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शिलापट्ट पर राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत का नाम बना चर्चा का विषय
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:59 PM IST
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केदारनाथ। शुक्रवार को केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच पुनर्निर्माण योजनाओं का शिलान्यास किया, लेकिन शिलापट्टों पर संस्कृति और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का नाम न होना और राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत का नाम होना, चर्चा का विषय बना रहा।
शिलापट्ट पर संबंधित मंत्री और सांसद का नाम गायब होना गंभीर भूल मानी जा रही है। इसे राजनीतिक षड्यंत्र भी बताया जा रहा है। पार्टी का एक धड़ा इसे वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी मान रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का नाम किस आधार पर शिलापट्ट पर अंकित किया गया, क्योंकि वह न तो यहां के विधायक हैं और ना केदारनाथ पुनर्निर्माण से उनका कोई लेना-देना है। भाजपा के एक नेता का कहना है कि पार्टी के अंदर जो खींचतान मची है उसी का परिणाम है कि धर्मस्व मंत्री व गढ़वाल सांसद का नाम शिलापट्ट पर नहीं हैं।
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि शिलापट्ट पर जो नाम अंकित किए गए हैं, वे सभी पीएमओ कार्यालय से आए हैं।
शिलापट पर अपना नाम न होने पर केदारनाथ के विधायक मनोज रावत का कहना है कि यह भाजपा के विकास की सोच को बयां करता है। मैं नाम की राजनीति नहीं करता, लेकिन जो कुछ प्रदेश सरकार उनके साथ कर रही है, वह सही नहीं है।
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केदारनाथ में जनसभा करने वाले पहले पीएम बने मोदी
केदारनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के पहले ऐेसे प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने केदारनाथ धाम में जनता को संबोधित किया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ में जनता को 40 मिनट तक संबोधित किया। इससे पहले जो भी प्रधानमंत्री धाम पहुंचे, उन्होंने सिर्फ बाबा केदार के दर्शन कर पूजा-अर्चना की थी।
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शिलापट्ट पर संबंधित मंत्री और सांसद का नाम गायब होना गंभीर भूल मानी जा रही है। इसे राजनीतिक षड्यंत्र भी बताया जा रहा है। पार्टी का एक धड़ा इसे वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी मान रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का नाम किस आधार पर शिलापट्ट पर अंकित किया गया, क्योंकि वह न तो यहां के विधायक हैं और ना केदारनाथ पुनर्निर्माण से उनका कोई लेना-देना है। भाजपा के एक नेता का कहना है कि पार्टी के अंदर जो खींचतान मची है उसी का परिणाम है कि धर्मस्व मंत्री व गढ़वाल सांसद का नाम शिलापट्ट पर नहीं हैं।
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जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि शिलापट्ट पर जो नाम अंकित किए गए हैं, वे सभी पीएमओ कार्यालय से आए हैं।
शिलापट पर अपना नाम न होने पर केदारनाथ के विधायक मनोज रावत का कहना है कि यह भाजपा के विकास की सोच को बयां करता है। मैं नाम की राजनीति नहीं करता, लेकिन जो कुछ प्रदेश सरकार उनके साथ कर रही है, वह सही नहीं है।
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केदारनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के पहले ऐेसे प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने केदारनाथ धाम में जनता को संबोधित किया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ में जनता को 40 मिनट तक संबोधित किया। इससे पहले जो भी प्रधानमंत्री धाम पहुंचे, उन्होंने सिर्फ बाबा केदार के दर्शन कर पूजा-अर्चना की थी।