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शीतकालीन गद्दी स्थल मार्केण्डेय मंदिर में विराजे तृतीय केदार तुंगनाथ
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:58 PM IST
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ऊखीमठ। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो गए हैं। भोग मूर्ति को विधि-विधान के साथ छह माह की पूजा-अर्चना के लिए गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। इस दौरान दर्शनों के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटी रही।
सोमवार को प्रात: 9 बजे भनकुन में पुजारी मुकेश मैठाणी, विनोद मैठाणी एवं जगदीश मैठणी ने भगवान तुंगनाथ की विशेष पूजा-अर्चना कर आरती की। आराध्य की डोली यहां से अपने शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान करते हुए पूर्वाह्न 11.30 बजे ग्वाड़ गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने भगवान तुंगनाथ का भव्य स्वागत कर अर्घ्य लगाया। यहां से राक्षसी नदी को पार करते हुए डोली दोपहर बाद मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंची। सैकड़ों भक्तों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद डोली को सभा मंडप में विराजमान किया गया। इस मौके पर आचार्य प्रकाश मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद मैठाणी एवं चंद्रबल्लभ मैठाणी ने वेद-मंत्रोच्चार के बीच मठापति रामप्रसाद मैठाणी के हाथों भगवान का दान कराया। भोग मूर्ति को पूजा-अर्चना और श्रृंगार के बाद गर्भगृह में स्थापित किया गया, जहां अब छह माह की शीतकालीन पूजा होगी। इस मौके पर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, कार्याधिकारी अनिल शर्मा, प्रचार अधिकारी नरवेदेश्वर जमलोकी, मंदिर अधिकारी भूपेंद्र मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, सतीश मैठाणी, शिव सिंह रावत, वीपी मैठाणी, नरेंद्र सिंह भंडारी, उम्मेद सिंह नेगी सहित क्षेत्र के गांवों के कई ग्रामीण मौजूद थे।
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सोमवार को प्रात: 9 बजे भनकुन में पुजारी मुकेश मैठाणी, विनोद मैठाणी एवं जगदीश मैठणी ने भगवान तुंगनाथ की विशेष पूजा-अर्चना कर आरती की। आराध्य की डोली यहां से अपने शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान करते हुए पूर्वाह्न 11.30 बजे ग्वाड़ गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने भगवान तुंगनाथ का भव्य स्वागत कर अर्घ्य लगाया। यहां से राक्षसी नदी को पार करते हुए डोली दोपहर बाद मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंची। सैकड़ों भक्तों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद डोली को सभा मंडप में विराजमान किया गया। इस मौके पर आचार्य प्रकाश मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद मैठाणी एवं चंद्रबल्लभ मैठाणी ने वेद-मंत्रोच्चार के बीच मठापति रामप्रसाद मैठाणी के हाथों भगवान का दान कराया। भोग मूर्ति को पूजा-अर्चना और श्रृंगार के बाद गर्भगृह में स्थापित किया गया, जहां अब छह माह की शीतकालीन पूजा होगी। इस मौके पर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, कार्याधिकारी अनिल शर्मा, प्रचार अधिकारी नरवेदेश्वर जमलोकी, मंदिर अधिकारी भूपेंद्र मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, सतीश मैठाणी, शिव सिंह रावत, वीपी मैठाणी, नरेंद्र सिंह भंडारी, उम्मेद सिंह नेगी सहित क्षेत्र के गांवों के कई ग्रामीण मौजूद थे।
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