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देवर-भाभी की लड़ाई में क्या गुल खिलाएगी बसपा
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Tue, 24 Jan 2017 10:00 PM IST
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भगवानपुर सीट लगातार दो बार बसपा के खाते में रही। ऐसे में राकेश परिवार टूटने के बाद देवर-भाभी की लड़ाई में बसपा क्या गुल खिलाएगी यह सवाल प्रत्येक राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक मतदाता के जुबान पर है।
भगवानपुर में बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़े दिवंगत कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश दो बार विधायक बने। उन्होंने वर्ष 2007 एवं वर्ष 2012 में जीत दर्ज कर भगवानपुर सीट को बसपा को दिया। लेकिन, सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश उपचुनाव में कांग्रेस के निशान पर चुनाव जीती। हालांकि उपचुनाव में बसपा ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। इससे बसपा के फायदे एवं नुकसान का आकलन नहीं हो पाया था। लेकिन, अब आने वाले चुनाव परिणामों से बसपा का कद तय हो जाएगा। उधर, ममता के कांग्रेस में जाने के कुछ समय बाद विधायक बनने की चाह में सुबोध राकेश भी अलग हो गए। उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया। इससे कभी एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने वाला राकेश परिवार टूट गया।
भाभी कांग्रेस से सियासी समर में आ गई तो देवर भाजपा से चुनावी मैदान में कूद पड़े। अब बसपा ने भी देवर-भाभी की लड़ाई में रामकुमार राणा को चुनावी दंगल में उतारा है। रामकुमार राणा भी चुनावी मैदान में देवर-भाभी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इससे यहां मुकाबला त्रिकोणीय बनता नजर आ रहा है। लेकिन, इस बार देखने वाली बात यह होगी कि दो बार बसपा के पास रहने वाली यह सीट पर इस बार किसके पाले में जाती है।
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भगवानपुर में बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़े दिवंगत कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश दो बार विधायक बने। उन्होंने वर्ष 2007 एवं वर्ष 2012 में जीत दर्ज कर भगवानपुर सीट को बसपा को दिया। लेकिन, सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश उपचुनाव में कांग्रेस के निशान पर चुनाव जीती। हालांकि उपचुनाव में बसपा ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। इससे बसपा के फायदे एवं नुकसान का आकलन नहीं हो पाया था। लेकिन, अब आने वाले चुनाव परिणामों से बसपा का कद तय हो जाएगा। उधर, ममता के कांग्रेस में जाने के कुछ समय बाद विधायक बनने की चाह में सुबोध राकेश भी अलग हो गए। उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया। इससे कभी एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने वाला राकेश परिवार टूट गया।
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भाभी कांग्रेस से सियासी समर में आ गई तो देवर भाजपा से चुनावी मैदान में कूद पड़े। अब बसपा ने भी देवर-भाभी की लड़ाई में रामकुमार राणा को चुनावी दंगल में उतारा है। रामकुमार राणा भी चुनावी मैदान में देवर-भाभी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इससे यहां मुकाबला त्रिकोणीय बनता नजर आ रहा है। लेकिन, इस बार देखने वाली बात यह होगी कि दो बार बसपा के पास रहने वाली यह सीट पर इस बार किसके पाले में जाती है।
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