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हिमाचल के राज्यपाल ने जंगली को किया सम्मानित
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:56 PM IST
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रुद्रप्रयाग। पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली को हिमाचल विश्वविद्यालय ने मिश्रित वन और हरियाली संवर्धन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया है। उन्हें यह पुरस्कार हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदान किया।
बीते 23 मार्च को हिमाचल विवि के हिमालयन अध्ययन संस्थान की ओर से आयोजित जैविक किसान मंडी कार्यक्रम में जंगली को महामहिम राज्यपाल ने पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डा. एके भट्ट ने कहा कि जंगली का मिश्रित वन मॉडल आने वाले समय में जैव विविधता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मिश्रित वन मॉडल को विकसित करने की बात भी कही। इस मौके पर जंगली ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है। मिश्रित वनों की स्थापना से जहां भू-क्षरण को कम से कम किया जा सकता है। वहीं, हरियाली, जल संरक्षण को बढ़ाने में मदद मिलेगी। कहा कि वे हिमालयन अध्ययन संस्थान के साथ विलेज टूरिज्म अभियान चलाएंगे। गांवों के साथ मिलकर काश्तकारों को जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक बागवानी की जाएगी। इस समारोह में हिमाचल, यूपी, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के पर्यावरणविद्, किसान और शोधार्थी मौजूद थे।
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बीते 23 मार्च को हिमाचल विवि के हिमालयन अध्ययन संस्थान की ओर से आयोजित जैविक किसान मंडी कार्यक्रम में जंगली को महामहिम राज्यपाल ने पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डा. एके भट्ट ने कहा कि जंगली का मिश्रित वन मॉडल आने वाले समय में जैव विविधता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मिश्रित वन मॉडल को विकसित करने की बात भी कही। इस मौके पर जंगली ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है। मिश्रित वनों की स्थापना से जहां भू-क्षरण को कम से कम किया जा सकता है। वहीं, हरियाली, जल संरक्षण को बढ़ाने में मदद मिलेगी। कहा कि वे हिमालयन अध्ययन संस्थान के साथ विलेज टूरिज्म अभियान चलाएंगे। गांवों के साथ मिलकर काश्तकारों को जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक बागवानी की जाएगी। इस समारोह में हिमाचल, यूपी, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के पर्यावरणविद्, किसान और शोधार्थी मौजूद थे।
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