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कप्तान ने किए तबादले, आईजी ने रोके
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Sun, 02 Oct 2016 12:04 AM IST
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एसएसपी राजीव स्वरूप ने शनिवार सुबह जिलेभर के थाने-चौकियों में बंपर तबादले किए। चंद घंटे में तबादलों की गूंज शासन तक पहुंची तो आईजी संजय गुंज्याल ने थाना प्रभारी स्तर के तबादलों पर रोक लगा दी। साथ ही एसएसपी को लिखित आदेश जारी कर एक दिन में इतने बड़े स्तर पर तबादलों को पुलिस नियमावली का उल्लंघन बताया। लेकिन देर शाम तक एसएसपी अपने आदेश पर अडिग रहे और उच्च अधिकारियों को आपत्ति का जवाब देने की बात कही।
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी सरकारी विभागों में तबादलों की प्रक्रिया चल रही है। एसएसपी राजीव स्वरूप की ओर से शनिवार को जिले में इंस्पेक्टरों और दारोगाओं की तबादला सूची जारी की। जिसमें सिटी और देहात के तमाम थाने-चौकियों से 69 इंस्पेक्टरों व दारोगाओं को इधर से उधर किया। एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर तबादलों से जहां जिले के पुलिस महकमे में भूचाल आया हुआ है। वहीं इसकी गूंज पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर आईजी संजय गुंज्याल ने डेढ़ पेज की पत्र एसएसपी को भेजते हुए थाना प्रभारी स्तर के तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
पत्र में आईजी ने लिखा है कि जिले में एक ही दिन में 69 अधिकारियों के तबादले किसी भी दृष्टि से व्यवहारिक नहीं है। तबादलों से पहले निर्वाचन को लेकर पीएचक्यू से जारी निर्देशों का अध्ययन नहीं किया गया है। आईजी ने इसे पुलिस अधिनियम-2007 की धारा-28 का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए हिदायत दी कि थाना प्रभारियों को बिना किसी ठोस कारण के साल भर से पहले स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसके लिए कारण बताते हुए उच्च अधिकारियों से भी सहमति व विचार विमर्श जरूरी होता है। लेकिन एसएसपी ने आला अधिकारियों से भी विचार विमर्श नहीं किया है।
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ऐसे में तत्काल प्रभारी से थाना प्रभारी स्तर के तबादले स्थगित करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं देर शाम पुलिस कप्तान राजीव स्वरूप ने पहले तो आईजी की ओर से रोक संबंधी आदेश न मिलने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि तबादले पूरी तरह नियमावली के अनुरूप और चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार किए गए हैं। तबादले के आदेशों के अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं यदि कोई आपत्ति लगाई गई है तो उसका उच्च अधिकारियों को जवाब देंगे।
-एसएसपी द्वारा किए गए तबादलों में कई खामियां हैं। इसके बारे में पत्र लिखकर उन्हें जानकारी दे दी गई है। फिलहाल तबादलों को स्थगित कर दिया गया है।
संजय गुंज्याल, आईजी गढ़वाल रेंज
तबादले पूरी तरह नियमावली और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुपालन में किए गए हैं। यदि कोई आपत्ति आएगी तो उसका विधिवत जवाब दिया जाएगा।
- राजीव स्वरूप, एसएसपी
इंस्पेक्टर भेजे दफ्तर, कोतवालियां दारोगाओं के जिम्मे
हरिद्वार। तबादला सूची सिर्फ संख्या बल के कारण ही सवालों में नहीं घिरी, बल्कि कोतवालियों के चार्ज को लेेकर भी चर्चाओं में है। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी डीएस रावत को पुलिस लाइन भेजकर प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। वहीं जयदेव आर्य को भी एसपी देहात कार्यालय से पुलिस लाइन बुलाते हुए वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। दूसरी तरफ सिविल लाइंस कोतवाली का जिम्मा दारोगा मोहन सिंह, रानीपुर कोतवाली में हरपाल सिंह को प्रभारी और लक्सर में जहांगीर अली को कोतवाली प्रभारी बना दिया गया। इंस्पेक्टर मौजूद होने के बावजूद दारोगाओं को कोतवालियों का प्रभार देने से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
