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एसबीआई से 350 करोड़ से अधिक की निकासी
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 23 Nov 2016 10:55 PM IST
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नोटों की किल्लत के बाद अब रुपयों की जमाखोरी से परेशानी बढ़ रही है। आमजन के साथ ही बैंक कर्मचारियों के लिए भी यह परेशानी का सबब बन गयी है। स्थिति यह है कि लोग बैंकों से अधिक से अधिक निकासी के प्रयास में हैं, लेकिन नए नोट जमा नहीं किए जा रहे हैं। जमा तो हजार और पांच सौ के पुराने नोट ही हो रहे हैं। सिर्फ एसबीआई में ही लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक जमा हो चुके हैं, लेकिन इसमें सभी हजार और पांच सौ के नोट हैं, जबकि 350 करोड़ से अधिक के नए नोटों की बदली और निकासी हो चुकी है। एसबीआई के अलावा पीएनबी सहित अन्य बैंकों की भी यही स्थिति है।
एसबीआई सहित सभी बैको से केवल रुपयों की निकासी हो रही है, जमा करने से तो लोगों ने तौबा ही कर लिया है, जो जमा कर भी रहे हैं वो सिर्फ पांच सौ और हजार के पुराने नोट। यही नहीं निकासी के बाद भी लोग खर्च से परहेज कर रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि लंबी लाइन में लगकर पैसा निकालने के बाद पता नहीं दुबारा उन्हें कब तक पैसे मिलेंगे। वहीं कुछ लोग नई करेंसी को एकत्रित कर पुरानी करेंसी को खपाने में लगे हैं, जिस कारण न सिर्फ आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि यह बैंक के लिए भी मुसीबत का सबब बन रहा है।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सामने सौ रुपये के नोट का भी संकट होता जा रहा है, जबकि दो हजार के नोट लोग लेने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में बैंकों का अधिकांश काम दस और बीस के नोटों से ही चल रहा है। यही कारण है कि तमाम बैंकों ने दस-दस रुपये के सिक्के भी उपभोक्ताओं को दे दिए। रिजर्व बैंक से जितनी भी रकम आ रही है वह शहर में कुछ लोगों के पास एकत्रित होती जा रही है, बदले में वो हजार और पांच सौ के नोट दे रहे हैं। सरकारी विभागों और पेट्रोल पंपों पर भी कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। यहां भी सिर्फ हजार और पांच सौ के नोट ही जमा हो रहे हैं, जबकि सौ रुपये के नोट एकत्रित किए जा रहे हैं।
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क्या कहते हैं बैंक अधिकारी
शहर में रुपयों की जमाखोरी से परेशानी हो रही है। इस समय चलन वाली नकदी कोई जमा करने को तैयार नहीं है। एसबीआई में पिछले 12 दिनों में 300 करोड़ से अधिक की नगदी जमा हुई, लेकिन सिर्फ हजार और पांच सौ के नोट, जबकि इससे अधिक की रकम निकासी और बदली गई है। लोगों से अपील है कि वो जमाखोरी नहीं करें, बल्कि जरूरत के अनुसार पैसों का उपयोग करें। इससे अन्य लोगों को राहत मिलेगी। एक सप्ताह के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी।
...............जयशंकर, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई मेन ब्रांच
नई करेंसी जमा नहीं हो रही है, सिर्फ निकासी और बदली जा रही है। इस वजह से आमजन के साथ ही बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है। पांच सौ के नए नोट शहर में आने के बाद उपभोक्ताओं को काफी हद तक राहत मिल जाएगी। लोगों को चाहिए कि रुपयों की जमाखोरी न करें।
खुर्शीद आलम, मुख्य प्रबंधक, पीएनबी मेन ब्रांच
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एसबीआई सहित सभी बैको से केवल रुपयों की निकासी हो रही है, जमा करने से तो लोगों ने तौबा ही कर लिया है, जो जमा कर भी रहे हैं वो सिर्फ पांच सौ और हजार के पुराने नोट। यही नहीं निकासी के बाद भी लोग खर्च से परहेज कर रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि लंबी लाइन में लगकर पैसा निकालने के बाद पता नहीं दुबारा उन्हें कब तक पैसे मिलेंगे। वहीं कुछ लोग नई करेंसी को एकत्रित कर पुरानी करेंसी को खपाने में लगे हैं, जिस कारण न सिर्फ आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि यह बैंक के लिए भी मुसीबत का सबब बन रहा है।
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बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सामने सौ रुपये के नोट का भी संकट होता जा रहा है, जबकि दो हजार के नोट लोग लेने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में बैंकों का अधिकांश काम दस और बीस के नोटों से ही चल रहा है। यही कारण है कि तमाम बैंकों ने दस-दस रुपये के सिक्के भी उपभोक्ताओं को दे दिए। रिजर्व बैंक से जितनी भी रकम आ रही है वह शहर में कुछ लोगों के पास एकत्रित होती जा रही है, बदले में वो हजार और पांच सौ के नोट दे रहे हैं। सरकारी विभागों और पेट्रोल पंपों पर भी कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। यहां भी सिर्फ हजार और पांच सौ के नोट ही जमा हो रहे हैं, जबकि सौ रुपये के नोट एकत्रित किए जा रहे हैं।
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क्या कहते हैं बैंक अधिकारी
शहर में रुपयों की जमाखोरी से परेशानी हो रही है। इस समय चलन वाली नकदी कोई जमा करने को तैयार नहीं है। एसबीआई में पिछले 12 दिनों में 300 करोड़ से अधिक की नगदी जमा हुई, लेकिन सिर्फ हजार और पांच सौ के नोट, जबकि इससे अधिक की रकम निकासी और बदली गई है। लोगों से अपील है कि वो जमाखोरी नहीं करें, बल्कि जरूरत के अनुसार पैसों का उपयोग करें। इससे अन्य लोगों को राहत मिलेगी। एक सप्ताह के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी।
...............जयशंकर, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई मेन ब्रांच
नई करेंसी जमा नहीं हो रही है, सिर्फ निकासी और बदली जा रही है। इस वजह से आमजन के साथ ही बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है। पांच सौ के नए नोट शहर में आने के बाद उपभोक्ताओं को काफी हद तक राहत मिल जाएगी। लोगों को चाहिए कि रुपयों की जमाखोरी न करें।
खुर्शीद आलम, मुख्य प्रबंधक, पीएनबी मेन ब्रांच