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Roorkee News: वॉटर कॉन्क्लेव में नदी बेसिन सहयोग को सुदृढ़ करने पर दिया जोर
Mon, 23 Feb 2026 08:15 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 23 Feb 2026 08:15 PM IST
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आईआईटी रुड़की में रुड़की वॉटर कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ
सीमापार नदी सहयोग, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा पर वैश्विक विशेषज्ञों का मंथन
रुड़की। आईआईटी रुड़की ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के सहयोग से चौथे तीन दिवसीय रुड़की वाॅटर कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया। कान्क्लेव में विज्ञान और नीति के माध्यम से सीमापार नदी बेसिन सहयोग को सुदृढ़ करने और सतत विकास के लिए डेटा, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा के बीच सेतु निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके अलावा उच्च-स्तरीय पैनल में सामुदायिक-केंद्रित जल सहयोग मॉडल तैयार करने पर भी मंथन हुआ।
काॅन्क्लेव में सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं सहनशीलता, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाएं, भूजल स्थिरता, जल गुणवत्ता तथा जल-ऊर्जा-खाद्य नेक्सस जैसे विषयों पर मंथन हुआ।
काॅन्क्लेव में उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की। एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. वाईआरएस राव कॉन्क्लेव के सह-अध्यक्ष जबकि संयोजक की भूमिका में प्रो. आशीष पांडे रहे। उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ, नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद के पॉल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। पद्मश्री सम्मानित समाजसेवियों के विशेष उद्बोधन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे। आईआईटी निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है, क्योंकि एआई डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग के कारण जल की मांग में वृद्धि हो रही है। ऐसे मंच साक्ष्य-आधारित संवाद को बढ़ावा देकर वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करते हैं। कॉन्क्लेव में अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित विभिन्न देशों से 42 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
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सीमापार नदी सहयोग, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा पर वैश्विक विशेषज्ञों का मंथन
रुड़की। आईआईटी रुड़की ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के सहयोग से चौथे तीन दिवसीय रुड़की वाॅटर कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया। कान्क्लेव में विज्ञान और नीति के माध्यम से सीमापार नदी बेसिन सहयोग को सुदृढ़ करने और सतत विकास के लिए डेटा, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा के बीच सेतु निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके अलावा उच्च-स्तरीय पैनल में सामुदायिक-केंद्रित जल सहयोग मॉडल तैयार करने पर भी मंथन हुआ।
काॅन्क्लेव में सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं सहनशीलता, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाएं, भूजल स्थिरता, जल गुणवत्ता तथा जल-ऊर्जा-खाद्य नेक्सस जैसे विषयों पर मंथन हुआ।
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काॅन्क्लेव में उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की। एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. वाईआरएस राव कॉन्क्लेव के सह-अध्यक्ष जबकि संयोजक की भूमिका में प्रो. आशीष पांडे रहे। उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ, नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद के पॉल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। पद्मश्री सम्मानित समाजसेवियों के विशेष उद्बोधन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे। आईआईटी निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है, क्योंकि एआई डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग के कारण जल की मांग में वृद्धि हो रही है। ऐसे मंच साक्ष्य-आधारित संवाद को बढ़ावा देकर वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करते हैं। कॉन्क्लेव में अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित विभिन्न देशों से 42 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
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