{"_id":"612532ef8ebc3e74e77fbf15","slug":"fewer-staff-more-vaccines-expected-roorkee-news-drn388385661","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधी व्यवस्थाओं के साथ कैसे पूरा होगा लक्ष्यक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधी व्यवस्थाओं के साथ कैसे पूरा होगा लक्ष्यक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुड़की। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग को कोरोना वैक्सीन टीकाकरण के लिए बड़े-बड़े टारगेट तो दे रही है, लेकिन उस टारगेट तक पहुंचने में बाधा बन रही स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया जा रहा है। कम स्टाफ के चलते सेंटरों पर लोगों की भीड़ लग जाती है तो वे हंगामा करना शुरू कर देते हैं। दो दिन पहले भी टीकाकरण महा अभियान के दौरान शहर से लेकर देहात तक कई सेंटरों पर समय से टीकाकरण नहीं होने से भड़की भीड़ ने स्टाफ के साथ बदसलूकी कर दी। ऐसे में आधी व्यवस्थाओं के बीच टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करना स्वास्थ्य विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है।
इस समय कोरोना महामारी के चलते केंद्र और प्रदेश सरकार का पूरा फोकस कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण पर है। इसको लेकर सरकार ने टीकाकरण महा अभियान शुरू किया है। इसके तहत सरकार हर शहर में स्वास्थ्य विभाग को एक दिन में टीकाकरण का लक्ष्य देने लगी है। सबसे पहले पिछले महीने रुड़की शहर के साथ ही इमलीखेड़ा, नारसन और भगवानपुर में स्वास्थ्य विभाग को टारगेट दिया गया था। पहली बार टारगेट मिलने पर उत्साहपूर्वक सभी स्टाफ कर्मचारियों ने इसे प्राप्त कर लिया था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग टारगेट के सापेक्ष 30 से 40 प्रतिशत ही लक्ष्य प्राप्त कर पा रहा है। इसकी मुख्य वजह सेंटरों पर स्टाफ की कमी है। सरकार स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य तो दे देता है, लेकिन सहायता के तौर पर पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल पाता। दो दिन पहले शहर और देहात में लगे सेंटरों में कई जगह पर स्टाफ कम होने के चलते लोगों के हंगामा करनेे की सूचना आई। दरअसल, एक सेंटर पर दो वैक्सीनेटर और तीन वैरीफायर होने चाहिए, जबकि हर सेंटर पर एक वैक्सीनेटर और एक वैरीफायर मौजूद होता है। वैक्सीन के लिए एक व्यक्ति को वैरीफाई करने में दो से तीन मिनट लग जाते हैं। ऐसे में सेंटरों पर लंबी कतार लग जाती है और लोग हंगामा करना शुरू कर देते हैं। यहां तक कि स्टाफ के साथ बदसलूकी की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने कम स्टाफ के बीच लक्ष्य को प्राप्त करना परेशानी भरा हो रहा है।
प्राप्त लक्ष्य को पूरा करना कठिन काम नहीं है, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते काम करने में दिक्कत आ रही है। एक सेंटर पर कम से कम दो वैरीफायर होने जरूरी हैं। यदि एक वैरीफायर मिलता है तो काम में बाधा आती है और स्टाफ को लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता है।
विज्ञापन
- रंजना भटनागर, परियोजना प्रबंधक, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुड़की
देहात क्षेत्र में खोले जाने वाले सेंटरों पर कम स्टाफ के चलते टारगेट पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कई बार पुलिस और प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में स्टाफ को स्वयं ही भीड़ नियंत्रित करनी पड़ती है। ऐसे में टीकाकरण का काम प्रभावित होता है।
-डॉ. दिलीरमन, प्रभारी, सीएचसी, इमलीखेड़ा
विज्ञापन
इस समय कोरोना महामारी के चलते केंद्र और प्रदेश सरकार का पूरा फोकस कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण पर है। इसको लेकर सरकार ने टीकाकरण महा अभियान शुरू किया है। इसके तहत सरकार हर शहर में स्वास्थ्य विभाग को एक दिन में टीकाकरण का लक्ष्य देने लगी है। सबसे पहले पिछले महीने रुड़की शहर के साथ ही इमलीखेड़ा, नारसन और भगवानपुर में स्वास्थ्य विभाग को टारगेट दिया गया था। पहली बार टारगेट मिलने पर उत्साहपूर्वक सभी स्टाफ कर्मचारियों ने इसे प्राप्त कर लिया था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग टारगेट के सापेक्ष 30 से 40 प्रतिशत ही लक्ष्य प्राप्त कर पा रहा है। इसकी मुख्य वजह सेंटरों पर स्टाफ की कमी है। सरकार स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य तो दे देता है, लेकिन सहायता के तौर पर पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल पाता। दो दिन पहले शहर और देहात में लगे सेंटरों में कई जगह पर स्टाफ कम होने के चलते लोगों के हंगामा करनेे की सूचना आई। दरअसल, एक सेंटर पर दो वैक्सीनेटर और तीन वैरीफायर होने चाहिए, जबकि हर सेंटर पर एक वैक्सीनेटर और एक वैरीफायर मौजूद होता है। वैक्सीन के लिए एक व्यक्ति को वैरीफाई करने में दो से तीन मिनट लग जाते हैं। ऐसे में सेंटरों पर लंबी कतार लग जाती है और लोग हंगामा करना शुरू कर देते हैं। यहां तक कि स्टाफ के साथ बदसलूकी की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने कम स्टाफ के बीच लक्ष्य को प्राप्त करना परेशानी भरा हो रहा है।
विज्ञापन
प्राप्त लक्ष्य को पूरा करना कठिन काम नहीं है, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते काम करने में दिक्कत आ रही है। एक सेंटर पर कम से कम दो वैरीफायर होने जरूरी हैं। यदि एक वैरीफायर मिलता है तो काम में बाधा आती है और स्टाफ को लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता है।
विज्ञापन
- रंजना भटनागर, परियोजना प्रबंधक, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुड़की
देहात क्षेत्र में खोले जाने वाले सेंटरों पर कम स्टाफ के चलते टारगेट पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कई बार पुलिस और प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में स्टाफ को स्वयं ही भीड़ नियंत्रित करनी पड़ती है। ऐसे में टीकाकरण का काम प्रभावित होता है।
-डॉ. दिलीरमन, प्रभारी, सीएचसी, इमलीखेड़ा