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प्राइवेट स्कूलों पर अभी भी लगे हैं ताले
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शिक्षा सचिव के आदेश के अनुसार दो अगस्त से सरकारी और अशासकीय कक्षा नौ से 12वीं तक के लिए खोल दिए गए थे, लेकिन निजी स्कूलों पर अभी तक ताले लटके हुए हैं। स्कूल संचालक कोरोना महामारी की तीसरी लहर से घबराए हुए हैं। साथ ही नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं चलाना भी स्कूल संचालकों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके चलते स्कूल संचालक स्कूल खोलने से हिचकिचा रहे हैं।
राज्य के शिक्षा सचिव ने कुछ समय पहले दो अगस्त से कक्षा नौ से 12 तक और 16 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं खोलने के आदेश दिए थे। इसके लिए बाकायदा नई एसओपी जारी की गई थी। इस आदेश के बाद दो अगस्त से ही सरकारी और अशासकीय स्कूल खुलने शुरू हो गए थे, जबकि निजी स्कूलों पर अभी तक ताले लटके हुए हैं। बता दें कि तीन अगस्त को प्रशासन के साथ निजी स्कूल संचालकों की बैठक हुई। तब तय किया गया था कि निजी स्कूल पांच अगस्त से शुरू कर दिए जाएंगे। हालांकि इसके दो दिन बाद भी स्कूल बंद हैं। मामले में स्कूल संचालकों का कहना है कि उनके लिए सबसे पहले बच्चों की सुरक्षा है, जबकि इस समय कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी आशंका बनी हुई है।
स्कूल पहुंचने पर छोटे बच्चों को तो आसानी से शारीरिक दूरी के नियमों और अन्य गाइडलाइन के तहत कवर किया जा सकता है, जबकि कक्षा नौ से 12वीं के बच्चों से कोरोना के नियमों का पालन कराना मुश्किल होता है। ऐसे में यदि बच्चों का स्वास्थ्य खराब होता है तो दिक्कत हो सकती है, इसलिए बच्चों के अभिभावकों से सहमति पत्र लिया जा रहा है। अभी बहुत कम संख्या में अभिभावकों ने सहमति पत्र दिया है। अभिभावक स्वयं नहीं चाहते हैं कि इस हालात में स्कूल खोले जाएं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार ने जो एसओपी जारी की है, उसके अनुसार स्कूल खोलना बेहद मुश्किल है। एसओपी के तहत शिक्षकों को ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं लेनी होंगी, जो व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं है। इसलिए एसओपी में संशोधन का इंतजार भी किया जा रहा है।
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निजी स्कूल प्रबंधक बच्चों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा परेशान हैं। अभिभावकों की भी स्कूल खोलने को लेकर पूरी तरह से रजामंदी नहीं मिल पा रही है। नई एसओपी के तहत स्कूल खोलने पर बहुत व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, कुछ स्कूल संचालक सोमवार से स्कूल खोलने जा रहे हैं।
-माला चौहान, कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई, रुड़की मंडल
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राज्य के शिक्षा सचिव ने कुछ समय पहले दो अगस्त से कक्षा नौ से 12 तक और 16 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं खोलने के आदेश दिए थे। इसके लिए बाकायदा नई एसओपी जारी की गई थी। इस आदेश के बाद दो अगस्त से ही सरकारी और अशासकीय स्कूल खुलने शुरू हो गए थे, जबकि निजी स्कूलों पर अभी तक ताले लटके हुए हैं। बता दें कि तीन अगस्त को प्रशासन के साथ निजी स्कूल संचालकों की बैठक हुई। तब तय किया गया था कि निजी स्कूल पांच अगस्त से शुरू कर दिए जाएंगे। हालांकि इसके दो दिन बाद भी स्कूल बंद हैं। मामले में स्कूल संचालकों का कहना है कि उनके लिए सबसे पहले बच्चों की सुरक्षा है, जबकि इस समय कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी आशंका बनी हुई है।
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स्कूल पहुंचने पर छोटे बच्चों को तो आसानी से शारीरिक दूरी के नियमों और अन्य गाइडलाइन के तहत कवर किया जा सकता है, जबकि कक्षा नौ से 12वीं के बच्चों से कोरोना के नियमों का पालन कराना मुश्किल होता है। ऐसे में यदि बच्चों का स्वास्थ्य खराब होता है तो दिक्कत हो सकती है, इसलिए बच्चों के अभिभावकों से सहमति पत्र लिया जा रहा है। अभी बहुत कम संख्या में अभिभावकों ने सहमति पत्र दिया है। अभिभावक स्वयं नहीं चाहते हैं कि इस हालात में स्कूल खोले जाएं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार ने जो एसओपी जारी की है, उसके अनुसार स्कूल खोलना बेहद मुश्किल है। एसओपी के तहत शिक्षकों को ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन कक्षाएं लेनी होंगी, जो व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं है। इसलिए एसओपी में संशोधन का इंतजार भी किया जा रहा है।
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निजी स्कूल प्रबंधक बच्चों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा परेशान हैं। अभिभावकों की भी स्कूल खोलने को लेकर पूरी तरह से रजामंदी नहीं मिल पा रही है। नई एसओपी के तहत स्कूल खोलने पर बहुत व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, कुछ स्कूल संचालक सोमवार से स्कूल खोलने जा रहे हैं।
-माला चौहान, कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई, रुड़की मंडल