फिर खुले कई के भाग्य
तबादला सूची पर गौर करें तो कई ऐसे दारोगाओं की फिर किस्मत खुली जिन्हें एसएसपी राजीव स्वरूप के पिछले कार्यकाल में प्रभारी बनने का मौका मिला था। इतना ही नहीं उन्हें महत्वपूर्ण और संवेदनशील थाने-चौकियों को जिम्मा भी सौंपा गया। एसएसपी राजीव स्वरूप के पहले कार्यकाल के बाद जिले में रहे तीनों पुलिस कप्तान को ऐसे कई दारोगा फूटी आंख नहीं सुहाए। अब दोबारा राजीव स्वरूप बतौर एसएसपी हरिद्वार आने पर उनके फिर से अच्छे दिन आ गए।
खनन से जुड़ी चौकी प्रोन्नत दारोगा को
खनन प्रभावित क्षेत्रों की थाने-चौकियों में प्रभारियों की तैनाती पर भी सवाल उठे। अवैध खनन के लिहाज से संवेदनशील मानी जानी वाली भिक्कमपुर चौकी का जिम्मा प्रोन्नत दारोगा गजेंद्र यादव को दिया गया। जबकि पिछले दिनों भी गजेंद्र यादव को भिक्कमपुर चौकी का प्रभारी बनाने के कुछ दिन बाद हटाना पड़ा था।
कई के वर्चस्व को मिली चुनौती
बंपर तबादलों को लेकर चाहे जो भी सवाल उठे, लेकिन इस बार तबादलों की जद में कुछ ऐसे अधिकारी भी आ गए हैं जो लंबे समय से थाने-कोतवालियों में जमे थे। एसएसपी ने उनकी कुर्सी हिलाकर एक बड़े अधिकारी के वर्चस्व को भी चुनौती दे डाली। हालांकि इसी के साथ ही महकमे में राजनीति की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी। लगातार चार्ज संभालने वाले कई अधिकारियों को दफ्तरों की तरफ रवाना कर दिया गया।
‘मास्टर स्ट्रोक‘ लगाकर ‘बोल्ड‘ हो गए पुलिस कप्तान
एसएसपी राजीव स्वरूप थाने-चौकियों में तबादलों को लेकर हरिद्वार में पहले के कार्यकाल में भी सुर्खियों में रहे हैं। दूसरी मर्तबा जिले में चार्ज संभालने के बाद उन्होंने कार्यकाल की शुरूआत में तबादलों से पूरी तरह हाथ पीछे खींचे थे। लेकिन अब एक ही दिन में 69 इंस्पेक्टर व दारोगाओं के तबादले कर ‘मास्टर स्ट्रोक‘ लगाया तो आईजी के हाथों ‘बोल्ड‘ हो गए। दूसरे कार्यकाल में तबादलों को लेकर आईजी की ओर से दूसरी बार रोक लगाने से भी महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं जोर पकड़ने लग गई हैं।
एसएसपी राजीव स्वरूप वर्ष 2013 में भी हरिद्वार के एसएसपी रहे। उस दौरान थाने-चौकियों में अचानक होने वाले तबादलों से अधीनस्थों में उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चाएं होती रही। लेकिन इस बार यह दूसरा मौका है कि जब आला अधिकारी ने तबादलों को लेकर कप्तान के फैसले पर सवाल उठाए। आईजी ने थाना प्रभारी स्तर के तबादलों पर न सिर्फ रोक लगाई बल्कि नियम कानूनों का पाठ भी पढ़ाया। इस बार दूसरे कार्यकाल के तौर पर एसएसपी राजीव स्वरूप के चार्ज संभालते ही लंढौरा बवाल और फिर कांवड़ मेले में कई माह का समय गुजरा। अब पिछले दिनों निर्वाचन आयोग ने तबादलों के निर्देश दिए तो राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर अदला-बदली नहीं हो सकी। बहरहाल शनिवार को एसएसपी ने बंपर तबादलों की सूची तो जारी कर दी, लेनिक आईजी के रोक लगाने से एक बात साफ हो गई कि महकमे में सबकुछ ठीक नहीं है। सवाल यह भी है कि आखिर आईजी को बार बार कप्तान के फैसले पर दखल क्यों देना पड़ रहा है।
वहीं तबादलों और रोक को पुलिसकर्मियों में तरह-तरह की कानाफूसी हो रही है। कुछ पुलिसकर्मियों ने इसे पुलिस कप्तान के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया तो किसी ने अनावश्यक हस्तक्षेप कहकर सवाल खड़े किए हैं। जबकि कुछ पुलिसकर्मियों ने आईजी की रोक को सही ठहराया।
ज्वाइनिंग में नहीं लगाई देरी
सुबह जारी हुई तबादला सूची के बाद उस पर रोक लगाने की चर्चाएं देर शाम तक सभी थाने-चौकियों में फैल गई। इस बीच अधिकतर पुलिस अधिकारियों ने चार्ज संभाल लिया। खासकर ऐसे अधिकारियों ने ज्वाइनिंग में देर नहीं की जिन्हें बमुश्किल कुर्सी संभालने का मौका मिला है। उन्हें डर रहा कि आईजी की रोक के बाद कहीं संभालने से पहले ही कुर्सी न सरक जाए, इसलिए चंद घंटों के भीतर चार्ज संभाल लिया गया।
