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आंदोलन के बाद भी चुप्पी

Wed, 19 Oct 2016 09:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की Updated Wed, 19 Oct 2016 09:53 PM IST
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किसानों संगठनों के आंदोलन और राजधानी तक दौड़ का असर मिलों और सरकार पर पड़ता नहीं दिख रहा है। आलम यह कि किसानों की मांग तो दूर उन्हें सरकार आश्वस्त भी नहीं कर पा रही है। इससे किसान संगठनों में सरकार एवं मिलों के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जबकि आंदोलन के बाद भी सरकार और मिलें किसानों की मांगों को हल करने के मामले में चुप्पी साधे है।

बकाया गन्ना भुगतान समेत कई मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन की ओर से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पर धरना दिया जा रहा है। मांगों के लिए भाकियू की 17 अक्तूबर को सैकड़ों किसानों के साथ देहरादून पहुंचकर सचिवालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन भी किया गया। इससे पहले उत्तराखंड किसान मोर्चा ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर 14 अक्तूबर को देहरादून में सचिवालय का घेराव किया था। बावजूद इसके अब तक  लिब्बरहेड़ी एवं इकबालपुर मिल ने बकाया गन्ने का भुगतान नहीं किया है। सरकार की ओर से भी अन्य मांगों को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। दोनों शुगर मिलों पर करीब 30 करोड़ का बकाया चल रहा है। भुगतान नहीं मिलने से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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करेंगे बड़ा आंदोलन
उत्तराखंड किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष महकार सिंह का कहना है कि मिलें किसानों का शोषण करने पर लगी हैं। सरकार को काश्तकारों की कोई चिंता नहीं है। अब दोनों के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता विजय शास्त्री का कहना है कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पर किसानों की समस्याओं के हल के लिए धरना चलाया जा रहा है, लेकिन अब मांगों के लिए आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
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