजन गांव लौट आए। किशोरी के पिता का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से उनकी बेटी को उचित इलाज नहीं मिल सका। कई बार प्रबंधन को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली गई। उनका कहना है कि स्थिति यह रही कि वे स्वयं ही अपनी बेटी के घावों की सफाई कर दवा लगाते थे।
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गौरतलब है कि पांच फरवरी को पाबौ गांव की 13 किशोरियां जंगल में घास लेने गई थी। इसी दौरान वनाग्नि की चपेट में आने से कमला पुत्री रामेश्वर सिंह, शशि पुत्री राम सिंह और कमला पुत्री हुकुम सिंह बुरी तरह झुलस गई थी। ग्रामीण घटना के छह घंटे बाद उन्हें जिला अस्पताल लाए थे। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया। वहां कमला और शशि की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। शशि (16) की इलाज के दौरान 9 फरवरी को देहरादून में पंडित दीन दयाल अस्पताल में मौत हो चुकी है।
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