{"_id":"5d5992ea8ebc3e89bf3dad54","slug":"working-women-will-get-roof-at-cheaper-rate-roorkee-news-drn3167356157","type":"story","status":"publish","title_hn":"कामकाजी महिलाओं को सस्ती दर पर मिलेगी छत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कामकाजी महिलाओं को सस्ती दर पर मिलेगी छत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार बाहरी जिलों व राज्यों से रुड़की में महंगी दरों पर किराये पर रहने को मजबूर महिलाओं को सस्ती दरों पर छत उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बाल विकास विभाग के उच्चाधिकारियों ने स्थानीय अधिकारियों से हॉस्टल निर्माण के लिए जमीन तलाशने को निर्देश दिए हैं। हॉस्टल निर्माण के बाद उन महिलाओं को भी लाभ होगा जो अरसे से शहर में महंगे किराये पर रहने को मजबूर हो रही हैं।
बाल विकास विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय रुड़की शहर से कामकाजी महिला छात्रावास को लेकर प्रस्ताव मांगा गया है। इसके बाद बाल विकास परियोजना अधिकारियों ने रुड़की में छात्रावास के लिए जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। रुड़की में जमीन मिल जाने के बाद हॉस्टल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। हॉस्टल में रहने के साथ-साथ खाने तक की सुविधा महिलाओं को दी जाएगी। इसके एवज में महिलाओं को कुछ शुल्क देना होगा। ऐसे में उन महिलाओं को बेहद लाभ होगा, जो दूरदराज से आकर रुड़की व आसपास के क्षेत्र में फैक्ट्री आदि में कार्य कर रही है। अभी तक इन महिलाओं को निजी भवन में महंगे किराये पर रहना पड़ रहा था। यहां महंगा किराया देने के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर बाहर से आकर काम करने वाली महिलाएं असहज महसूस करती है।
क्या है बहादराबाद की स्थिति
बताया जा रहा है कि बहादराबाद में फिलहाल कामकाजी महिला छात्रावास का संचालन हो रहा है। इसमें कुछ महिलाएं रह रही हैं। हॉस्टल में से दो-दो महिलाओं को एक-एक कमरा दिया गया है। इसके एवज में प्रत्येक महिला से 1200 रुपये प्रतिमाह लिया जा रहा है। यदि कोई महिला पूरा कमरा लेती है तो उसे 2400 रुपये प्रतिमाह देना होगा। जबकि बाहर तीन से पांच हजार तक कमरा किराये पर मिलता है। इस हॉस्टल में रसोई की भी व्यवस्था है, लेकिन इन दिनों हॉस्टल में महिलाओं की कमी के चलते रसोई का संचालन नहीं किया जा रहा है, लेकिन हॉस्टल में महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ ही रसोई का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें सस्ती दरों पर महिलाओं को भोजन मिलेगा।
विज्ञापन
विभागीय के उच्चाधिकारियों की ओर से कामकाजी महिला छात्रावास को लेकर प्रस्ताव मांगा गया है। इसके चलते जमीन को चिह्नित किया जा रहा है। जमीन मिलते ही प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
-संदीप अरोरा, बाल विकास परियोजना अधिकारी
विज्ञापन
बाल विकास विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय रुड़की शहर से कामकाजी महिला छात्रावास को लेकर प्रस्ताव मांगा गया है। इसके बाद बाल विकास परियोजना अधिकारियों ने रुड़की में छात्रावास के लिए जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। रुड़की में जमीन मिल जाने के बाद हॉस्टल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। हॉस्टल में रहने के साथ-साथ खाने तक की सुविधा महिलाओं को दी जाएगी। इसके एवज में महिलाओं को कुछ शुल्क देना होगा। ऐसे में उन महिलाओं को बेहद लाभ होगा, जो दूरदराज से आकर रुड़की व आसपास के क्षेत्र में फैक्ट्री आदि में कार्य कर रही है। अभी तक इन महिलाओं को निजी भवन में महंगे किराये पर रहना पड़ रहा था। यहां महंगा किराया देने के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर बाहर से आकर काम करने वाली महिलाएं असहज महसूस करती है।
विज्ञापन
क्या है बहादराबाद की स्थिति
बताया जा रहा है कि बहादराबाद में फिलहाल कामकाजी महिला छात्रावास का संचालन हो रहा है। इसमें कुछ महिलाएं रह रही हैं। हॉस्टल में से दो-दो महिलाओं को एक-एक कमरा दिया गया है। इसके एवज में प्रत्येक महिला से 1200 रुपये प्रतिमाह लिया जा रहा है। यदि कोई महिला पूरा कमरा लेती है तो उसे 2400 रुपये प्रतिमाह देना होगा। जबकि बाहर तीन से पांच हजार तक कमरा किराये पर मिलता है। इस हॉस्टल में रसोई की भी व्यवस्था है, लेकिन इन दिनों हॉस्टल में महिलाओं की कमी के चलते रसोई का संचालन नहीं किया जा रहा है, लेकिन हॉस्टल में महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ ही रसोई का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें सस्ती दरों पर महिलाओं को भोजन मिलेगा।
विज्ञापन
विभागीय के उच्चाधिकारियों की ओर से कामकाजी महिला छात्रावास को लेकर प्रस्ताव मांगा गया है। इसके चलते जमीन को चिह्नित किया जा रहा है। जमीन मिलते ही प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
-संदीप अरोरा, बाल विकास परियोजना अधिकारी