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भाजपा-कांग्रेस पर प्रहार , रावत का नहीं लिया नाम
विनोद कुमार सिंह रुड़की
Updated Thu, 09 Feb 2017 11:01 PM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने 40 मिनट के संबोधन में विरोधी पार्टियों पर जमकर प्रहार किया। खासतौर से केंद्र सरकार और बीजेपी एंड कंपनी उनके निशाने पर रही। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा, लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का एक बार भी नाम नहीं लिया, जबकि जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पांच बार सीधे हमला बोला। सियासी जानकार अब मायावती के संबोधन के मायने और सियासी लाभ हानि का आंकड़ा निकालने में जुटे हुए हैं।
लक्सर के हरिद्वार रोड पर आयोजित मायावती की जनसभा में शामिल होने के लिए न सिर्फ हरिद्वार से बल्कि देहरादून और और पहाड़ से भी बसपा प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे हुए थे। मैदान में हजारों की भीड़ एकत्रित थी। दोपहर एक बजकर 35 मिनट पर मायावती का हैलीकाप्टर लैंड हुआ। इसके बाद मंच पर पहुंचते ही एक बजकर 40 मिनट पर उन्होंने अपना संबोधन शुरू कर दिया। दो बजकर 20 मिनट तक चले संबोधन में मायावती ने भाजपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। टिकट वितरण में पारदर्शिता, सर्वसमाज की भागीदारी और निष्ठा को उन्होंने आधार बताया। चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में किए गए कार्यों का हवाला देते हुए यहां बीएसपी की सरकार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में यूपी में कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। इसे उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया। अल्पसंख्यकों का विशेष ध्यान रखने का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ बीएसपी को वोट देने की अपील की। करीब 40 मिनट के संबोधन में एकबार भी मायावती ने मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम नहीं लिया, जबकि नरेंद्र मोदी और भाजपा-कांग्रेस पर प्रहार करती रहीं। बसपा सुप्रीमो की जनसभा के बाद अब सियासत के जानकार इसके मायने और लाभ-हानि का आकलन करने में जुटें हैं।
बसपा नहीं जारी करती घोषणापत्र
मायावती ने कहा कि विरोधी पार्टियों की तरह बसपा चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं करती है, बल्कि काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस की ओर से लुभावने घोषणापत्र जारी किए जा रहे हैं, जिसके झांसे में हमें नहीं आना है। उन्होंने कहा कि मोदी ने महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी खत्म करने और सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर कालाधन लाकर गरीबों के खाते में 15-15 लाख रुपये डलवाने का भरोसा दिलाया था। साथ ही अच्छे दिन का सपना दिखाया था, लेकिन आज हकीकत सबके सामने है।
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लक्सर के हरिद्वार रोड पर आयोजित मायावती की जनसभा में शामिल होने के लिए न सिर्फ हरिद्वार से बल्कि देहरादून और और पहाड़ से भी बसपा प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे हुए थे। मैदान में हजारों की भीड़ एकत्रित थी। दोपहर एक बजकर 35 मिनट पर मायावती का हैलीकाप्टर लैंड हुआ। इसके बाद मंच पर पहुंचते ही एक बजकर 40 मिनट पर उन्होंने अपना संबोधन शुरू कर दिया। दो बजकर 20 मिनट तक चले संबोधन में मायावती ने भाजपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। टिकट वितरण में पारदर्शिता, सर्वसमाज की भागीदारी और निष्ठा को उन्होंने आधार बताया। चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में किए गए कार्यों का हवाला देते हुए यहां बीएसपी की सरकार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में यूपी में कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। इसे उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया। अल्पसंख्यकों का विशेष ध्यान रखने का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ बीएसपी को वोट देने की अपील की। करीब 40 मिनट के संबोधन में एकबार भी मायावती ने मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम नहीं लिया, जबकि नरेंद्र मोदी और भाजपा-कांग्रेस पर प्रहार करती रहीं। बसपा सुप्रीमो की जनसभा के बाद अब सियासत के जानकार इसके मायने और लाभ-हानि का आकलन करने में जुटें हैं।
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बसपा नहीं जारी करती घोषणापत्र
मायावती ने कहा कि विरोधी पार्टियों की तरह बसपा चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं करती है, बल्कि काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस की ओर से लुभावने घोषणापत्र जारी किए जा रहे हैं, जिसके झांसे में हमें नहीं आना है। उन्होंने कहा कि मोदी ने महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी खत्म करने और सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर कालाधन लाकर गरीबों के खाते में 15-15 लाख रुपये डलवाने का भरोसा दिलाया था। साथ ही अच्छे दिन का सपना दिखाया था, लेकिन आज हकीकत सबके सामने है।
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