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आज, 26 वर्ष बाद ससुराल से अपने मायके दानकोट पहुंचेगी मां हरियाली

Sat, 17 Mar 2018 10:11 PM IST
Updated Sat, 17 Mar 2018 10:11 PM IST
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आज, 26 वर्ष बाद ससुराल से अपने मायके दानकोट पहुंचेगी मां हरियाली
रुद्रप्रयाग। आज, 26 वर्ष बाद मां भगवती हरियाली देवी जसोली से अपने मायके बच्छणस्यूं पट्टी के दानकोट गांव पहुंचेगी। इस मौके पर तिबरी (देवी का थान) में नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत पुराण शुरू होगा। धार्मिक अनुष्ठान की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। आयोजन को लेकर ग्रामीणों में उत्साह बना हुआ है।
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के दानकोट गांव को मां भगवती हरियाली देवी का मायका माना जाता है। रविवार को देवी भक्तों के साथ मां भगवती अपनी ससुराल जसोली (हरियाली कांठा) से प्रात: 5 बजे प्रस्थान कर कोदिमा, भैंसवाड़ा, रावतों की पठाल, हीतगज-लीरगढ़ से होते हुए संकरोड़ी, बरसूड़ी, महड़, बैरागणा से होते हुए प्रात: 11 बजे दानकोट गांव के तिबरी में पहुंचेगी। यहां पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आराध्य का भव्य स्वागत होगा। इस मौके पर मायके पक्ष द्वारा अपनी ध्याण (हरियाली देवी) को श्रृंगार सामग्री भेंट कर भोग लगाया जाएगा। आचार्यगणों द्वारा गणेश पूजन, वेदी पूजन, कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे से श्रीमद्देवी भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ शुरू होगा, जिसमें आचार्य गिरीश चंद्र शैली कथा वाचन करेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष पूरन सिंह रावत, नारायण सिंह रावत, राजेंद्र सिंह रावत, मकान सिंह रावत, पंचम सिंह रावत, अमर सिंह रावत, बुद्धि सिंह कंडारी, विनोद रावत आदि का कहना है कि यह अनुष्ठान इस वर्ष चौथी बार हो रहा है। इस वर्ष के देवी आयोजन में दानकोट और कांडाधार के ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं।
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योगमाया है मां हरियाली
हरियाली देवी का मूल मंदिर धनपुर पट्टी के जसोली क्षेत्र का हरियाली डांडा है। यहां बांज-बुरांश के घने जंगल के बीच आराध्य का मंदिर है। मान्यताओं के अनुसार मां हरियाली को भगवान श्रीकृष्ण की बहन योगमाया का रूप माना जाता है। द्वापर युग में जब मथुरा के राजा कंस द्वारा देवकी की आठवीं संतान समझकर जिस कन्या को पत्थर पर पटकने का प्रयास किया गया, तब वह उसके हाथ से छिटकर अंर्तध्यान हो गई थी। वह कन्या हरी पर्वत पर उतरती है, जिसे हरियाला डांडा कहा जाता है। यहां आराध्य को हरियाली देवी के रूप में पूजा जाता है। आराध्य का मायका बच्छणस्यूं का दानकोट है।
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