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Roorkee News: नातिया कलाम से गूंजा खानकाहे कुद्दुसिया, रूहानी हुआ माहौल
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साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स के मौके पर उर्स आयोजन कमेटी की ओर से खानकाहे कुद्दुसिया में नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में देशभर से पहुंचे शायरों ने नातिया और सूफियाना कलाम पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। कार्यक्रम में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनीस गौड़ मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता गंगोह दरगाह कुतुबे आलम के सज्जादानशीन शाह मेहताब आलम कुद्दुसी गुड्डू मियां ने की।
दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी ने अतिथियों और देशभर से पहुंचे शायरों की दस्तारबंदी कर स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन सैयद नजर हुसैन चिश्ती, पूर्व राज्यमंत्री मुफ्ती शमून कासमी, शाह मखदूम कुद्दुसी और वक्फ बोर्ड की पूर्व सदस्य नाजिमा शेख ने देश और प्रदेश में अमन, सलामती व भाईचारे की दुआ की।
उन्होंने कहा कि सूफी संतों व शायरों ने हमेशा समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश देने का काम किया है। उर्स कमेटी के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलौरी ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने कहा कि देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को सूफी संतों ने सदियों से जीवित रखा है। यही वजह है कि पिरान कलियर की सरजमीं पर सभी धर्मों के लोग पहुंचकर एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।
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मुशायरे का आगाज शाह यावर साबरी ने नातिया कलाम से किया। उन्होंने पढ़ा, “इसी बाइस तो हम कुद्दुसियों पर नाज करते हैं, मिले हैं हमको साबिर, कुतुबे आलम के वसीले से।” मुरादाबाद से पहुंचे उस्ताद शायर ख्याल मुरादाबादी ने कहा ये किसने कहा है अता तेरी कम है, तेरा मुझ पर साबिर करम ही करम है। शायर सैयद नफीसुल हसन ‘नफीस’ ने पढ़ा, सरकार मेरे दिल के अरमान अब निकालो, आका मदीने वाले, तैयबा मुझे बुला लो। इसके अलावा उदय कुमार ‘मुसव्विर’, राहत भगवानपुरी, अमन अंसारी, नियाज मंगलोरी और मखदूम गंगोही समेत अन्य शायरों ने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर सुहैल मियां, नोमी मियां, असद साबरी, अनीस कस्सार, सलमान फरीदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी ने अतिथियों और देशभर से पहुंचे शायरों की दस्तारबंदी कर स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन सैयद नजर हुसैन चिश्ती, पूर्व राज्यमंत्री मुफ्ती शमून कासमी, शाह मखदूम कुद्दुसी और वक्फ बोर्ड की पूर्व सदस्य नाजिमा शेख ने देश और प्रदेश में अमन, सलामती व भाईचारे की दुआ की।
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उन्होंने कहा कि सूफी संतों व शायरों ने हमेशा समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश देने का काम किया है। उर्स कमेटी के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलौरी ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने कहा कि देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को सूफी संतों ने सदियों से जीवित रखा है। यही वजह है कि पिरान कलियर की सरजमीं पर सभी धर्मों के लोग पहुंचकर एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।
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मुशायरे का आगाज शाह यावर साबरी ने नातिया कलाम से किया। उन्होंने पढ़ा, “इसी बाइस तो हम कुद्दुसियों पर नाज करते हैं, मिले हैं हमको साबिर, कुतुबे आलम के वसीले से।” मुरादाबाद से पहुंचे उस्ताद शायर ख्याल मुरादाबादी ने कहा ये किसने कहा है अता तेरी कम है, तेरा मुझ पर साबिर करम ही करम है। शायर सैयद नफीसुल हसन ‘नफीस’ ने पढ़ा, सरकार मेरे दिल के अरमान अब निकालो, आका मदीने वाले, तैयबा मुझे बुला लो। इसके अलावा उदय कुमार ‘मुसव्विर’, राहत भगवानपुरी, अमन अंसारी, नियाज मंगलोरी और मखदूम गंगोही समेत अन्य शायरों ने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर सुहैल मियां, नोमी मियां, असद साबरी, अनीस कस्सार, सलमान फरीदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।