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एबीवीपी और एनएसयूआई ने दो साल में ही खो दिया भरोसा
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कीर्तिराज रुमाल
रुद्रपुर। क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह के नाम से वर्ष 1974 में स्थापित सरदार भगत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्र राजनीति से संगठनों की विचारधारा गायब हो रही हैं। पिछले दो वर्षों में छात्रसंघ अध्यक्ष पद का ताज अपने-अपने प्रत्याशियों के सिर पर सजाने वाले एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे संगठनों में इस बार प्रत्याशियों ने रुचि नहीं दिखाई। छात्र संगठन दो साल में ही छात्र-छात्राओं के बीच अपनी पैठ और भरोसा खो बैठे। इस बार छात्रसंघ अध्यक्ष पद के दोनों ही प्रत्याशी निर्दलीय हैं।
रुद्रपुर महाविद्यालय में वर्ष 2016 के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी नकुल कैड़ा ने जीत हासिल की थी। इससे पूर्व भी रुद्रपुर महाविद्यालय में निर्दलियों का दबदबा रहा है। लेकिन 2017 के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर एकमात्र प्रत्याशी एबीवीपी के दिलजोत बाजवा ने जीत हासिल की। इसके बाद 2018 के छात्रसंघ चुनाव में भी एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच मुकाबला रहा, जिसमें एनएसयूआई के अंग्रेज सिंह ने एबीवीपी के रचित सिंह को पराजित किया। लेकिन छात्रसंघ पदाधिकारी दो साल में छात्र-छात्राओं के बीच अपना भरोसा खो बैठे।
इस वर्ष छात्रसंघ की तिथि घोषित होने के बाद छात्र हितों की मांग को लेकर एबीवीपी और एनएसआईयू ने प्रदर्शन और धरने दिए। इसके बावजूद दोनों संगठन प्रत्याशियों को अपने पाले में लाने में नाकाम रहे। हालांकि अध्यक्ष पद के एक-एक दावेदार को पर्दे के पीछे एबीवीपी और एनएसयूआई का समर्थन बताया जा रहा है। संभावना है कि चुनाव जीतने के बाद छात्रसंघ अध्यक्ष को दोनों छात्र संगठन अपने-अपने संगठन में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं।
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रुद्रपुर। क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह के नाम से वर्ष 1974 में स्थापित सरदार भगत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्र राजनीति से संगठनों की विचारधारा गायब हो रही हैं। पिछले दो वर्षों में छात्रसंघ अध्यक्ष पद का ताज अपने-अपने प्रत्याशियों के सिर पर सजाने वाले एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे संगठनों में इस बार प्रत्याशियों ने रुचि नहीं दिखाई। छात्र संगठन दो साल में ही छात्र-छात्राओं के बीच अपनी पैठ और भरोसा खो बैठे। इस बार छात्रसंघ अध्यक्ष पद के दोनों ही प्रत्याशी निर्दलीय हैं।
रुद्रपुर महाविद्यालय में वर्ष 2016 के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी नकुल कैड़ा ने जीत हासिल की थी। इससे पूर्व भी रुद्रपुर महाविद्यालय में निर्दलियों का दबदबा रहा है। लेकिन 2017 के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर एकमात्र प्रत्याशी एबीवीपी के दिलजोत बाजवा ने जीत हासिल की। इसके बाद 2018 के छात्रसंघ चुनाव में भी एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच मुकाबला रहा, जिसमें एनएसयूआई के अंग्रेज सिंह ने एबीवीपी के रचित सिंह को पराजित किया। लेकिन छात्रसंघ पदाधिकारी दो साल में छात्र-छात्राओं के बीच अपना भरोसा खो बैठे।
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इस वर्ष छात्रसंघ की तिथि घोषित होने के बाद छात्र हितों की मांग को लेकर एबीवीपी और एनएसआईयू ने प्रदर्शन और धरने दिए। इसके बावजूद दोनों संगठन प्रत्याशियों को अपने पाले में लाने में नाकाम रहे। हालांकि अध्यक्ष पद के एक-एक दावेदार को पर्दे के पीछे एबीवीपी और एनएसयूआई का समर्थन बताया जा रहा है। संभावना है कि चुनाव जीतने के बाद छात्रसंघ अध्यक्ष को दोनों छात्र संगठन अपने-अपने संगठन में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं।
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