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वैकल्पिक व्यवस्था नाकाफी, सभी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 09 Jan 2016 08:35 PM IST
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रुद्रप्रयाग जिले के चंद्रनगर क्षेत्र के पंकज 23 दिसंबर से 8 जनवरी तक तक 6 बार ट्रेजरी पहुंच चुके हैं। उनकी माता के पेंशन प्रकरण का निस्तारण नहीं हो पाया है। रुद्रप्रयाग से चंद्रनगर की दूरी 50 किमी है और एक तरफा टैक्सी का किराया 70 रुपये किराया है।
10 दिनों में पेंशन सत्यापन के लिए करीब 450 से अधिक लोग ट्रेजरी पहुंचे हैं, जिन्हें बैरंग लौटना पड़ा है। बच्छणस्यूं क्षेत्र के रघुवीर सिंह व राजेंद्र सिंह का कहना है कि वे दस दिनों से लगातार ट्रेजरी आ रहे हैं, लेकिन उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
23 दिसंबर से ग्रेड पे की मांग को लेकर कोषागार कर्मी हड़ताल पर हैं। हड़ताल से पार पाने के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है। रुद्रप्रयाग ट्रेजरी में दूरस्थ गांवों से पेंशन व सत्यापन के लिए पहुंच रहे पेंशन भोगियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। विभागीय योजनाओं के निर्माण/मरम्मत का ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदार संघ के जिलाध्यक्ष सूरत सिंह राणा ने बताया कि करीब 22 करोड़ रुपया भुगतान होना है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद राम ने स्वीकार किया कि हड़ताल से कई जरूरी बिल लंबित हैं। रुटीन कामकाज वैकल्पिक व्यवस्था से निपटाया जा रहा है।
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10 दिनों में पेंशन सत्यापन के लिए करीब 450 से अधिक लोग ट्रेजरी पहुंचे हैं, जिन्हें बैरंग लौटना पड़ा है। बच्छणस्यूं क्षेत्र के रघुवीर सिंह व राजेंद्र सिंह का कहना है कि वे दस दिनों से लगातार ट्रेजरी आ रहे हैं, लेकिन उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
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23 दिसंबर से ग्रेड पे की मांग को लेकर कोषागार कर्मी हड़ताल पर हैं। हड़ताल से पार पाने के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है। रुद्रप्रयाग ट्रेजरी में दूरस्थ गांवों से पेंशन व सत्यापन के लिए पहुंच रहे पेंशन भोगियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। विभागीय योजनाओं के निर्माण/मरम्मत का ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदार संघ के जिलाध्यक्ष सूरत सिंह राणा ने बताया कि करीब 22 करोड़ रुपया भुगतान होना है। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद राम ने स्वीकार किया कि हड़ताल से कई जरूरी बिल लंबित हैं। रुटीन कामकाज वैकल्पिक व्यवस्था से निपटाया जा रहा है।
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