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संक्रामक बीमारी से ग्रसित घोड़े को दी गई ‘दया मृत्यु’

Tue, 23 Jun 2020 10:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 10:24 PM IST
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beemaaree se grasit ghode ko dee gaee daya mrtyu
झबरेड़ा/रुड़की। बेहडे़की सैदाबाद में संक्रामक बीमारी से ग्रसित होने पर एक घोड़े को पशु डॉक्टरों की टीम ने यूथेसिया विधि अपनाकर दया मृत्यु दे दी। डॉक्टरों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में घोड़े को खतरनाक संक्रामक बीमारी ग्लैंडर की पुष्टि होने के बाद इसके अन्य घोड़ों और इंसानों में भी फैलने की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया। पशुपालक को नियमानुसार मुआवजा भी दिया जाएगा।
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इकबालपुर क्षेत्र के पशु पालकों ने घोड़ों में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका जताई गई थी। डॉक्टरों की टीम ने लगभग एक सप्ताह पूर्व बेहड़ेकी सैदाबाद गांव पहुंचकर सात घोड़ों के खून के सैंपल लेकर बंगलूरू स्थित एनिमल रिसर्च सेंटर भेजे थे। बताया जा रहा है कि एक घोड़े की रिपोर्ट में ग्लैंडर की पुष्टि हुई है। घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आने पर मंगलवार को मालिक चंदन प्रजापति के घर पशु चिकित्सकों की टीम पहुंची। टीम में शामिल डॉ. मुकेश गौड़, ऋषिकेश लैब से डॉक्टर प्रशांत दुबे और पुष्कर सिंह ने बताया कि यह बीमारी है और दूसरे पशुओं को भी लग सकती है। यही नहीं, घोड़े के ज्यादा संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को बीमारी हो सकती है। इसलिए घोड़े को दया मृत्यु देना जरूरी है। पशुपालक की सहमति पर डॉक्टरों ने घोड़े को यूथेसिया विधि से दया मृत्यु देकर दफना दिया। भगवानपुर के पशु चिकित्साधिकारी मुकेश गौड़ का कहना है कि कुंजा बहादुरपुर गांव से भी पांच घोड़ों के सैंपल लेकर बंगलूरू भेजे गए हैं। अभी उनकी रिपोर्ट नहीं आई है।
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ग्लैंडर एंड पारसी एक्ट के अनुसार, ग्लैंडर से ग्रसित होने पर संबंधित पशु को दया मृत्यु देने का प्रावधान है ताकि किसी और में संक्रमण न फैले। यूथेसिया के बाद संबंधित पशु पालक को सरकार की ओर से 25000 का मुआवजा भी प्रदान किया जाता है। बीते तीन वर्षों में जिले में ग्लैंडर के करीब दस मामले सामने आ चुके हैं।
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-बीसी कर्नाटक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, हरिद्वार
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नहीं है ग्लैंडर का कोई इलाज
रुड़की के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उमेश भट्ट ने बताया कि ग्लैंडर एक जीवाणु जनित रोग है और घोड़ों के बाद मनुष्यों और स्तनधारी पशुओं में फैलता है। इसका वायरस नाक, मुंह के रास्ते शरीर में फैलता है। मैलिन नाम के टेस्ट से बीमारी को कन्फर्म किया जाता है। इससे संक्रमित होने पर घोड़े, खच्चर और गधों के शरीर की गांठों में इंफेक्शन और पश बन जाती है। जानवर उठ नहीं पाता और शरीर सूज जाता है। बीमारी से पीड़ित होने पर मौत निश्चित है।
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