स्कूलों में खिलाई जाएगी एलबेंडा जोल की गोली
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रुड़की। सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जिसके चलते सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को एलबेंडा जोल की गोलियां खिलाई जाएगी। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को लेकर विद्यालयों में तैयारी की जा रही है। स्कूल स्टाफ के साथ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां भी साथ रहेंगी। एलबेंडा जोल की गोलियां पांच वर्ष से 19 वर्ष के साथ सभी छात्र-छात्राओं को खिलाई जाएगी। ताकि सभी छात्र-छात्राओं को कृमि से मुक्त कराया जा सके। मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय नौडियाल ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के लिए सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और स्कूल स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया गया है।
इसलिए जरूरी है कृमि मुक्ति
रुड़की। कृमि यानी पेट के कीड़े। बच्चों के साथ-साथ युवाओं में भी पेट के कीड़े हो सकते हैं। इनके होने से शारीरिक विकास रुक जाता है। खून की कमी आ जाती है। कई बार यह कीड़ा दिमाग मेें चला जाता है। जिससे दौरे आदि भी आने शुरू हो जाते हैं। इसके लिए हर तीन से छह माह के बीच बच्चों को एलबेंडा जोल की खुराक देनी चाहिए।
क्या है पहचान
बच्चे का कमजोर होना
खून की कमी होना
भूख कम लगना
भूख सामान्य से अधिक लगना
हाइट और वेट न बढ़ना
चेहरे पर खुश्की जैसे हल्के सफेद दाग दिखाई देना
इनका कहना है
जिस बच्चे के पेट में कीड़े होते हैं उस बच्चे का शारीरिक विकास बेहद कम होता है। उसकी लंबाई और वजन उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ता है। उसे भूख कम लगती है या फिर सामान्य से ज्यादा खाता है। खून की कमी हो जाती है। तीन से छह माह के अंतराल पर बच्चों को एलबेंडा जोल की दवा दी जानी चाहिए। इस दवाई का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। बल्कि लाभ यह है कि यदि पेट में कीड़े हैं तो वह निकल जाते हैं। पेट के कीड़े कई बार दिमाग में भी पहुंच जाते हैं। यह सबसे भयावह स्थिति होती है। इसमें बच्चे को दौरे पड़ते हैं।
डा. अरविंद कुमार मिश्रा, बालरोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल रुड़की।