नीति आयोग नई दिल्ली ने आईआईटी रुड़की के साथ कोविड-19 के बाद की चुनौतियां और सतत जल प्रबंधन पर वेबिनार के माध्यम से जल संसाधन पर कोरोना के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। वेबिनार में 126 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
संस्थान निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने नीति आयोग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने जल क्षेत्र के सभी विशेषज्ञों से आगे आने और उन मुद्दों और चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने नई तकनीक के साथ परंपरागत पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया। इस मौके पर नीति आयोग, जल संसाधन के सलाहकार अविनाश मिश्रा ने जल आपूर्ति और अपशिष्ट जल के माध्यम से वायरस के अस्तित्व और संचरण की जानकारी दी। आयोजन के संयोजक प्रो. दीपक खरे ने वेबिनार का समग्र विवरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हमारी दिनचर्या में पानी की मांग बढ़ रही है, हमें पानी का उपयोग अधिक विवेकपूर्ण तरीके से करना होगा। वेबिनार में डॉ. शरद जैन ने पानी पर संभावित प्रभाव के बारे में चर्चा की। डॉ. एमके जैन ने आर्थिक कठिनाइयों के कारण, भविष्य की चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए पानी के लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण पर जोर दिया। एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. जेवी त्यागी ने कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन के क्षेत्र में पानी के वास्तविक उपयोग पर आधारित जल मूल्य निर्धारण, मृदा और जल संरक्षण हस्तक्षेप और सिंचाई बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान प्रो. सीएसपी ओझा, शहरी विकास मंत्रालय में सलाहकार डॉ. रमाकांत, एमएनआईटी जयपुर के प्रो. महेश जाट, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान प्रसार के डा. अरविंद रानाडे, आईआईटी इंदौर के मनीष गोयल आदि ने अपने विचार रखे। इससे पहले, विभागाध्यक्ष प्रो. एसके घोष और उप निदेशक प्रो एम परिदाने कोविड-19 में बसों और ट्रेनों को सैनिटाइज करने के लिए आवश्यक जल की खपत पर ध्यान खींचा और तकनीकी के विकास पर जोर दिया।