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मृत्यु के बाद भी दूसरों की आंखों में जिंदा रह सकता है इंसान
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रुड़की। सिविल अस्पताल में राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों ने यहां पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को नेेत्रदान करने के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर डॉक्टरों ने कहा एक व्यक्ति अपनी मौत के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में उजाला कर जिंदा रह सकता है। एक व्यक्ति की आंखों से दो व्यक्ति देख सकते हैं। उन्होंने नेत्रदान पंजीकरण के लिए लोगों को प्रेरित किया।
बृहस्पतिवार को सिविल अस्पताल में राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नेत्र सर्जन डॉ. महेश खेतान और नेत्र मितज्ञ अनीता जौहरी ने बताया कि राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अस्पताल में नेत्रदान जागरूकता को लेकर पखवाड़ा चलाया जा रहा है। यह अभियान आठ सितंबर तक चलेगा। उन्होंने अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान के बारे में बताया। कहा कि मृत्यु के छह घंटे तक आंख सुरक्षित रहती है। बताया कि एक व्यक्ति दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंखों की रोशनी दे सकता है। यदि कोई व्यक्ति नेत्रदान करता है तो उसकी मृत्यु के बाद परिजन स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे सकते हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मामूली सा ऑपरेशन कर आंख से कार्निया निकाल लेती है। बताया कि बहुत से लोगों में भ्रम रहता है कि इस ऑपरेशन में कोई चीरा या अन्य सर्जरी होती है, जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है। मृतक के चेहरे पर ऑपरेशन के कोई निशान नहीं रहते हैं। कहा कि जो लोग नेत्रदान के इच्छुक हैं, वे अस्पताल में अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
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बृहस्पतिवार को सिविल अस्पताल में राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नेत्र सर्जन डॉ. महेश खेतान और नेत्र मितज्ञ अनीता जौहरी ने बताया कि राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अस्पताल में नेत्रदान जागरूकता को लेकर पखवाड़ा चलाया जा रहा है। यह अभियान आठ सितंबर तक चलेगा। उन्होंने अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान के बारे में बताया। कहा कि मृत्यु के छह घंटे तक आंख सुरक्षित रहती है। बताया कि एक व्यक्ति दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंखों की रोशनी दे सकता है। यदि कोई व्यक्ति नेत्रदान करता है तो उसकी मृत्यु के बाद परिजन स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे सकते हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मामूली सा ऑपरेशन कर आंख से कार्निया निकाल लेती है। बताया कि बहुत से लोगों में भ्रम रहता है कि इस ऑपरेशन में कोई चीरा या अन्य सर्जरी होती है, जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है। मृतक के चेहरे पर ऑपरेशन के कोई निशान नहीं रहते हैं। कहा कि जो लोग नेत्रदान के इच्छुक हैं, वे अस्पताल में अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
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