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साढ़े पांच वर्ष बाद विजयनगर में झूला पुल से आवाजाही हुई शुरू
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:29 PM IST
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अगस्त्यमुनि। क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को साढ़े पांच वर्ष बाद जर्जर ट्राली से निजात मिली है। विजयनगर में मंदाकिनी नदी पर निर्मित झूला पुल से आवाजाही शुरू हो गई है। पुल की रेलिंग फिक्सिंग का कार्य चल रहा है। एप्रोच मार्ग का कार्य भी जल्द शुरू होगा। एप्रोच मार्ग बनने से पुल गौरीकुंड हाईवे और मुन्नादेवल मार्ग से लिंक हो जाएगा।
पौने आठ करोड़ की लागत से 60 मीटर स्पान का यह पुल लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड द्वारा बनाया गया है। झूला पुल निर्माण संघर्ष समिति के संरक्षक विजय मलासी, जेएस नेगी, संजय नेगी, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना देवी, शत्रुघ्न सिंह, रमेश आर्य का कहना है कि आपदा के बाद से लोग जर्जर ट्राली के सहारे आवाजाही हो रही थी। अब, पुल बनने से राहत मिली है। पुल से जखोली ब्लाक की थाती-बड़मा, सिलगढ़ और फुटगढ़ पट्टी के 40 से अलग गांवों को सीधी आवाजाही शुरू हो गई है। अब इन गांवों से हर रोज अगस्त्यमुनि, विजयनगर व सिल्ली में दूध व सब्जी की सप्लाई होने लगी है।
बता दें कि 16-17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में मंदाकिनी नदी के सैलाब में विजयनगर सहित आठ झूला पुल बह गए थे। वर्ष 2014 में पुलों के पुनर्निर्माण के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई। पुल के लिए 334 लाख रुपये जारी किए गए थे, लेकिन इस धनराशि में पुल के दोनों एबेडमेंट भी पूरे नहीं बन पाए। लोनिवि द्वारा रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे करीब डेढ़ वर्ष तक कार्य ठप रहा। वर्ष 2017 में स्थानीय लोगों के क्रमिक अनशन के बाद शासन-प्रशासन की नींद टूटी और पुल के रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृत प्रदान कर 423 लाख रुपये जारी किए गए। इस वर्ष फरवरी में धन मिलते ही लोनिवि ने तेजी से कार्य शुरू करते हुए पिछले सप्ताह पुल का झूला जोड़ने का कार्य पूरा कर दिया। इन दिनों रेलिंग फिक्सिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस ने बताया कि एप्रोच मार्ग का कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
पौने आठ करोड़ की लागत से 60 मीटर स्पान का यह पुल लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड द्वारा बनाया गया है। झूला पुल निर्माण संघर्ष समिति के संरक्षक विजय मलासी, जेएस नेगी, संजय नेगी, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना देवी, शत्रुघ्न सिंह, रमेश आर्य का कहना है कि आपदा के बाद से लोग जर्जर ट्राली के सहारे आवाजाही हो रही थी। अब, पुल बनने से राहत मिली है। पुल से जखोली ब्लाक की थाती-बड़मा, सिलगढ़ और फुटगढ़ पट्टी के 40 से अलग गांवों को सीधी आवाजाही शुरू हो गई है। अब इन गांवों से हर रोज अगस्त्यमुनि, विजयनगर व सिल्ली में दूध व सब्जी की सप्लाई होने लगी है।
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बता दें कि 16-17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में मंदाकिनी नदी के सैलाब में विजयनगर सहित आठ झूला पुल बह गए थे। वर्ष 2014 में पुलों के पुनर्निर्माण के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई। पुल के लिए 334 लाख रुपये जारी किए गए थे, लेकिन इस धनराशि में पुल के दोनों एबेडमेंट भी पूरे नहीं बन पाए। लोनिवि द्वारा रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे करीब डेढ़ वर्ष तक कार्य ठप रहा। वर्ष 2017 में स्थानीय लोगों के क्रमिक अनशन के बाद शासन-प्रशासन की नींद टूटी और पुल के रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृत प्रदान कर 423 लाख रुपये जारी किए गए। इस वर्ष फरवरी में धन मिलते ही लोनिवि ने तेजी से कार्य शुरू करते हुए पिछले सप्ताह पुल का झूला जोड़ने का कार्य पूरा कर दिया। इन दिनों रेलिंग फिक्सिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस ने बताया कि एप्रोच मार्ग का कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
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