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33 लाभार्थियों को नहीं मिल रहा अपना आवास
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रुड़की ब्लॉक के टोडा कल्याणपुर गांव निवासी 33 लोगों के पात्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण, उनके पास स्वयं की भूमि नहीं है। ग्रामीणों ने बीडीओ से गांव के पास खाले के नाम दर्ज सरकारी भूमि पर आवास बनाने की अनुमति देने की मांग की है। बीडीओ ने इस मामले को परियोजना विभाग को भेज दिया है। इस पर 17 अप्रैल को सुनवाई होगी।
टोडा कल्याणपुर गांव में 33 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं के मकान नहीं हैं। इन लोगों ने आवास के लिए ब्लॉक में आवेदन किया था। विभाग ने जांच के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन लोगों को आवास दिए जाने के लिए चयनित कर लिया है, लेकिन आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इनके पास खुद की भूमि नहीं है। गांव निवासी सलीम, निसार, मंजुरा, अकरम, समीम, तालिब, इकराम, अनवर, अमजद, फुरकान, मुस्तकीम, एहसान आदि का कहना है कि अपनी जमीन नहीं होने के चलते वे सब लोग वर्षों से गांव के आसपास खाली पड़ी जमीन पर रह रहे थे। टोडा कल्याणपुर निवासी होने के बावजूद उन्हें यहां के स्थायी निवासी होने का एहसास नहीं हो रहा है। जिस भूमि पर वह रहते हैं वह राजस्व अभिलेखों में खाले के नाम दर्ज है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें इसी भूमि पर आवास बनाने की अनुमति दी जाए। बीडीओ आरती सती ने बताया कि जिस भूमि पर लोग रहे रहे हैं, वह ग्राम समाज की नहीं है। मामले को परियोजना विभाग को भेजा गया है। परियोजना विभाग ने कमेटी गठित की है। 17 अप्रैल को अपीलीय कमेटी इस विषय पर चर्चा करेगी। इसके बाद ही आवास बनाने के लिए रुपये लाभार्थियों के खातों में डाले जाएंगे।
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टोडा कल्याणपुर गांव में 33 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं के मकान नहीं हैं। इन लोगों ने आवास के लिए ब्लॉक में आवेदन किया था। विभाग ने जांच के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन लोगों को आवास दिए जाने के लिए चयनित कर लिया है, लेकिन आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इनके पास खुद की भूमि नहीं है। गांव निवासी सलीम, निसार, मंजुरा, अकरम, समीम, तालिब, इकराम, अनवर, अमजद, फुरकान, मुस्तकीम, एहसान आदि का कहना है कि अपनी जमीन नहीं होने के चलते वे सब लोग वर्षों से गांव के आसपास खाली पड़ी जमीन पर रह रहे थे। टोडा कल्याणपुर निवासी होने के बावजूद उन्हें यहां के स्थायी निवासी होने का एहसास नहीं हो रहा है। जिस भूमि पर वह रहते हैं वह राजस्व अभिलेखों में खाले के नाम दर्ज है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें इसी भूमि पर आवास बनाने की अनुमति दी जाए। बीडीओ आरती सती ने बताया कि जिस भूमि पर लोग रहे रहे हैं, वह ग्राम समाज की नहीं है। मामले को परियोजना विभाग को भेजा गया है। परियोजना विभाग ने कमेटी गठित की है। 17 अप्रैल को अपीलीय कमेटी इस विषय पर चर्चा करेगी। इसके बाद ही आवास बनाने के लिए रुपये लाभार्थियों के खातों में डाले जाएंगे।
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