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भाई बहन के अटूट पर्व रक्षा बंधन पर छाया हर और उल्लास

Sat, 17 Aug 2019 12:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2019 12:00 AM IST
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Brother and sister's unwavering festival Raksha Bandhan's shadow and joy
रुड़की में रक्षा बंधन के दौरान भाई बहनें। - फोटो : ROORKEE
रुड़की/लक्सर/खानपुर। बहन-भाई के अटूट पर्व रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने उत्साह के साथ भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधीं। इस दौरान भाइयों ने रक्षा का संकल्प लिया। लक्सर कस्बे और गांवों में दिन भर पर्व की धूम बनी रही। हर ओर उत्साह और उत्सवी माहौल नजर आया। हर कोई राखी के रंग में दिखा। भाइयों की कलाइयां खूबसूरत डिजाइनदार राखियों से चमक रही थीं।
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रक्षाबंधन पर्व पर भाई-बहनों के यहां खुद राखी बंधवाने पहुंचे तो वहीं बहनें भी भाई के असमर्थता पर खुद ही उनके घर पहुंच गई। रक्षा सूत्र बंधवाकर भाइयों ने बहनों को उपहार भी दिए। श्रावण मास में शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को मनाए जाने वाला रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के प्रति अगाधश्रद्धा, अटूट विश्वास को समर्पित है। यह पर्व अपने आपमें अनेक धार्मिक ,पौराणिक एवं सामाजिक मान्यता समेटे हुए है। ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री व राजेश शर्मा ने बताया कि देवी शास्त्र के अनुसार बंधन का आशय उस शक्ति सूत्र से है, जो हर प्रकार से प्राणी जगत की रक्षा करता है। देवी शास्त्र के अनुसार मां भगवती ने देवताओं को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें विजयश्री दिलाई। वहीं द्वापर युग में द्रोपदी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की कलाई में बांधे धागे ने रक्षा कवच का कार्य करते हुए चीरहरण के दौरान द्रोपदी की लाज बचाई। पुरानी इसी मान्यता के अनुरूप बृहस्पतिवार को भी बहन-भाई के पवित्र पर्व रक्षाबंधन की हर ओर धूम रही।
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वहीं इस रक्षाबंधन पर पूरा दिन भद्रान होने के कारण यह त्यौहार पूरा दिन मनाया गया। शिव हनुमान मंदिर केपुजारी प्रेमानंद गिरि महाराज ने बताया कि मान्यता है कि जो बहन शुभ कालमें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। उसके भाई की असमय मृत्युनही होती है। ऐसा वचन मृत्यु के देवता यमराज ने अपनी बहन यमुना को दिया था।
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बस अड्डों पर को उमड़ी बहनों की भीड़
बृहस्पतिवार को सुबह रुड़की और लक्सर रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनें और बसे खचाखच भरीर ही। ट्रेन में भी काफी भीड़भाड़ थी। दोपहर के समय आने वाली बसों के यात्री एक ओर उतरने का प्रयास कर रहे थे तो दूसरी ओर उसमें घुसने के लिए लोग गेट एवं खिड़कियों पर आपाधापी करते रहे। सुबह से ही रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड पर भीड़भाड़ का नाजारा दिखने लगा था। बस स्टैंड पर व उनके बाहर सडक़ के दोनों ओर हर कोई वाहनों का बेसब्री से इंतजार कर रहा थे। बहनें बस के पीछे दौड़ती नजर आई तो कोई बस आने का इंतजार कर रही थी। पीछे से सभी बसें खचाखच भरी आ रही थी।
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