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साबिर पाक ने दिया नोटबंदी में लोगों को सहारा
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Tue, 27 Dec 2016 10:41 PM IST
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श्रद्धालुओं की हर मन्नतें पूरी करने वाली विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक ने नोट बंदी की मुसीबत की घड़ी में भी लोगों को सहारा देने का काम किया है क्योंकि यहां लगे दानपात्रों से निकले एक नहीं पूरे साढ़े 23 लाख रुपये बैंक में जमा कर कैश की समस्या को दूर करने में मदद दी है। इससे स्थानीय लोगों की कुछ हद तक कैश की आवश्यकता को बैंक ने भी पूरा किया है।
एक तरफ जहां पूरा देश नोटबंदी की समस्या से जूझ रहा है और इस समय जहां बैंकों एवं एटीएम में से पैसों निकालने के लिए लोगों की लंबी-लंबी लाइनें देखी जा रही हैं, नकद धनराशि जमा करने वाला तो कोई नजर ही नहीं आ रहा है, जिससे बैंकों में कैश न होने से लोग सौ-सौ रुपये को तरस रहे हैं। वहीं विश्व भर के लोगों की मनोकामनाओं को पूरी करने वाली पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक ने नो-कैश की समस्या से जूझ रहे लोगों की मुसीबतों को भी कम करने का काम किया है, दरअसल, डीएम हरबंश सिंह चुघ के आदेश पर 21 दिसंबर को साबिर पाक में लगे दानपात्रों की गिनती शुरू की गई, जो 26 दिसंबर यानि पूरे पांच दिन सोमवार तक चली।
इस दौरान गोलकों में से कुल 28 लाख 65 हजार 408 रुपये निकले, इनमें से पांच लाख 14 हजार पांच सौ रुपये पुराने एक हजार एवं पांच सौ के नोट भी थे। जिनमें एक लाख 81 हजार के एक हजार एवं तीन लाख 33 हजार पांच सौ रुपये पुराने पांच सौ के नोट मिले, लेकिन अगर इनमें से पुराने नोटों को अलग कर दिया जाए तो पूरे 23 लाख 50 हजार 908 रुपये एक, पांच, दस, 20, 50,100 एवं नए दो हजार रुपये के नोट निकले। जिन्हें हर दिन पिरान कलियर दरगाह में ही स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जमा किया गया। नकदी मिलने की सूचना पर बैंक के कर्मचारी भी रोजाना दरगाह में ही कैश लेने के लिए आ जाते थे। दरगाह से मिली धनराशि को बैंक के कर्मचारी अगले दिन ग्राहकों को बांटते थे। इससे बैंक कर्मचारियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी मदद मिली।
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ऐसे और धार्मिक स्थलों के भी खोले जाए दान पात्र
जिलेभर में अनेकों बड़े-बड़े विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। जिनमें हरिद्वार में चंडी देवी, मंशा देवी, गंगा माता मंदिर, भारत माता मंदिर एवं लक्सर में काठापीर समेत रुड़की, भगवानपुर, झबरेड़ा, चुड़ियाला, लंढौरा, सुल्तानपुर, खानपुर, नारसन, मंगलौर आदि क्षेत्रों में सैकड़ों बड़े-बड़े धार्मिक स्थल हैं, जिनमें श्रद्धालु दानपात्रों में दान की राशि डालते हैं। अगर इन सभी धार्मिक स्थलों के दानपात्रों को खोला जाए और निकली धनराशि को बैंकों में जमा किया जाए तो कैश की समस्या को बहुत हद तक दूर किया जा सकता है।
दरगाह साबिर पाक से निकली धनराशि को बैंक में जमा कर कैश की समस्या को दूर करने का काम किया गया है। ऐसे ही अन्य धार्मिक संस्थाएं भी दानपात्रों की राशि को निकालकर बैंकों में जमा करें तो कैश की समस्या को समाप्त किया जा सकता है।
पीतम सिंह, नायब तहसीलदार, रुड़की
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एक तरफ जहां पूरा देश नोटबंदी की समस्या से जूझ रहा है और इस समय जहां बैंकों एवं एटीएम में से पैसों निकालने के लिए लोगों की लंबी-लंबी लाइनें देखी जा रही हैं, नकद धनराशि जमा करने वाला तो कोई नजर ही नहीं आ रहा है, जिससे बैंकों में कैश न होने से लोग सौ-सौ रुपये को तरस रहे हैं। वहीं विश्व भर के लोगों की मनोकामनाओं को पूरी करने वाली पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक ने नो-कैश की समस्या से जूझ रहे लोगों की मुसीबतों को भी कम करने का काम किया है, दरअसल, डीएम हरबंश सिंह चुघ के आदेश पर 21 दिसंबर को साबिर पाक में लगे दानपात्रों की गिनती शुरू की गई, जो 26 दिसंबर यानि पूरे पांच दिन सोमवार तक चली।
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इस दौरान गोलकों में से कुल 28 लाख 65 हजार 408 रुपये निकले, इनमें से पांच लाख 14 हजार पांच सौ रुपये पुराने एक हजार एवं पांच सौ के नोट भी थे। जिनमें एक लाख 81 हजार के एक हजार एवं तीन लाख 33 हजार पांच सौ रुपये पुराने पांच सौ के नोट मिले, लेकिन अगर इनमें से पुराने नोटों को अलग कर दिया जाए तो पूरे 23 लाख 50 हजार 908 रुपये एक, पांच, दस, 20, 50,100 एवं नए दो हजार रुपये के नोट निकले। जिन्हें हर दिन पिरान कलियर दरगाह में ही स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जमा किया गया। नकदी मिलने की सूचना पर बैंक के कर्मचारी भी रोजाना दरगाह में ही कैश लेने के लिए आ जाते थे। दरगाह से मिली धनराशि को बैंक के कर्मचारी अगले दिन ग्राहकों को बांटते थे। इससे बैंक कर्मचारियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी मदद मिली।
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ऐसे और धार्मिक स्थलों के भी खोले जाए दान पात्र
जिलेभर में अनेकों बड़े-बड़े विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। जिनमें हरिद्वार में चंडी देवी, मंशा देवी, गंगा माता मंदिर, भारत माता मंदिर एवं लक्सर में काठापीर समेत रुड़की, भगवानपुर, झबरेड़ा, चुड़ियाला, लंढौरा, सुल्तानपुर, खानपुर, नारसन, मंगलौर आदि क्षेत्रों में सैकड़ों बड़े-बड़े धार्मिक स्थल हैं, जिनमें श्रद्धालु दानपात्रों में दान की राशि डालते हैं। अगर इन सभी धार्मिक स्थलों के दानपात्रों को खोला जाए और निकली धनराशि को बैंकों में जमा किया जाए तो कैश की समस्या को बहुत हद तक दूर किया जा सकता है।
दरगाह साबिर पाक से निकली धनराशि को बैंक में जमा कर कैश की समस्या को दूर करने का काम किया गया है। ऐसे ही अन्य धार्मिक संस्थाएं भी दानपात्रों की राशि को निकालकर बैंकों में जमा करें तो कैश की समस्या को समाप्त किया जा सकता है।
पीतम सिंह, नायब तहसीलदार, रुड़की