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आज खुलेंगे गौरी माई मंदिर गौरीकुंड के कपाट
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:08 PM IST
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गुप्तकाशी। गौरीकुंड स्थित आराध्य गौरी माई मंदिर के कपाट बैसाखी (14 अप्रैल) पर विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खुल जाएंगे। इसके बाद छह माह तक भक्तजन मां गौरी के दर्शन यहीं करेंगे।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर मंदाकिनी किनारे स्थित गौरी माई के मंदिर में कपाट खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि आराध्य मां गौरी माई की डोली की शीतकालीन गद्दी स्थल गौरी गांव में प्रात: 7 बजे से देवी की विशेष पूजा-अर्चना शुरू होगी। प्रात: 8 बजेे विधि-विधान के साथ देवी की डोली भक्तों के साथ गौरीकुंड के लिए प्रस्थान करेगी। प्रात: 8.30 बजे डोली गौरीकुंड पहुंचेगी। यहां पर सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवी की डोली को मंदिर परिसर में विराजमान किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य पुजारी लोकेश्वर प्रसाद जमलोकी द्वारा आराध्य की विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। तत्पश्चात गौरी माई की मूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा। इधर, ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी ने बताया कि आराध्य के गौरीकुंड स्थित मंदिर में छह माह के लिए विराजमान होने को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। उन्होंने यात्राकाल में यहां अधिकाधिक श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए मंदिर समिति और प्रशासन से उचित इंतजाम की मांग की है।
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रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर मंदाकिनी किनारे स्थित गौरी माई के मंदिर में कपाट खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि आराध्य मां गौरी माई की डोली की शीतकालीन गद्दी स्थल गौरी गांव में प्रात: 7 बजे से देवी की विशेष पूजा-अर्चना शुरू होगी। प्रात: 8 बजेे विधि-विधान के साथ देवी की डोली भक्तों के साथ गौरीकुंड के लिए प्रस्थान करेगी। प्रात: 8.30 बजे डोली गौरीकुंड पहुंचेगी। यहां पर सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवी की डोली को मंदिर परिसर में विराजमान किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य पुजारी लोकेश्वर प्रसाद जमलोकी द्वारा आराध्य की विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। तत्पश्चात गौरी माई की मूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा। इधर, ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी ने बताया कि आराध्य के गौरीकुंड स्थित मंदिर में छह माह के लिए विराजमान होने को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। उन्होंने यात्राकाल में यहां अधिकाधिक श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए मंदिर समिति और प्रशासन से उचित इंतजाम की मांग की है।
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