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राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी सरकारी विभागों में तबादलों की प्रक्रिया चल रही है। एसएसपी राजीव स्वरूप की ओर से शनिवार को जिले में इंस्पेक्टरों और दारोगाओं की तबादला सूची जारी की। जिसमें सिटी और देहात के तमाम थाने-चौकियों से 69 इंस्पेक्टरों व दारोगाओं को इधर से उधर किया। एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर तबादलों से जहां जिले के पुलिस महकमे में भूचाल आया हुआ है। वहीं इसकी गूंज पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर आईजी संजय गुंज्याल ने डेढ़ पेज की पत्र एसएसपी को भेजते हुए थाना प्रभारी स्तर के तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
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पत्र में आईजी ने लिखा है कि जिले में एक ही दिन में 69 अधिकारियों के तबादले किसी भी दृष्टि से व्यवहारिक नहीं है। तबादलों से पहले निर्वाचन को लेकर पीएचक्यू से जारी निर्देशों का अध्ययन नहीं किया गया है। आईजी ने इसे पुलिस अधिनियम-2007 की धारा-28 का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए हिदायत दी कि थाना प्रभारियों को बिना किसी ठोस कारण के साल भर से पहले स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसके लिए कारण बताते हुए उच्च अधिकारियों से भी सहमति व विचार विमर्श जरूरी होता है। लेकिन एसएसपी ने आला अधिकारियों से भी विचार विमर्श नहीं किया है।
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ऐसे में तत्काल प्रभारी से थाना प्रभारी स्तर के तबादले स्थगित करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं देर शाम पुलिस कप्तान राजीव स्वरूप ने पहले तो आईजी की ओर से रोक संबंधी आदेश न मिलने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि तबादले पूरी तरह नियमावली के अनुरूप और चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार किए गए हैं। तबादले के आदेशों के अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं यदि कोई आपत्ति लगाई गई है तो उसका उच्च अधिकारियों को जवाब देंगे।
-एसएसपी द्वारा किए गए तबादलों में कई खामियां हैं। इसके बारे में पत्र लिखकर उन्हें जानकारी दे दी गई है। फिलहाल तबादलों को स्थगित कर दिया गया है।
संजय गुंज्याल, आईजी गढ़वाल रेंज
तबादले पूरी तरह नियमावली और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुपालन में किए गए हैं। यदि कोई आपत्ति आएगी तो उसका विधिवत जवाब दिया जाएगा।
- राजीव स्वरूप, एसएसपी
इंस्पेक्टर भेजे दफ्तर, कोतवालियां दारोगाओं के जिम्मे
हरिद्वार। तबादला सूची सिर्फ संख्या बल के कारण ही सवालों में नहीं घिरी, बल्कि कोतवालियों के चार्ज को लेेकर भी चर्चाओं में है। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी डीएस रावत को पुलिस लाइन भेजकर प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। वहीं जयदेव आर्य को भी एसपी देहात कार्यालय से पुलिस लाइन बुलाते हुए वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। दूसरी तरफ सिविल लाइंस कोतवाली का जिम्मा दारोगा मोहन सिंह, रानीपुर कोतवाली में हरपाल सिंह को प्रभारी और लक्सर में जहांगीर अली को कोतवाली प्रभारी बना दिया गया। इंस्पेक्टर मौजूद होने के बावजूद दारोगाओं को कोतवालियों का प्रभार देने से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
फिर खुले कई के भाग्य
तबादला सूची पर गौर करें तो कई ऐसे दारोगाओं की फिर किस्मत खुली जिन्हें एसएसपी राजीव स्वरूप के पिछले कार्यकाल में प्रभारी बनने का मौका मिला था। इतना ही नहीं उन्हें महत्वपूर्ण और संवेदनशील थाने-चौकियों को जिम्मा भी सौंपा गया। एसएसपी राजीव स्वरूप के पहले कार्यकाल के बाद जिले में रहे तीनों पुलिस कप्तान को ऐसे कई दारोगा फूटी आंख नहीं सुहाए। अब दोबारा राजीव स्वरूप बतौर एसएसपी हरिद्वार आने पर उनके फिर से अच्छे दिन आ गए।
