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गजब: न कोई ठेका न टेंडर, फिर भी हो रही लाखों की अवैध वसूली
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रुड़की। नगर निगम की तहबाजारी की रसीद पर हर रोज करीब तीन हजार वेंडरों से पांच से 10 रुपये लेकर रोजाना करीब 20 हजार की वसूली की जा रही है। हैरत इस बात की है कि इसके लिए नगर निगम की ओर से न तो कोई टेंडर जारी किया गया है और न ही कोई ठेका छोड़ा गया है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि नगर निगम के अधिकृत कर्मचारी कहकर रौब दिखाकर रेहड़ी वालों से की जा रही अवैध वसूली किसकी जेब में जा रही है।
रुड़की नगर निगम क्षेत्र में सड़कों के किनारे रेहड़ी ठेली लगाकर फल, सब्जी, चाट व खाने पीने की चीजें बेचकर अपना परिवार पाल रहे वेंडरों की तीन हजार से अधिक की संख्या है। हालांकि नगर निगम में रजिस्टर्ड वेंडरों की संख्या दो हजार के आसपास है। वेंडरों के मुताबिक नगर निगम की टीम होने का दावा करने वाले कुछ लोगों की टीम करीब एक साल से उनसे पांच और 10 रुपये की रोजाना वसूली कर रही है। पैसे नहीं देने पर नगर निगम और प्रशासन का डर दिखाया जाता है, इसलिए मजबूरन हर रोज इन कर्मचारियों को रुपये दे दिए जाते हैं। हैरत की बात यह है कि जहां एक ओर अधिकारी किसी प्रकार का तहबाजारी का ठेका या टेंडर जारी नहीं किए जाने की बात कह रहे हैं, वहीं खुद को निगम के कर्मचारी बताने वाले ये लोग बाकायदा नगर निगम की तहबाजारी की रसीद भी देते आ रहे हैं। 10 रुपये प्रति के हिसाब से यह राशि प्रतिदिन 30 हजार बैठती है। यदि इनमें से कुछ वेंडरों से पांच रुपये की वसूली भी हो रही है तो भी करीब 20 हजार रुपये प्रतिदिन वसूले जा रहे हैं। इसके हिसाब से यह धनराशि प्रतिमाह छह लाख और एक साल में 72 लाख रुपये बैठती है। ऐसे में इतनी मोटी रकम किसके इशारे पर वसूली जा रही है और इसका बंटवारा किसे हो रहा है। वहीं अधिकारियों ने मामले में शिकायत मिलने पर जांच की बात कही है।
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रसीद में भी गोलमाल
वेंडरों से वसूली के लिए दी जा रही रसीद पर तहबाजारी टिकट नगर निगम रुड़की लिखा हुआ है। इस पर रोजाना की तारीख भी लिखी जा रही है। जहां रकम दर्ज है, वह तादाद के कॉलम में दर्ज की जा रही है ताकि यह मालूम न हो सके कि यह रकम एक व्यक्ति से ली जा रही है या एक से ज्यादा व्यक्तियों से। बहरहाल, रसीद का सच क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
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लोडिंग-अनलोडिंग की तहबाजारी में भी घपले की बू
बाजार में सामान उतारने और लोड करने वाले वाहनों से भी वसूली की जा रही है। इसके लिए भी नगर निगम की ओर से कोई टेंडर जारी नहीं किया गया है। मामले में जिलाधिकारी से शिकायत करने वाले आदेश सैनी सम्राट का कहना है कि प्रत्येक माल उतारने और चढ़ाने वाली गाड़ी से रोजाना 50 और 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसे में यह राशि भी माह में लाखों की है।
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नगर निगम की ओर से तहबाजारी के लिए एक साल से कोई ठेका या टेंडर जारी नहीं किया गया है। यदि किसी के पास वसूली किए जाने के साक्ष्य हैं तो शिकायत के साथ उपलब्ध कराए जाने पर जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-नूपुर वर्मा, नगर आयुक्त रुड़की
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रुड़की नगर निगम क्षेत्र में सड़कों के किनारे रेहड़ी ठेली लगाकर फल, सब्जी, चाट व खाने पीने की चीजें बेचकर अपना परिवार पाल रहे वेंडरों की तीन हजार से अधिक की संख्या है। हालांकि नगर निगम में रजिस्टर्ड वेंडरों की संख्या दो हजार के आसपास है। वेंडरों के मुताबिक नगर निगम की टीम होने का दावा करने वाले कुछ लोगों की टीम करीब एक साल से उनसे पांच और 10 रुपये की रोजाना वसूली कर रही है। पैसे नहीं देने पर नगर निगम और प्रशासन का डर दिखाया जाता है, इसलिए मजबूरन हर रोज इन कर्मचारियों को रुपये दे दिए जाते हैं। हैरत की बात यह है कि जहां एक ओर अधिकारी किसी प्रकार का तहबाजारी का ठेका या टेंडर जारी नहीं किए जाने की बात कह रहे हैं, वहीं खुद को निगम के कर्मचारी बताने वाले ये लोग बाकायदा नगर निगम की तहबाजारी की रसीद भी देते आ रहे हैं। 10 रुपये प्रति के हिसाब से यह राशि प्रतिदिन 30 हजार बैठती है। यदि इनमें से कुछ वेंडरों से पांच रुपये की वसूली भी हो रही है तो भी करीब 20 हजार रुपये प्रतिदिन वसूले जा रहे हैं। इसके हिसाब से यह धनराशि प्रतिमाह छह लाख और एक साल में 72 लाख रुपये बैठती है। ऐसे में इतनी मोटी रकम किसके इशारे पर वसूली जा रही है और इसका बंटवारा किसे हो रहा है। वहीं अधिकारियों ने मामले में शिकायत मिलने पर जांच की बात कही है।
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रसीद में भी गोलमाल
वेंडरों से वसूली के लिए दी जा रही रसीद पर तहबाजारी टिकट नगर निगम रुड़की लिखा हुआ है। इस पर रोजाना की तारीख भी लिखी जा रही है। जहां रकम दर्ज है, वह तादाद के कॉलम में दर्ज की जा रही है ताकि यह मालूम न हो सके कि यह रकम एक व्यक्ति से ली जा रही है या एक से ज्यादा व्यक्तियों से। बहरहाल, रसीद का सच क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
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लोडिंग-अनलोडिंग की तहबाजारी में भी घपले की बू
बाजार में सामान उतारने और लोड करने वाले वाहनों से भी वसूली की जा रही है। इसके लिए भी नगर निगम की ओर से कोई टेंडर जारी नहीं किया गया है। मामले में जिलाधिकारी से शिकायत करने वाले आदेश सैनी सम्राट का कहना है कि प्रत्येक माल उतारने और चढ़ाने वाली गाड़ी से रोजाना 50 और 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसे में यह राशि भी माह में लाखों की है।
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नगर निगम की ओर से तहबाजारी के लिए एक साल से कोई ठेका या टेंडर जारी नहीं किया गया है। यदि किसी के पास वसूली किए जाने के साक्ष्य हैं तो शिकायत के साथ उपलब्ध कराए जाने पर जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-नूपुर वर्मा, नगर आयुक्त रुड़की