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Roorkee News: गन्ने पर मौसम की मार, खेतों में बिछी किसानों की उम्मीद
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तेज हवा के साथ हुई बारिश ने मंगलौर क्षेत्र के गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में लहलहाती और तैयार हो रही गन्ने की फसल देखते ही देखते जमीन पर बिछ गई। कई गांवों में बड़ी संख्या में खेतों में गन्ना गिरने से किसानों को करीब 10 से 15 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। मौसम की इस मार ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों को झटका दिया है। अब किसान गिरी हुई फसल को बचाने के लिए दिन-रात खेतों में जुटे हैं।
बारिश के बाद चली तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर उन खेतों पर पड़ा जहां गन्ने की फसल ऊंची हो चुकी थी। हवा का दबाव बढ़ते ही गन्ने के पौधे एक-दूसरे पर गिरते चले गए। कुछ खेतों में तो पूरी फसल ही एक दिशा में झुककर जमीन से जा लगी। खेतों में खड़ी फसल के बजाय अब चारों तरफ गन्ने के ढेर नजर आ रहे हैं। गन्ने के गिरने के बाद किसान अब उसे दोबारा खड़ा कर बंधाई कराने में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि समय रहते गन्ने को बांधकर सीधा नहीं किया गया तो नुकसान बढ़ सकता है। इसी वजह से किसान परिवार के सदस्यों के साथ खेतों में उतरकर फसल संभालने में लगे हैं।
मजदूरों की किल्लत से बढ़ा आर्थिक बोझ
हालांकि, एक साथ बड़ी संख्या में खेतों में गन्ना गिरने के कारण बंधाई के लिए मजदूरों की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले से मजदूरों की कमी झेल रहे किसानों के सामने अब अतिरिक्त परेशानी खड़ी हो गई है। मजदूर मिल भी रहे हैं तो कई जगह अधिक मजदूरी देनी पड़ रही है। किसानों को केवल तत्काल नुकसान की चिंता नहीं है बल्कि गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी को लेकर भी आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि गन्ने के लंबे समय तक जमीन पर पड़े रहने से उसकी बढ़वार और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसका असर आगे चलकर प्रति बीघा पैदावार के साथ चीनी मिलों में मिलने वाली रिकवरी पर भी पड़ सकता है।
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किसान बताते हैं कि गन्ने की खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौसम की मार से फसल गिरने के बाद उसे दोबारा खड़ा कराने और बंधाई कराने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। तेज हवा और बारिश के बाद किसानों की निगाहें अब मौसम के अगले रुख पर टिकी हैं। किसानों को डर है कि यदि दोबारा तेज हवाएं चलीं तो पहले से कमजोर हुई फसल को और नुकसान हो सकता है।
मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवा व बारिश से गन्ने की फसल झुकने की सूचना मिली है। विभागीय टीम को प्रभावित गांवों में भेजकर नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दे दिए गए हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे गन्ने को तीन-चार के समूहों में एकत्र कर पत्तियों से अच्छी तरह बांधें (ट्रैश ट्विस्टिंग/बंधाई) ताकि फसल को और नुकसान न पहुंचे। यदि गन्ने में पानी भरा है तो उसे तुरंत निकालने की व्यवस्था करें।
-अखिल मोहन, जिला गन्ना अधिकारी, हरिद्वार।
मौसम के अचानक बदलने से फसल गिरने की जानकारी सामने आई है। यदि गन्ना ज्यादा समय तक जमीन पर गिरा रहेगा तो धूप और नमी के कारण रस की मिठास (रिकवरी) पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, यदि किसान तुरंत बंधाई कर गन्ने को सीधा कर लेते हैं तो गुणवत्ता और पैदावार दोनों को बचाया जा सकता है। आगामी पेराई सत्र को देखते हुए मिल प्रबंधन किसानों को हर संभव तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। -पवन सिंह जेनर, महाप्रबंधक (गन्ना), उत्तम शुगर मिल, लिब्बरहेड़ी।
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बारिश के बाद चली तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर उन खेतों पर पड़ा जहां गन्ने की फसल ऊंची हो चुकी थी। हवा का दबाव बढ़ते ही गन्ने के पौधे एक-दूसरे पर गिरते चले गए। कुछ खेतों में तो पूरी फसल ही एक दिशा में झुककर जमीन से जा लगी। खेतों में खड़ी फसल के बजाय अब चारों तरफ गन्ने के ढेर नजर आ रहे हैं। गन्ने के गिरने के बाद किसान अब उसे दोबारा खड़ा कर बंधाई कराने में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि समय रहते गन्ने को बांधकर सीधा नहीं किया गया तो नुकसान बढ़ सकता है। इसी वजह से किसान परिवार के सदस्यों के साथ खेतों में उतरकर फसल संभालने में लगे हैं।
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मजदूरों की किल्लत से बढ़ा आर्थिक बोझ
हालांकि, एक साथ बड़ी संख्या में खेतों में गन्ना गिरने के कारण बंधाई के लिए मजदूरों की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले से मजदूरों की कमी झेल रहे किसानों के सामने अब अतिरिक्त परेशानी खड़ी हो गई है। मजदूर मिल भी रहे हैं तो कई जगह अधिक मजदूरी देनी पड़ रही है। किसानों को केवल तत्काल नुकसान की चिंता नहीं है बल्कि गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी को लेकर भी आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि गन्ने के लंबे समय तक जमीन पर पड़े रहने से उसकी बढ़वार और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसका असर आगे चलकर प्रति बीघा पैदावार के साथ चीनी मिलों में मिलने वाली रिकवरी पर भी पड़ सकता है।
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किसान बताते हैं कि गन्ने की खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौसम की मार से फसल गिरने के बाद उसे दोबारा खड़ा कराने और बंधाई कराने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। तेज हवा और बारिश के बाद किसानों की निगाहें अब मौसम के अगले रुख पर टिकी हैं। किसानों को डर है कि यदि दोबारा तेज हवाएं चलीं तो पहले से कमजोर हुई फसल को और नुकसान हो सकता है।
मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवा व बारिश से गन्ने की फसल झुकने की सूचना मिली है। विभागीय टीम को प्रभावित गांवों में भेजकर नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दे दिए गए हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे गन्ने को तीन-चार के समूहों में एकत्र कर पत्तियों से अच्छी तरह बांधें (ट्रैश ट्विस्टिंग/बंधाई) ताकि फसल को और नुकसान न पहुंचे। यदि गन्ने में पानी भरा है तो उसे तुरंत निकालने की व्यवस्था करें।
-अखिल मोहन, जिला गन्ना अधिकारी, हरिद्वार।
मौसम के अचानक बदलने से फसल गिरने की जानकारी सामने आई है। यदि गन्ना ज्यादा समय तक जमीन पर गिरा रहेगा तो धूप और नमी के कारण रस की मिठास (रिकवरी) पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, यदि किसान तुरंत बंधाई कर गन्ने को सीधा कर लेते हैं तो गुणवत्ता और पैदावार दोनों को बचाया जा सकता है। आगामी पेराई सत्र को देखते हुए मिल प्रबंधन किसानों को हर संभव तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। -पवन सिंह जेनर, महाप्रबंधक (गन्ना), उत्तम शुगर मिल, लिब्बरहेड़ी।