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... तब सेवाभाव के लिए पहनते थे राजनीतिक चोला

Sun, 30 Jan 2022 08:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 08:18 PM IST
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... then there was more tendency to vote
वर्तमान में लोगों की जरूरत और रूझान को देखते हुए चुनाव का माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। बैनर और जनसभाओं की जगह अब सोशल मीडिया ने ले ली है। वहीं जब बुजुर्गों से चुनाव को लेकर बात की गई तो जो तस्वीर उभरकर सामने आई वो बेहद दिलचस्प थी। बात यदि मतगणना के रुझान की करें तो उस दौरान अधिकतर को पता होता था कि जीत किसकी है। यही वजह थी कि मतगणना स्थल पर पहुंचने से ज्यादा लोगों में वोट डालने को लेकर ज्यादा उत्साह दिखाई देता था।
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बस राम राम जी करने से दे देते थे वोट
कलियर क्षेत्र के गुम्मावाला माजरी गांव निवासी 104 वर्षीय झंड़ू सिंह अपने पड़पोतों और पड़नातियों की भी शादियां देखने की तैयारी कर रहे हैं। उम्र के हिसाब से याददाश्त कमजोर हो चुकी है लेकिन कुछ बातें हैं जो उन्हें अब भी याद हैं। उन्होंने बताया कि पहले चुनाव के दौरान क्षेत्र के लोग एकमत से एक प्रत्याशी को पर्चा भरने के लिए खड़ा कर देते थे। उसके विरोध में यदि कोई दूसरा व्यक्ति खड़ा होता था तो उसे ज्यादा वोट प्राप्त नहीं होते थे। यही वजह थी कि लोगों में वोट देने की होड़ लगी रही थी, लेकिन मतगणना के दौरान रुझान जानने की उत्सुकता नहीं होती थी। जीत के बाद प्रत्याशी घर-घर जाकर लड्डूू बांटता था तो पता चलता था कि जीत इस प्रत्याशी की हुई है। उन्होंने बताया कि सालों पहले मतदान के दौरान पहली बार मारपीट देखी। इमलीखेड़ा में मतदान के दौरान कुछ विवाद हुआ तो एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के सिर पर डंडा मार दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। विकास की बात पर उन्होंने वर्तमान नेताओं के काम पर उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि अब राजनीति व्यापार हो गया है। पहले चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति सेवाभाव से राजनीतिक चोला पहनता था। चुनाव में प्रचार की जरूरत नहीं थी। राह चलते लोगों को बस राम रामजी कह भर देने से लोग वोट देने की हामी भर देते थे। जीत से पहले दावतों का दौर लोग जानते भी नहीं थे।
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रागनी कार्यक्रम की करते थे प्रत्याशी से मांग
रुहालकी दयालपुर निवासी 85 वर्षीय कृष्णपाल सिंह न बताया कि देश जब आजाद हुआ था और देश का बंटवारा हुआ, तब वे नाबालिग थे। देश की आजादी के बाद पहली बार चुनाव हुए तो उनके अंदर काफी उत्साह था। उन्हें याद है जब चुनाव की घोषणा हुई और प्रत्याशी वोट मांगने के लिए निकले थे। तब प्रचार आते-जाते हुआ करता था। खेत खलियान में जाते समय और शाम की चौपाल पर बैठक करने के साथ ही सुबह शौचालय आदि पर जाते समय भी प्रचार हुआ करता था। तब प्रत्याशी वोट मांगने के लिए गांव-गांव जाने लगे थे। उस समय खास बात ये थी कि देशभक्ति गीत जाते समय और क्षेत्र के बहरूपिये को लेकर वोट मांगे जाते थे। तब मनोरंजन के साधन कुछ नहीं थे, ऐसे में लोग अपने प्रत्याशी से जीत के बदले सांग (नाटक) लगवाने या फिर रागनी कार्यक्रम की मांग करते थे। जो प्रत्याशी सांग लगवाने का वादा करता था, उसी प्रत्याशी को वोट दिए जाते थे।
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