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इन ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन कब होगा डीएम साहब
Updated Mon, 14 May 2018 12:04 AM IST
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रुड़की।
जिले में सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियां बिना रजिस्ट्रेशन और नंबरों के व्यावसायिक गतिविधियों में लगी हैं। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की चपत लग रही है। बावजूद इसके ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ न तो पुलिस और न आरटीओ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
क्षेत्र में जिन ट्रैक्टरों का पंजीकरण कराया भी गया है उनका पंजीकरण कृषि कार्य के लिए होता है। जबकि जिले में अधिकतर ट्रैक्टर ट्रालियां खनन सामग्री ढोने में लगी हुई हैं। बताया जा रहा है कि अवैध खनन सामग्री ढोने पर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए मालिक अपने ट्रैक्टरों का पंजीकरण नहीं करवा रहे हैं। घाड़ क्षेत्र में भी वैध-अवैध खनन में कई ट्रैक्टर लगे हुए हैं। घाड़ क्षेत्र से कई ट्रैक्टर खनन सामग्री भरकर मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा तक जा रहे हैं, लेकिन कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
एजेंसियों पर कार्रवाई करे प्रशासन
जिले में अलग-अलग कंपनियों के ट्रैक्टरों की एजेंसियां हैं। किसान और बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर इन एजेंसियों से ट्रैैक्टर खरीदने के बाद उनका पंजीकरण नहीं करवाते। जिला प्रशासन को चाहिए कि ट्रैक्टरों के पंजीकरण के लिए एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करें।
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एआरटीओ कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में
ट्रैक्टरों को कृषि कार्य के लिए पंजीकरण कराने पर एआरटीओ कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि हरिद्वार और रुड़की में जितने भी ट्रैक्टरों का पंजीकरण कृषि कार्य के लिए किया गया है उनमें से अधिकतर का उपयोग खनन सामग्री ढोने में किया जा रहा है।
टैक्स पेड ट्रैक्टर ही ढो सकते हैं खनन सामग्री
बताया जा रहा है कि शासन से करीब छह माह पूर्व टैक्स पेड कामर्शियल ट्रैक्टरों से खनन सामग्री ढोने के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन, पुलिस और एआरटीओ की ओर से सख्ती न करने से बिना पंजीकरण और बिना टैक्स पेड किए ट्रैक्टरों का संचालन खुलेआम हो रहा है। वहीं अधिकतर ट्रैक्टरों पर लगी ट्रालियां भी नियमों के विरुद्ध हैं।
दून में निजी वाहनों से खनिज ढुलान बंद, हरिद्वार में क्यों नहीं
रुड़की। जिलाधिकारी देहरादून के आदेश पर वन विकास निगम ने देहरादून जिले में गैर व्यावसायिक (प्राइवेट) वाहनों (ट्रैक्टर, ट्रक, लोडर) से उप खनिज ढुलान पर रोक लगा दी है। ऐसे स्थानीय लोगों का कहना है कि हरिद्वार में जिले में गैर व्यावसायिक वाहनों से उपखनिज ढुलान पर रोक क्यों नहीं लग सकती। उनका कहना था कि बिना पंजीकरण के चल रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, ऐसे में इनका पंजीकरण कराया जाना चाहिए।
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जिले में सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियां बिना रजिस्ट्रेशन और नंबरों के व्यावसायिक गतिविधियों में लगी हैं। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की चपत लग रही है। बावजूद इसके ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ न तो पुलिस और न आरटीओ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
क्षेत्र में जिन ट्रैक्टरों का पंजीकरण कराया भी गया है उनका पंजीकरण कृषि कार्य के लिए होता है। जबकि जिले में अधिकतर ट्रैक्टर ट्रालियां खनन सामग्री ढोने में लगी हुई हैं। बताया जा रहा है कि अवैध खनन सामग्री ढोने पर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए मालिक अपने ट्रैक्टरों का पंजीकरण नहीं करवा रहे हैं। घाड़ क्षेत्र में भी वैध-अवैध खनन में कई ट्रैक्टर लगे हुए हैं। घाड़ क्षेत्र से कई ट्रैक्टर खनन सामग्री भरकर मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा तक जा रहे हैं, लेकिन कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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एजेंसियों पर कार्रवाई करे प्रशासन
जिले में अलग-अलग कंपनियों के ट्रैक्टरों की एजेंसियां हैं। किसान और बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर इन एजेंसियों से ट्रैैक्टर खरीदने के बाद उनका पंजीकरण नहीं करवाते। जिला प्रशासन को चाहिए कि ट्रैक्टरों के पंजीकरण के लिए एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करें।
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एआरटीओ कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में
ट्रैक्टरों को कृषि कार्य के लिए पंजीकरण कराने पर एआरटीओ कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि हरिद्वार और रुड़की में जितने भी ट्रैक्टरों का पंजीकरण कृषि कार्य के लिए किया गया है उनमें से अधिकतर का उपयोग खनन सामग्री ढोने में किया जा रहा है।
टैक्स पेड ट्रैक्टर ही ढो सकते हैं खनन सामग्री
बताया जा रहा है कि शासन से करीब छह माह पूर्व टैक्स पेड कामर्शियल ट्रैक्टरों से खनन सामग्री ढोने के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन, पुलिस और एआरटीओ की ओर से सख्ती न करने से बिना पंजीकरण और बिना टैक्स पेड किए ट्रैक्टरों का संचालन खुलेआम हो रहा है। वहीं अधिकतर ट्रैक्टरों पर लगी ट्रालियां भी नियमों के विरुद्ध हैं।
दून में निजी वाहनों से खनिज ढुलान बंद, हरिद्वार में क्यों नहीं
रुड़की। जिलाधिकारी देहरादून के आदेश पर वन विकास निगम ने देहरादून जिले में गैर व्यावसायिक (प्राइवेट) वाहनों (ट्रैक्टर, ट्रक, लोडर) से उप खनिज ढुलान पर रोक लगा दी है। ऐसे स्थानीय लोगों का कहना है कि हरिद्वार में जिले में गैर व्यावसायिक वाहनों से उपखनिज ढुलान पर रोक क्यों नहीं लग सकती। उनका कहना था कि बिना पंजीकरण के चल रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, ऐसे में इनका पंजीकरण कराया जाना चाहिए।