खनन से जुड़ी चौकी प्रोन्नत दारोगा को
खनन प्रभावित क्षेत्रों की थाने-चौकियों में प्रभारियों की तैनाती पर भी सवाल उठे। अवैध खनन के लिहाज से संवेदनशील मानी जानी वाली भिक्कमपुर चौकी का जिम्मा प्रोन्नत दारोगा गजेंद्र यादव को दिया गया। जबकि पिछले दिनों भी गजेंद्र यादव को भिक्कमपुर चौकी का प्रभारी बनाने के कुछ दिन बाद हटाना पड़ा था।
कई के वर्चस्व को मिली चुनौती
बंपर तबादलों को लेकर चाहे जो भी सवाल उठे, लेकिन इस बार तबादलों की जद में कुछ ऐसे अधिकारी भी आ गए हैं जो लंबे समय से थाने-कोतवालियों में जमे थे। एसएसपी ने उनकी कुर्सी हिलाकर एक बड़े अधिकारी के वर्चस्व को भी चुनौती दे डाली। हालांकि इसी के साथ ही महकमे में राजनीति की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी। लगातार चार्ज संभालने वाले कई अधिकारियों को दफ्तरों की तरफ रवाना कर दिया गया।
पहले भी खारिज हो चुकी सूची
यह पहला मौका नहीं है जब आईजी ने एसएसपी की तबादला सूची पर रोक लगाई है। कांवड़ मेले के दौरान भी एसएसपी ने सिडकुल एसओ ऋतुराज रावत, कोर्ट चौकी प्रभारी दीपक कठैत सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर किए थे। इस पर आईजी ने कांवड़ मेले की व्यवस्थाएं प्रभावित होने का हवाला देते हुए रोक लगा दी थी। नई सूची में ऋतुराज रावत को एसओ कलियर बनाया गया है तो दीपक कठैत को फिर से गंगनहर कोतवाली भेजा गया है।‘मास्टर स्ट्रोक‘ लगाकर ‘बोल्ड‘ हो गए पुलिस कप्तान
एसएसपी राजीव स्वरूप थाने-चौकियों में तबादलों को लेकर हरिद्वार में पहले के कार्यकाल में भी सुर्खियों में रहे हैं। दूसरी मर्तबा जिले में चार्ज संभालने के बाद उन्होंने कार्यकाल की शुरूआत में तबादलों से पूरी तरह हाथ पीछे खींचे थे। लेकिन अब एक ही दिन में 69 इंस्पेक्टर व दारोगाओं के तबादले कर ‘मास्टर स्ट्रोक‘ लगाया तो आईजी के हाथों ‘बोल्ड‘ हो गए। दूसरे कार्यकाल में तबादलों को लेकर आईजी की ओर से दूसरी बार रोक लगाने से भी महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं जोर पकड़ने लग गई हैं।
एसएसपी राजीव स्वरूप वर्ष 2013 में भी हरिद्वार के एसएसपी रहे। उस दौरान थाने-चौकियों में अचानक होने वाले तबादलों से अधीनस्थों में उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चाएं होती रही। लेकिन इस बार यह दूसरा मौका है कि जब आला अधिकारी ने तबादलों को लेकर कप्तान के फैसले पर सवाल उठाए। आईजी ने थाना प्रभारी स्तर के तबादलों पर न सिर्फ रोक लगाई बल्कि नियम कानूनों का पाठ भी पढ़ाया। इस बार दूसरे कार्यकाल के तौर पर एसएसपी राजीव स्वरूप के चार्ज संभालते ही लंढौरा बवाल और फिर कांवड़ मेले में कई माह का समय गुजरा। अब पिछले दिनों निर्वाचन आयोग ने तबादलों के निर्देश दिए तो राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर अदला-बदली नहीं हो सकी। बहरहाल शनिवार को एसएसपी ने बंपर तबादलों की सूची तो जारी कर दी, लेनिक आईजी के रोक लगाने से एक बात साफ हो गई कि महकमे में सबकुछ ठीक नहीं है। सवाल यह भी है कि आखिर आईजी को बार बार कप्तान के फैसले पर दखल क्यों देना पड़ रहा है।
वहीं तबादलों और रोक को पुलिसकर्मियों में तरह-तरह की कानाफूसी हो रही है। कुछ पुलिसकर्मियों ने इसे पुलिस कप्तान के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया तो किसी ने अनावश्यक हस्तक्षेप कहकर सवाल खड़े किए हैं। जबकि कुछ पुलिसकर्मियों ने आईजी की रोक को सही ठहराया।
ज्वाइनिंग में नहीं लगाई देरी
सुबह जारी हुई तबादला सूची के बाद उस पर रोक लगाने की चर्चाएं देर शाम तक सभी थाने-चौकियों में फैल गई। इस बीच अधिकतर पुलिस अधिकारियों ने चार्ज संभाल लिया। खासकर ऐसे अधिकारियों ने ज्वाइनिंग में देर नहीं की जिन्हें बमुश्किल कुर्सी संभालने का मौका मिला है। उन्हें डर रहा कि आईजी की रोक के बाद कहीं संभालने से पहले ही कुर्सी न सरक जाए, इसलिए चंद घंटों के भीतर चार्ज संभाल लिया गया।