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अगले सप्ताह पता चलेगा वन्यजीवों के अंगों का सच
Updated Fri, 20 Apr 2018 12:20 AM IST
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रुड़की। करीब दो माह पहले मुख्य बाजार की दुकानों में मिले वन्यजीवों के अंगों के अवशेष असली हैं या नकली, इसका खुलासा अगले सप्ताह हो पाएगा। जांच के लिए देहरादून भेजे गए अंगों की रिपोर्ट अगले सप्ताह आएगी। वन्यजीवों के अंग होने की बात सच निकली तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फरवरी में पीपुल्स फॉर एनीमल नाम के एनजीओ ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी कि रुड़की में कुछ दुकानदारों की ओर से वन्यजीवों के अंगों के अवशेषों की बिक्री की जा रही है। सूचना पर वन विभाग की टीम ने एनजीओ अधिकारियों के साथ मिलकर मेन बाजार स्थित पूजन सामग्री बेचने वाली दो दुकानों में छापा मारा था। अधिकारियों की कार्रवाई से बाजार में हड़कंप मचा रहा। अधिकारियों ने मौके पर दुकानों से वन्यजीवों के अंग जैसे हत्था जड़ी, सियार सिंघी आदि बरामद किए थे। यह असली हैं या नकली यह वन विभाग के अधिकारी भी नहीं जान पाए। बाद में अधिकारियों ने इन अवशेषों को जांच के लिए देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान भेजे थे। दो माह बीत गए, लेकिन रिपोर्ट का अभी तक कहीं कोई पता नहीं है। इस पर वन विभाग के अधिकारियों ने संस्थान के अधिकारियों से संपर्क किया। भारतीय वन्य जीव संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक अगले सप्ताह तक रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
एक संस्थान, इसलिए रिपोर्ट आने में देरी
अधिकारियों के मुताबिक देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान में वन्य जीवों से जुड़ी जांच के मामले पूरे देश से आते हैं। यह इकलौता संस्थान है जो कि अधिकृत है। इस तरह का एक संस्थान दिल्ली में भी है, लेकिन वह अधिकृत नहीं है। देहरादून के संस्थान में जांच जांच मामले ज्यादा आने के कारण कई बार जांच रिपोर्ट आने में देरी हो जाती है।
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बरामद वन्य जीवों के अंगों के अवशेष के संदर्भ में भारतीय वन्य जीव संस्थान से संपर्क किया गया है। संस्थान की ओर से अगले सप्ताह जांच रिपोर्ट भेजे जाने की बात कही गई है।
मयंग गर्ग, रेंजर रुड़की रेंज
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फरवरी में पीपुल्स फॉर एनीमल नाम के एनजीओ ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी कि रुड़की में कुछ दुकानदारों की ओर से वन्यजीवों के अंगों के अवशेषों की बिक्री की जा रही है। सूचना पर वन विभाग की टीम ने एनजीओ अधिकारियों के साथ मिलकर मेन बाजार स्थित पूजन सामग्री बेचने वाली दो दुकानों में छापा मारा था। अधिकारियों की कार्रवाई से बाजार में हड़कंप मचा रहा। अधिकारियों ने मौके पर दुकानों से वन्यजीवों के अंग जैसे हत्था जड़ी, सियार सिंघी आदि बरामद किए थे। यह असली हैं या नकली यह वन विभाग के अधिकारी भी नहीं जान पाए। बाद में अधिकारियों ने इन अवशेषों को जांच के लिए देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान भेजे थे। दो माह बीत गए, लेकिन रिपोर्ट का अभी तक कहीं कोई पता नहीं है। इस पर वन विभाग के अधिकारियों ने संस्थान के अधिकारियों से संपर्क किया। भारतीय वन्य जीव संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक अगले सप्ताह तक रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
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एक संस्थान, इसलिए रिपोर्ट आने में देरी
अधिकारियों के मुताबिक देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान में वन्य जीवों से जुड़ी जांच के मामले पूरे देश से आते हैं। यह इकलौता संस्थान है जो कि अधिकृत है। इस तरह का एक संस्थान दिल्ली में भी है, लेकिन वह अधिकृत नहीं है। देहरादून के संस्थान में जांच जांच मामले ज्यादा आने के कारण कई बार जांच रिपोर्ट आने में देरी हो जाती है।
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बरामद वन्य जीवों के अंगों के अवशेष के संदर्भ में भारतीय वन्य जीव संस्थान से संपर्क किया गया है। संस्थान की ओर से अगले सप्ताह जांच रिपोर्ट भेजे जाने की बात कही गई है।
मयंग गर्ग, रेंजर रुड़की रेंज