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फसलों पर कराया नैनो यूरिया का पहला छिड़कावा
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लक्सर/खानपुर। इफको की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी की देखरेख में जिले के सोहलपुर और शेरपुर के किसानों के खेतों में नैनो यूरिया का धान की फसलों पर प्रभाव का परीक्षण कराया जा रहा है। शुक्रवार को फसलों पर नैनो यूरिया का पहला छिड़काव कराया गया है।
इफको ने कुछ दिन पहले यूरिया के विकल्प के तौर पर तरल नैनो यूरिया का उत्पादन शुरू किया है। अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने धान की फसल पर नैनो यूरिया के प्रभाव की जांच करने के लिए देश भर के 21 कृषि विज्ञान केंद्रों को जिम्मेदारी सौंपी है। केवीके धनौरी भी इफको के साथ मिलकर बहादराबाद के सोहलपुर निवासी किसान सुखपाल सिंह और पथरी के शेरपुर निवासी किसान सचिन सैनी के खेतों में परीक्षण करा रहा है। इफको के एसएफए ओमवीर सैनी ने बताया कि परीक्षण में किसान की एक एकड़ भूमि में धान की फसल की रोपाई कराकर यूरिया डाला जा रहा है। वहीं एक एकड़ भूमि पर रोपी गई धान की फसल में दो बार नैनो यूरिया का छिड़काव किया जाएगा। शुक्रवार को सोहलपुर में केवीके धनौरी के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र पाल सैनी की देखरेख में धान की एक एकड़ फसल में नैनो यूरिया का पहला छिड़काव कराया गया है। डॉ. ओमवीर सैनी ने बताया कि इसके 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव कराया जाएगा। बाद में दानेदार यूरिया और नैनो यूरिया से पैदा हुई फसल की प्रति हेक्टेयर उपज के साथ ही अनाज में पोषक तत्वों की मौजूदगी का भी विश्लेषण किया जाएगा।
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इफको ने कुछ दिन पहले यूरिया के विकल्प के तौर पर तरल नैनो यूरिया का उत्पादन शुरू किया है। अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने धान की फसल पर नैनो यूरिया के प्रभाव की जांच करने के लिए देश भर के 21 कृषि विज्ञान केंद्रों को जिम्मेदारी सौंपी है। केवीके धनौरी भी इफको के साथ मिलकर बहादराबाद के सोहलपुर निवासी किसान सुखपाल सिंह और पथरी के शेरपुर निवासी किसान सचिन सैनी के खेतों में परीक्षण करा रहा है। इफको के एसएफए ओमवीर सैनी ने बताया कि परीक्षण में किसान की एक एकड़ भूमि में धान की फसल की रोपाई कराकर यूरिया डाला जा रहा है। वहीं एक एकड़ भूमि पर रोपी गई धान की फसल में दो बार नैनो यूरिया का छिड़काव किया जाएगा। शुक्रवार को सोहलपुर में केवीके धनौरी के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र पाल सैनी की देखरेख में धान की एक एकड़ फसल में नैनो यूरिया का पहला छिड़काव कराया गया है। डॉ. ओमवीर सैनी ने बताया कि इसके 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव कराया जाएगा। बाद में दानेदार यूरिया और नैनो यूरिया से पैदा हुई फसल की प्रति हेक्टेयर उपज के साथ ही अनाज में पोषक तत्वों की मौजूदगी का भी विश्लेषण किया जाएगा।
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