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20 साल पुराने अवैध नियुक्ति मामले में कमिश्नर ने डीएम को दिए आदेश
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गढ़वाल कमिश्नर ने एक अधिवक्ता के पत्र एवं सूचना आयोग के निर्देशों के तहत जिलाधिकारी को नगर निगम रुड़की में छह कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियों के बाबत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। करीब 20 साल पहले तत्कालीन कमिश्नर ने नियुक्तियां रद्द करने के साथ ही कर्मचारियों से वेतन व भत्ते आदि की रिकवरी के निर्देश दिए थे, लेकिन जांच और कार्रवाई आगे बढ़ती, इससे पहले ही मामले से जुड़ी पत्रावलियां गायब हो गईं।
नगर निगम के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने वर्ष 2000 में एक पत्र जारी किया था। इसमें गढ़वाल कमिश्नर के आदेशों का हवाला देते हुए बताया गया कि नगर निगम में छह कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से नियुक्ति हासिल की हैं। पत्र के अनुसार, कमिश्नर ने सभी नियुक्तियों को रद्द करने के साथ ही कर्मचारियों से रिकवरी के भी आदेश दिए थे, लेकिन इसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इसके बाद 30 जून 2020 को अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने नगर निगम से सूूचना अधिकार के तहत मामले की सत्यापित पत्रावली मांगी। सूचना नहीं मिलने पर अपील की गई। तब भी जानकारी नहीं मिली। इसके बाद मामला लोक सूचना आयोग देहरादून पहुंचा। आयोग ने कहा कि नौ अप्रैल को सुनवाई करते हुए कहा कि वर्ष 2000 के बाद जो भी पत्रावलियां गठित की गई हैं, वह गायब हैं। इससे अभी अभिलेखों के गायब होने की मामले की जांच कर कार्रवाई की जानी जरूरी है। साथ ही षड्यंत्र के तहत पत्रावली गायब होना सही पाए जाने पर नगर निगम को तीन माह में जांच और एफआईआर दर्ज कराने व अपीलकर्ता को अवगत कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने गढ़वाल कमिश्नर को शिकायती पत्र भेजा। इस पर कमिश्नर ने जिलाधिकारी को प्रकरण में अपने स्तर से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस बाबत नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि कोविड के चलते जांच समय पर नहीं हो सकी। इसके बाद जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के चलते विलंब हुआ। अब सहायक नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं। निगम के सभी पटलों से प्रकरण के संबंध में जानकारी एवं पत्रावली तलब की गई है।
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नगर निगम के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने वर्ष 2000 में एक पत्र जारी किया था। इसमें गढ़वाल कमिश्नर के आदेशों का हवाला देते हुए बताया गया कि नगर निगम में छह कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से नियुक्ति हासिल की हैं। पत्र के अनुसार, कमिश्नर ने सभी नियुक्तियों को रद्द करने के साथ ही कर्मचारियों से रिकवरी के भी आदेश दिए थे, लेकिन इसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इसके बाद 30 जून 2020 को अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने नगर निगम से सूूचना अधिकार के तहत मामले की सत्यापित पत्रावली मांगी। सूचना नहीं मिलने पर अपील की गई। तब भी जानकारी नहीं मिली। इसके बाद मामला लोक सूचना आयोग देहरादून पहुंचा। आयोग ने कहा कि नौ अप्रैल को सुनवाई करते हुए कहा कि वर्ष 2000 के बाद जो भी पत्रावलियां गठित की गई हैं, वह गायब हैं। इससे अभी अभिलेखों के गायब होने की मामले की जांच कर कार्रवाई की जानी जरूरी है। साथ ही षड्यंत्र के तहत पत्रावली गायब होना सही पाए जाने पर नगर निगम को तीन माह में जांच और एफआईआर दर्ज कराने व अपीलकर्ता को अवगत कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने गढ़वाल कमिश्नर को शिकायती पत्र भेजा। इस पर कमिश्नर ने जिलाधिकारी को प्रकरण में अपने स्तर से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस बाबत नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि कोविड के चलते जांच समय पर नहीं हो सकी। इसके बाद जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के चलते विलंब हुआ। अब सहायक नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं। निगम के सभी पटलों से प्रकरण के संबंध में जानकारी एवं पत्रावली तलब की गई है।
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