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उतराखंड के घोस्ट विलेज टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में होंगे विकसित
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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के वीरान हो चुके 1048 गांवों को मोटर मार्ग से जोड़कर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए खाका बनाना शुरू कर दिया है। प्रवासी उत्तराखंडियों से भी इस कार्य में सहयोग मांगा जाएगा।
राज्य निर्माण के 18 वर्षों में पलायन से कई गांव वीरान हो चुके हैं, जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ का दर्जा मिला है। इन गांवों के खाली होने का प्रमुख कारण यहां के ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की मूलभूत सुविधा नहीं मिलना रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना के बाद प्रदेश के करीब छह सौ गांवों में 50 फीसदी पलायन हो चुका है, जबकि 1048 गांव वीरान हो चुके हैं, जिसमें रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से लगा बर्सू गांव भी शामिल है। सबसे अधिक पलायन पौड़ी जिले में हुआ है। चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी सहित कुमाऊं मंडल के जिलों में भी यही स्थिति है, लेकिन अब ये सभी वीरान गांव जल्द मोटर मार्ग से जोड़े जाएंगे, जिससे यहां पुराने दिनों जैसी रौनक लौट आएगी। इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने खाका तैयार कर दिया है। उधर कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि घोस्ट विलेज को टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, इसके लिए इन सभी गांवों को सड़क से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। प्रवासी उत्तराखंडियों से भी इन गांवों को आबाद करने और यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। जल्द ही प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन भी होगा।
राज्य निर्माण के 18 वर्षों में पलायन से कई गांव वीरान हो चुके हैं, जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ का दर्जा मिला है। इन गांवों के खाली होने का प्रमुख कारण यहां के ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की मूलभूत सुविधा नहीं मिलना रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना के बाद प्रदेश के करीब छह सौ गांवों में 50 फीसदी पलायन हो चुका है, जबकि 1048 गांव वीरान हो चुके हैं, जिसमें रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से लगा बर्सू गांव भी शामिल है। सबसे अधिक पलायन पौड़ी जिले में हुआ है। चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी सहित कुमाऊं मंडल के जिलों में भी यही स्थिति है, लेकिन अब ये सभी वीरान गांव जल्द मोटर मार्ग से जोड़े जाएंगे, जिससे यहां पुराने दिनों जैसी रौनक लौट आएगी। इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने खाका तैयार कर दिया है। उधर कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि घोस्ट विलेज को टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, इसके लिए इन सभी गांवों को सड़क से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। प्रवासी उत्तराखंडियों से भी इन गांवों को आबाद करने और यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। जल्द ही प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन भी होगा।
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