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किसान पौधशालाओं से ही खरीदें गन्ने का बीज
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नगला ईमरती गांव में किसानों को जानकारी देते कृषि वैज्ञानिक।
- फोटो : ROORKEE
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गन्ना किसान संस्थान ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में अधिकारियों ने किसानों को गन्ने की आधुनिक तकनीकी से खेती करने के लिए प्रेरित किया। चीनी मिल के प्रबंधक ने किसानों को ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती करने की सलाह दी।
सोमवार को गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर की ओर से नगला इमरती गांव में कृषक गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को गन्ने की उन्नत खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। गन्ना शोध केंद्र काशीपुर से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि वर्तमान में किसान गन्ने की आधुनिक तकनीकी से खेती करके ही मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने किसानों को गन्ने की नई प्रजाति सीओ 0238, सीओ 118, सीओ 15023 और सीओएलके 14201 प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि इस प्रजाति में सामान्य से ज्यादा लाभ है। उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ने का बीज पौधशाला से ही लेना चाहिए। मुजफ्फरनगर से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगपाल सिंह मलिक ने किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाले कीटों, उनकी पहचान और उपचार की जानकारी दी।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दिग्विजय सिंह ने किसानों को गन्ना विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। कहा कि किसान समिति के सदस्य किसानों का तीन लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी कराया जाता है। दुर्भाग्य से खेती का काम करते समय हादसे में मौत होने पर किसान के परिजनों को बीमा राशि मिलती है। इस दौरान लिब्बरहेड़ी शुगर मिल के एजीएम सत्येंद्र सिंह ने बताया कि किसान ट्रेंच विधि अपनाकर थोड़ी लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। इसमें किसान को गड्ढा बनाकर चार से पांच फीट की दूरी पर सिंगल पेड़ी का बीज लगाकर गन्ने की खेती करनी होती है। गोष्ठी में सुरेंद्र दत्त, आदेश त्यागी, राकेश त्यागी, जितेंद्र त्यागी, मयंक शर्मा, खलील प्रधान, असफाक, मुस्तकीम, कुलदीप, राजेंद्र सिंह, अशोक कुमार, किरनपाल, प्रमेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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सोमवार को गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर की ओर से नगला इमरती गांव में कृषक गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को गन्ने की उन्नत खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। गन्ना शोध केंद्र काशीपुर से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि वर्तमान में किसान गन्ने की आधुनिक तकनीकी से खेती करके ही मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने किसानों को गन्ने की नई प्रजाति सीओ 0238, सीओ 118, सीओ 15023 और सीओएलके 14201 प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि इस प्रजाति में सामान्य से ज्यादा लाभ है। उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ने का बीज पौधशाला से ही लेना चाहिए। मुजफ्फरनगर से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगपाल सिंह मलिक ने किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाले कीटों, उनकी पहचान और उपचार की जानकारी दी।
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ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दिग्विजय सिंह ने किसानों को गन्ना विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। कहा कि किसान समिति के सदस्य किसानों का तीन लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी कराया जाता है। दुर्भाग्य से खेती का काम करते समय हादसे में मौत होने पर किसान के परिजनों को बीमा राशि मिलती है। इस दौरान लिब्बरहेड़ी शुगर मिल के एजीएम सत्येंद्र सिंह ने बताया कि किसान ट्रेंच विधि अपनाकर थोड़ी लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। इसमें किसान को गड्ढा बनाकर चार से पांच फीट की दूरी पर सिंगल पेड़ी का बीज लगाकर गन्ने की खेती करनी होती है। गोष्ठी में सुरेंद्र दत्त, आदेश त्यागी, राकेश त्यागी, जितेंद्र त्यागी, मयंक शर्मा, खलील प्रधान, असफाक, मुस्तकीम, कुलदीप, राजेंद्र सिंह, अशोक कुमार, किरनपाल, प्रमेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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